पुरातत्वविद विजय कुमार पूर्व डीजीपी ने खुलासा कर तोड़ा मिथक कहा ,,हड़प्पा सभ्यता से पूर्व भी शस्त्रों से सुसज्जित सभ्यता ,,रही मौजूद।
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पुरातत्वविद विजय कुमार पूर्व डीजीपी ने खुलासा कर तोड़ा मिथक कहा ,,हड़प्पा सभ्यता से पूर्व भी शस्त्रों से सुसज्जित सभ्यता ,,रही मौजूद। लखनऊ 9 फरवरी प्राप्त समाचार के अनुसार गत दिवस उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक एवं वरिष्ठ लोकप्रिय आईपएस विजय कुमार ने विजय कुमार ने लखनऊ में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे देश के लोगों में यह मिथक जोरदार ढंग से प्रचलित है कि सबसे पूर्व में हड़प्पा सभ्यता मौजूद रही है परंतु उनके शोध से यह मिथक टूटा हुआ नजर आ रहा है
क्योंकि हड़प्पा सभ्यता से पूर्व भी और हड़प्पा सभ्यता के समय में पूर्व काल में बाकायदा एक सुसज्जित संगठित सैन्य बल युद्ध हथियारों से सुसज्जित समानांतर सभ्यता मौजूद थी और यह सभ्यता पूर्व काल में तलवार लेकर उस समय युद्ध के देवता के रूप रूप में प्रचलित कार्तिकेय का तांबे आदि का चित्र लेकर साथ चलते थे या कार्तिकेय की स्मृति अपने साथ रखते थे यह सब पहले और 2500 वर्ष ईसा पूर्व घटित हो रहा था जहां तक इस समानांतर सभ्यता का प्रश्न है तो यह और हड़प्पा सभ्यता से 400 वर्ष पश्चात भी मौजूद रही है
जैसा कि पूरा विश्व में एक बहुत बड़ा मिथक यह है कि हड़प्पा सभ्यता सबसे प्राचीन है यह मिथक टूटता नजर आता है पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए प्रमुख पुरातत्वविद विजय कुमार ने बताया कि यह समानांतर सभ्यता हड़प्पा कालीन सभ्यता से मुकाबला करने हेतु विभिन्न प्रकार के शास्त्र भी बनाते थे हड़प्पा सभ्यता के समानांतर इस सभ्यता को योद्धा जनजाति भी कहा जाता था जो पश्चिमी भारत में फैली थी इनके युद्ध शस्त्रों में उसे समय प्रचलित युद्ध के देवता कार्तिकेय को प्रमुखता के साथ दर्शाया गया है इसलिए निष्कर्ष यह है कि हड़प्पा सभ्यता से पूर्व भी और बाद में भी यह समानांतर सभ्यता मौजूद रही है जो इतिहास के मिथक को खंडित करता है हड़प्पा की समकालीन डिस्कवरी में भी मिथक था जो टूट गया है क्योंकि यह समानांतर सभ्यता लगातार मौजूद रही प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विजय कुमार ने बताया कि उन्होंने इस संदर्भ में तीन आर्टिकल सिनोली, मैनपुरी आदि के भी लिखे हैं जिनमें स्थिति को पूरी तौर से स्पष्ट किया गया है उन्होंने बताया कि इंडियन जर्नल ऑफ़ आर्कियोलॉजी, लखनऊ, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज, लखनऊ, शहजाद राय रिसर्च इंस्टीट्यूट,7 बागपत यूपी, के संयुक्त अध्ययन दल ने सम्पन्न किया यह महत्वपूर्ण शोध ।
प्रमुख राष्ट्रीय पुरातत्व विद विजय कुमार ने बताया कि
जनपद शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश के निगोही क्षेत्र में कृषकों एवं मजदूरों को जमीनमें दबे हुये ताम्रयुगीन सभ्यता के प्राचीन तांबे के हथियार मिले । सूचना मिलने पर यह हथियार डॉ0 अमित राय जैन (निदेशक, शहजाद राय रिसर्च इंस्टीट्यूट, बागपत यूपी) द्वारा एकत्रित किये गए थे । उन्होंने यानी विजय कुमार (मुख्य संपादक, इंडियन जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजी, लखनऊ [www.ijarch.org] द्वारा मिट्टी के टुकड़ों और कुछ हथियारों का अध्ययन किया गया । उनके द्वारा ढेलों मे दबे हुये हथियारों को बीएसआईपी (बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज, लखनऊ) के प्रोफेसर रवि भूषण को भेज दिया गया । उन्होने इसका अध्ययन
किया ।
प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं प्रमुख पुरातत्वविद विजय कुमार ने बताया कि
निगोही से प्राप्त हथियारों की संख्या 200 से अधिक है, इन ताम्र निधि मेंतलवारें, भालें, कुल्हाड़ियां, छेनी, मानवाकृतियां, हस्त-रक्षा कवच, चॉपर, चाकू,आरी आदि मिले है । पूर्व में इस प्रकार के हथियार पूरे उत्तर भारत मे पाये गये थे किन्तु इनकी सही तिथियां अभी तक प्राप्त नहीं की जा सकी थी । कुछ पुराविदों ने इनकी तिथि के सम्बन्ध में अनुमान लगाये थे | इन हथियारों और इनसे जुड़ी गैरिक मृदभाण्ड सभ्यता की सही तिथि, तत्कालीन जलवायु और अन्य पुरातात्विक पैरीमीटर पता लगाने के लिये इन अवशेषों का गहनता से विश्लेषण और शोध किया गया । रेडियो कार्बन डेट का पता लगाने के लिये उन मिट्टी के ढ़ेलो का जिसमे हथियार दबे हुये पाये गये थे, उनका अध्ययन करने के लिये एक्सेलरेटेड मॉस स्पैक्ट्रोमीटर का प्रयोग किया गया । इस अध्ययन के उपरान्त इन अवशेषों की कार्बन तिथियां 3610 (कैलिब्रेटेड बी0पी) से लेकर 4328 (कैलिब्रेटेड बी0पी) तक पायी गयी ।
उन्होने बताया कि 
यह कालखण्ड मैच्योर हड़प्पा काल से लेकरलेटर हड़प्पा काल तक फैला हुआ है । मिट्टी में पाये हुये ऑर्गैनिक मैटर के माध्यमसे तत्कालीन जलवायु का निर्धारण करने के लिये कार्बन आइसोटोप स्टडी और कार्बन नाइट्रोजन अनुपात की स्टडी की गयी । इन अवशेषों की δ 13 C रेन्ज -18 से -20 प्रति हजार भाग पायी गयी और कार्बन नाइट्रोजन अनुपात 8 से 15 के बीच मे पाया गया, इससे यह परिलक्षित होता है कि जिस स्थान से हथियार पाये गये, वह झील के किनारे था । इसके अतिरिक्त अन्य क्लाइमेटिक पैरामीटर्स का पता लगाने के लिये इन सैम्पल्स का विस्तृत शोध और अध्ययन अभी चल रहा है। अंत में विजय कुमार जी ने सभी का आभार किया

