जम्मू कश्मीर के पहलगाम कायराना आतंकी हमले के विरोध में
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जम्मू कश्मीर के पहलगाम कायराना आतंकी हमले के विरोध में बुढ़ाना में जमीयत उलमा-ए-हिंद का मौन मार्च, आतंकवाद के खिलाफ उठी एकजुट आवाज
बुढ़ाना, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए कायराना आतंकी हमले के विरोध में मंगलवार को कस्बे में जमीयत उलमा-ए-हिंद के तत्वावधान में एक विशाल मौन मार्च का आयोजन किया गया। इस मौन मार्च में बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, धार्मिक उलमा कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक, व्यापारी एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मौन मार्च का उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना और शहीद निर्दोष नागरिकों के प्रति खिराजे अकीदत पेश करना था। मौन मार्च में जमीयत उलमा-ए-हिंद बुढ़ाना के कार्यकर्ताओं ने अपने हाथों में विभिन्न संदेश लिखी तख्तियां थाम रखी थीं, जिन पर “आतंकवाद मुर्दाबाद”, “हिंदुस्तान जिंदाबाद”, “आतंक का कोई मजहब नहीं”आतंकवाद नहीं चलेगा नहीं चलेगा,जैसे नारे लिखे हुए थे। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने कस्बे के नागरिकों का ध्यान आकर्षित किया और हर वर्ग के लोगों ने मौन मार्च में सहयोग दिया। यह मौन छोटा बाजार से प्रारंभ होकर मुख्य बाज़ार, कांधला रोड, नगर पंचायत के सामने पीर शाह विलायत के सामने होते हुए, मदरसे में पहुंचा जहां मार्च समाप्त हुआ। मार्च के दौरान पूर्ण अनुशासन और शांति बनाए रखी गई, जमीयत उलमा-ए-हिंद के कार्यकर्ताओं ने किसी भी प्रकार के नारेबाजी से बचते हुए उन्होंने केवल हाथों में संदेशों के माध्यम से अपना आक्रोश प्रकट किया। मौन मार्च के प्रारंभ होने से पूर्व जमीयत उलमा-ए-हिंद बुढ़ाना इकाई के कार्यवाहक नगर अध्यक्ष मुफ्ती फरमान क़ासमी,ओर मुफ्ती असरार मज़ाहीरी,मौलाना खालिद क़ासमी,मौलाना अनस,हाफिज अब्दुल गफ्फार,मुफ्ती गुलफाम कासमी और मौ0आसिफ कुरैशी ने आतंकवाद के विरोध में अपने अपने विचारों द्वारा संबोधित करते हुए कहा कि “आतंकवाद न केवल मानवता का दुश्मन है,बल्कि कायराना आतंकी हमले से निर्दोष लोगों की जान लेना बहुत ही शर्मनाक ओर निंदनीय कृत्य है। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे घिनौने कृत्य करने वालो की सजा सिर्फ ओर सिर्फ फांसी है। वक्ताओं ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद हर प्रकार के आतंकवाद की निंदा करता है। इस देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी एकजुट होकर आतंक के खिलाफ लड़ेंगे। भारत की एकता और भाईचारा किसी भी आतंकी साजिश से कमजोर नहीं होने वाला” है। संयुक्त महासचिव हाफिज राशिद कुरैशी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए आतंकवाद के खिलाफ एलामियां पढ़कर सुनाया और कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद हमेशा से अमन, इंसानियत और राष्ट्रीय एकता के लिए कार्य करती रही है और करती रहेगी। सरकार से मांग की कि इस हमले में शामिल दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी बेगुनाह की जान ले लेना पूरी इंसानियत की हत्या है। मौन मार्च में मौ0आसिफ कुरैशी,हाफिज राशिद, हाफ़िज़ अब्दुल गफ्फार,मुफ्ती वसीम नफीस,मुफ्ती असरार मज़ाहीरी,मौलाना आसिफ इस्लाही,मुफ्ती गुलफाम क़ासमी,मौलाना सालिम क़ासमी,मुफ्ती फरमान क़ासमी,क़ारी नदीम,हाफिज शहज़ाद, मुफ्ती निशात,मौलाना सनव्वर क़ासमी,मौलाना जाहिद,विनोद त्यागी एडवोकेट,एहतेशामुल हक,तौसीफ राही,नौशाद काला,मन्नू कुरैशी,आज़म फारूकी, इसरार इदरीशी सभासद राशिद मंसूरी,मसूद कुरैशी,सल्लू कुरैशी, नजम कुरैशी,इरशाद सलमानी,क़ारी अब्दुर रहमान,असगर कुरैशी,अशरफ़ कुरैशी,सहित कई महत्वपूर्ण वरिष्ठ सदस्यों की मौजूदगी रही।


