श्री काशी विश्वनाथ धाम में महाशिवरात्रि की तैयारी अंतिम चरण में, रोशनी से जगमगा रहा महादेव का धाम
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*श्री काशी विश्वनाथ धाम में महाशिवरात्रि की तैयारी अंतिम चरण में, रोशनी से जगमगा रहा महादेव का धाम*
*मंदिर सीईओ ने लिया तैयारियों का जाएगा, न्यास के कार्मिकों को तैयारियों को जल्द पुख्ता करने का दिया निर्देश*
*कतार में लगे कई बुजुर्गों से संवाद कर उनके सुगम दर्शन की कराई व्यवस्था, बाल भक्तों को उपलब्ध कराया महादेव का आशीर्वाद*
श्री काशी विश्वनाथ धाम में महापर्व महाशिवरात्रि की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई है। श्री काशी विश्वनाथ धाम का कोना-कोना रोशनी से जगमग हो गया है। विद्युत झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से की गई आकर्षक सजावट से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रांगण की आभा देखते ही बन रही है। महाशिवरात्रि की तैयारियों को पुख्ता कराने में न्यास के अधिकारी भी जुटे हुए हैं। मंदिर के सीईओ श्री विश्व भूषण ने धाम का भ्रमण कर तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने तैयारियों में जुटे कार्मिकों को महाशिवरात्रि के दृष्टिगत सभी कार्यों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए किए गए प्रबंधों का भी जायजा लिया और कतार में लगे श्रद्धालुओं से बातचीत कर व्यवस्था का फीडबैक भी लिया। सीईओ ने कतार में लगे कई बुजुर्ग श्रद्धालुओं के पैर में दर्द होने पर उनके सुगम दर्शन की व्यवस्था कराई। वहीं गोद में बच्चे लेकर कतार में चल रहे श्रद्धालुओं को भी न्यास के कार्मिक लगाकर श्री काशी विश्वनाथ महादेव का सुगम दर्शन कराया। उन्होंने बाल भक्तों के पास पहुंचकर श्री काशी विश्वनाथ महादेव के स्नेह के तौर पर बिस्कुट, टॉफी, चॉकलेट भी दिए। महादेव का आशीर्वाद पाकर बच्चे प्रसन्न हो गए और हर हर महादेव के जयकारे लगाने लगे।
*।।श्री काशीविश्वनाथो विजयतेतराम।।*
नागा साधुओं एवं महात्माओं का दल लेकर पहुंचा बाबा की हल्दी
वाराणसी। ‘पहिरे ला मुंडन क माला मगर दुल्हा लजाला..’,‘दुल्हा के देहीं से भस्मी छोड़ावा सखी हरदी लगावा ना…’,’शिव दुल्हा के माथे पर सोहे चनरमा…।’ ये उन गीतों की पंक्तियां हैं जो सोमवार की शाम काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर गुंजायमान हो रही थीं। अवसर था भूतभावन भगवान शिव के विवाह से पूर्व हल्दी के लोकाचार का।
महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ से जुड़ी लोकपरंपरा का निर्वाह इस वर्ष श्रीपंचायती निरंजनी अखाड़ा के नागा साधुओं एवं महात्माओं की ओर से किया गया। श्रीपंचायती निरंजनी अखाड़ा की ओर से बाबा के लिए हल्दी महाराणा प्रताप की धरती मेवाड़ से मंगाई गई। श्रीपंचायती निरंजनी अखाड़ा की उदयपुर शाखा के प्रभारी संत दिगंबर खुशहाल भारती के नेतृत्व में नागा साधुओं एवं संन्यासियों का समूह मणिकर्णिका तीर्थ से शोभायात्रा के रूप में टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास के लिए प्रस्थान किया। डमरुओं की गर्जना और हरहर महादेव के घोष के साथ साधु-संतों और गृहस्थ भक्तों का समूह महंत आवास पहुंचा। एक थाल में हल्दी, 11 थाल में फल, पांच थाल में मेवा-मिठाई, एक थाल में वस्त्र और एक थाल में आभूषण लेकर वे महंत आवास पहुंचे। यहां परंपरागत ढंग से सभी का स्वागत किया गया। संत दिगंबर शुखहाल भारती ने बाबा के लिए मेवाड़ से मंगाई गई हल्दी की थाल, जिसका पूजन प्रयागराज में किया गया था, बाबा को अर्पित की। महंत परिवार के सदस्यों ने सभी साधु-महात्माओं को अंगवस्त्रम् एवं रुद्राक्ष की माला भेंट कर उनका स्वागत किया।
इसके बाद महिलाओं ने हल्दी की रस्म पूरी की। एक तरफ मंगल गीतों का गान हो रहा था दूसरी तरफ बाबा को हल्दी लगाई जा रही थी। मांगलिक गीतों से महंत आवास गुंजायमान हो रहा था। ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच शिव-पार्वती के मंगल दाम्पत्य की कामना पर आधारित गीत गाए गए। ‘अड़भंगी क चोला उतार शिव दुल्हा बना जिम्मेदार’, और ‘भोले के हरदी लगावा देहिया सुंदर बनावा सखी…’आदि हल्दी के गीतों में दुल्हे की खूबियों का बखान किया गया तो दूल्हन का ख्याल रखने की ताकीद भी की गई। मंगल गीतों में यह चर्चा भी की गई कि विवाह के लिए तैयारियां कैसे की जा रही हैं। नंदी, शृंगी, भृंगी आदि गण नाच-नाच कर सारा काम कर रहे हैं। शिव का सेहरा और पार्वती की मौरी कैसे तैयार की जा रही है। हल्दी की रस्म के बाद नजर उतारने के लिए ‘साठी क चाऊर चूमिय चूमिय..’ गीत गाकर महिलाओं ने भगवान शिव की रजत मूर्ति को चावल से चूमा। बाबा के तेल-हल्दी की रस्म दिवंगत महंत डा. कुलपति तिवारी की पत्नी मोहिनी देवी के सानिध्य में हुई। पूजन अर्चन का विधान उनके पुत्र पं. वाचस्पति तिवारी ने पूर्ण किये। बाबा को खास बनारसी ठंडई, पान और पंचमेवा का भोग लगाया गया। इससे पूर्व बाबा का विशेष राजसी-स्वरूप में शृंगार संजीव रत्न मिश्र ने किया।


