सऊदी हुकूमत जन्नत-उल बक़ी में रौज़े के निर्माण करने की इजाज़त दे- मौलाना यासूब अब्बास
1 min read
सऊदी हुकूमत जन्नत-उल बक़ी में रौज़े के निर्माण करने की इजाज़त दे- मौलाना यासूब अब्बास
लखनऊ : मौलाना यासूब अब्बास की ओर से सऊदी अरब हुकूमत के विरोध में जन्नतुल बक़ी के कब्रिस्तान मदीने में रसूल-ए-इस्लाम की इकलौती बेटी जनाबे फातिमा और इमामों के रौज़ों को ध्वस्त किये जाने के विरोध में शहीद स्मारक लखनऊ पर एक विशाल विरोध प्रर्दशन आज दिनांक 28 मार्च 2026 को आयोजित हुआ जिसमें उलमा, खुतबा, जाकरीन, मातमी अंजुमनों के लोगों और कौमी संस्थाओं से जुड़े लोगो ने अपने अपने विचार व्यक्त किये और साउदी हूकूमत के ख़िलाफ़ अपने ग़म व गुस्से का इज़्हार किया। इस मौके पर लोगों ने अपने घरों पर काले परचम व हाथ पर काली पट्टी बांध कर अपना एहतिजाज दर्ज किया।
मौलाना यासूब अब्बस ने कहा कि आज से लगभग 101 वर्ष पूर्व सऊदी अरब के शासक आले सऊद ने जन्नत-उल-बक़ी में मोहम्मद साहब के खानदान वालों और उनकी बेटी के रौज़ों को ध्वस्त कर दिया था। बहुत अफसोस की बात है कि सऊदी हुकूमत जिस रसूल का कलमा पढ़ती है उसकी बेटी की क़ब्र पर आज तक कोई साया नहीं है। मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि बड़े शर्म की बात है कि सऊदी शासक अपने बड़े बड़े महलों में रह रहे हैं लेकिन जिनका वह कलमा पढ़ते हैं उनके रसूल की बेटी की क़ब्र खुले आसमान के नीचे है मौलाना ने सऊदी अरब हुकूमत से मांग की है कि या तो जन्नतुल बकी का निर्माण कराए या हमको इजाजत दें कि हम वहां जाकर मज़ारों का पुनः निर्माण करें। मौलाना ने भारत के प्रधानमंत्री से अपील की है कि अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके सऊदी अरब सरकार पर दबाव बनाए कि वह जन्नत-उल-बकी, मदीने में होने वाले अत्याचारों को बन्द कराये और शिया समुदाय को रौज़ों की तामीर (पुनर्निर्माण) कराने की इजाज़त दिलाएं।
मौलाना यासूब अब्बास ने अपने भाषण में कहा कि इस्लाम धर्म किसी पर ज़बरदस्ती अत्याचार नहीं करता, सऊदी अरब मुसलमानों पर ज़बरदस्ती करके अपना दृष्टिकोण दूसरे मुसलमानों पर लादना चाहता है मौलाना ने कहा कि सऊदी हुकूमत इस्लामी मुल्क नहीं बल्कि आतंकवादी देश है जो इस्लाम का नक़ाब ओढ़कर सारे ग़ैर इस्लामी काम अंजाम दे रहा है मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि जो अपने रसूल की इकलौती बेटी व उनके परिवार वालों के बने रौज़ौ को ध्वस्त कर दे वो किस मुंह से ख़ुद को मुसलमान कहते हैं।
ऑल इण्डिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष, स्व. मौलाना मिर्जा मोहम्मद अतहर साहब तथा स्व. मौलाना मिर्जा मोहम्मद अशफ़ाक साहब ने भी भारत के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। इसी को लेकर ऑल इण्डिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना साएम मेंहदी नक़वी साहब ने प्रधानमंत्री भारत सरकार को पत्र लिखा है जिसमें उन्होने प्रधान मंत्री महोदय से हस्तक्षेप की मांग की है।
विरोध प्रदर्शन में मौलाना अनवर रिज़वी, मौलाना मीसम ज़ैदी, मौलाना जाफ़र अब्बास, मौलाना रज़ा अब्बास मौलाना अली अब्बास छपरवी, मौलाना अली रिज़वान, मौलाना अली मुत्तक़ी ज़ैदी, मौलाना शरर नक़वी, मौलाना क़म्बर रिज़वी, मौलाना अब्बास रज़ा नय्यर जलालपुरी, मौलाना हसन मीरपूरी, मौलाना तफ़सीर हसन रिज़वी, ऑल इंडिया शिया हुसैनी फंड के जनरल सेक्रेटरी हसन मेंहदी झब्बु, तंज़ीम ए मिल्लत से प्रिंस इक़बाल मिर्ज़ा समेत अन्य गणमान्य लोग ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सऊदी हुकूमत का विरोध किया और जन्नतुल बक़ी में रौज़ों के पुनर्निर्माण की मांग की।
विरोध प्रदर्शन में क़ौमी संस्थाओं से अर्शी रज़ा, हैदरी टास्क फोर्स के पदाधिकारी, तन्ज़ीमे हैदरी से शेख़ सईद, इदाराए तहाफ़्फ़ुज़ ए अज़ा के जनरल सेक्रेटरी नुसरत हुसैन (लाला), इमरान अख़्तर भोले, राजू रिज़वी, रफ़ीक़ुल रिज़वी, मेहंदी हसन बब्लू समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
आखिर में मौलाना एजाज़ अतहर ने मजलिस को ख़िताब किया जिसमें उन्होने जन्नतुल बकी और जनाबे फातिमा स.अ. के मसाएब बयान किये और दस्ता ए ख़तीब उल ईमान से शुज़ा रिज़वी ने शहज़ादी हज़रत फातिमा ज़हरा से मन्सूब नौहा पेश किया जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने ज़ोरदार मातम किया और बाद में आले सऊद मुर्दाबाद अमरीका मुर्दाबाद इज़राइल मुर्दाबाद के नारे लगाए।


