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May 9, 2026

Suraj Kesari

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राज्यपाल भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोरदार भाषण

1 min read

लखनऊ 8 फरवरी प्राप्त समाचार के अनुसार गत दिवस

मुख्यमंत्री ने विधान सभा में राज्यपाल जी द्वारा समवेत सदन में

दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में विचार व्यक्त किए

 

अयोध्या में भारत के राष्ट्र मन्दिर की पुनप्र्रतिष्ठा तथा देश के गौरव की प्राण प्रतिष्ठा का कार्य सम्पन्न हुआ, भारत की लोक आस्था का

सम्मान हुआ, भारत का जनविश्वास सुदृढ़ हुआ: मुख्यमंत्री

 

गांव-गांव में गई विकसित भारत संकल्प यात्रा ने हर व्यक्ति को

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में देश में हुए विकास,

कल्याण तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेण्ट कार्यों से अवगत कराया

 

यह देश राम राज्य की अवधारणा को ही स्वीकार करेगा, बिना भेदभाव

सभी को योजनाओं का लाभ देना तथा सबका साथ-सबका विकास,

सबका प्रयास-सबका विश्वास, यही रामराज्य की अवधारणा

 

डबल इंजन सरकार की डबल स्पीड भी,

अमृतकाल में इसके डबल से अधिक परिणाम भी मिल रहे

 

सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रदेश की कानून व्यवस्था ने बड़ी भूमिका

का निर्वहन किया, प्रदेश की कानून व्यवस्था को एक माॅडल के रूप में माना जाता

 

हमारी सरकार अन्नदाता किसानों के लिए समर्पित

 

प्रदेश में 06 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से ऊपर उठे

 

यू0पी0 ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 के माध्यम से लगभग 40 लाख करोड़ रु0 के

निवेश प्रस्ताव मिले, आगामी 19 फरवरी को प्रधानमंत्री जी के कर-कमलों से इनमें से

10 लाख करोड़ रु0 के निवेश प्रस्ताव की ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी का लखनऊ में आयोजन

 

वर्ष 2020 में महिला सशक्तीकरण के लिए प्रारम्भ

मिशन शक्ति कार्यक्रम देश में एक मॉडल बना

 

उ0प्र0 अब बिजनेस हब और निवेश का ड्रीम डेस्टिनेशन बना

 

वर्ष 2016-17 में प्रदेश का कुल विद्युत उत्पादन

5,600 मेगावाॅट था, जो वर्तमान में 8,688 मेगावाॅट हो गया

 

प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर

 

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे शीघ्र तैयार हो जाएगा, बलिया लिंक एक्सप्रेस-वे तथा

चित्रकूट लिंक एक्सप्रेस-वे की कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ रही, प्रयागराज

महाकुम्भ के पूर्व ही गंगा एक्सप्रेस-वे को संचालित किए जाने का प्रयास

 

प्रयागराज महाकुम्भ-2025 में सुरक्षा, स्वच्छता तथा सुव्यवस्था के

उसी माॅडल को स्थापित करेंगे, जो वर्ष 2019 के कुम्भ में किया गया था

 

पिछले पौने सात वर्षों में प्रदेश में 06 लाख सरकारी नौकरी पारदर्शी तरीके से दी गयी,

02 करोड़ से अधिक नौजवानों को नौकरी और रोजगार की सुविधा उपलब्ध करवाई गयी,

01 करोड़ 10 लाख से अधिक युवाओं और उद्यमियों को स्वरोजगार के साथ जोड़ा गया

 

01 लाख 55 हजार 600 से अधिक पुलिस कार्मिकों की भर्ती सम्पन्न, इनमें 22,670 महिला कार्मिक सम्मिलित, वर्तमान में 68,600 से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रचलित

 

स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के अन्तर्गत 17 लाख 61 हजार से अधिक

युवाओं को स्मार्टफोन और 7,54,000 युवाओं को टैबलेट से आच्छादित किया गया

 

16 डोमस्टिक एयरपोर्ट तथा 05 इण्टरनेशनल एयरपोर्ट के साथ

उ0प्र0 शीघ्र 21 एयरपोर्ट वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा

 

अयोध्या व काशी को सोलर सिटी तथा बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे

को सोलर एक्सप्रेस-वे के रूप में विकसित करने की कार्यवाही

 

प्रदेश सरकार ने जनवरी, 2024 तक गन्ना किसानों को 02 लाख 33 हजार 793 करोड़ रु0 गन्ना मूल्य का भुगतान किया, 22 वर्षों में जितना भुगतान हुआ, उससे ज्यादा

भुगतान मात्र 07 वर्षों में ही गन्ना किसानों के खातों में किया गया

 

उ0प्र0 में हम दृढ़संकल्प और लोक मंगल के की अवधारणा को लेकर

आगे बढ़े थे, वह संकल्प और दृढ़ता आज हर क्षेत्र में देखने को मिली

 

उ0प्र0 के स्किल्ड मैनपावर की डिमांड न केवल प्रदेश, देश में है, बल्कि दुनिया में भी

 

स्वामित्व योजना के अन्तर्गत 90,866 गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण

का कार्य पूरा, 75,78,000 से अधिक घरौनी वितरित

 

06 करोड़ 64 लाख लाभार्थियों की फैमिली आई0डी0 की अब तक सीडिंग

 

प्रदेश से 02 लाख करोड़ रु0 से अधिक का ओ0डी0ओ0पी0 दुनिया के मार्केट में पहुंच रहा

 

देश की पहली रैपिड रेल उ0प्र0 में चली

 

सोलर चरखे से उत्पादित खादी को मान्यता देने वाला उ0प्र0, देश का पहला राज्य

लखनऊ: 07 फरवरी, 2024

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा है कि अयोध्या में भारत के राष्ट्र मन्दिर की पुनप्र्रतिष्ठा तथा देश के गौरव की प्राण प्रतिष्ठा का कार्य सम्पन्न हुआ है। भारत की लोक आस्था का सम्मान हुआ। भारत का जनविश्वास सुदृढ़ हुआ है। लोकतांत्रिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है। भारत की सनातन आस्था गौरवान्वित हुई है। यह अपने उन सभी पूर्वजों के प्रति तर्पण, अर्पण का एक अवसर था, जिन्होंने स्वयं को इस पूरे आन्दोलन के प्रति होम किया था। 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या ऐसी लग रही थी, जैसा तुलसीदास जी ने कहा है कि ‘अवधपुरी प्रभु आवत जानी,

 

भई सकल सोभा कै खानी।’ अर्थात अवधपुरी पूरी तरह शोभायमान थी।

मुख्यमंत्री जी आज विधान सभा में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी द्वारा राज्य विधान मण्डल के समवेत सदन में दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष के 100 से अधिक सदस्यों ने इस पूरी चर्चा में भाग लिया। उन्होंने राज्यपाल जी द्वारा प्रस्तुत अभिभाषण के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया तथा चर्चा में भाग लेने वाले सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्यपाल जी ने अपने भाषण में कहा था कि हम राम राज्य की अवधारणा को आज साकार होते हुए देख रहे हैं। यह देश राम राज्य की अवधारणा को ही स्वीकार करेगा। राम राज्य, आर्थिक संपन्नता, विकास उन्मुख समाज तथा राजनीतिक अखण्डता का निर्माण ही हम सभी का उद्देश्य होना चाहिए। हमें अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति भी होनी चाहिए। हमें याद रखना होगा कि अतीत की नींव पर हम एक सुदृढ़ भवन का निर्माण कर ही आगे बढ़ सकते हैं।

हमारा राम राज्य एक सर्वकालिक, सार्वभौमिक, सार्वदेशिक तथा एक शाश्वत व्यवस्था है। बिना भेदभाव के सभी को योजनाओं का लाभ देना तथा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास’ यही राम राज्य की अवधारणा है। 22 जनवरी का कार्यक्रम इसी बात की प्रेरणा हम सभी को दे रहा था। हम सभी इसके लिए निरंतर प्रयास करना होगा। बहुत अच्छे ढंग से हम प्रदेश को आगे बढ़ा सकते हैं। राज्यपाल जी का अभिभाषण एक प्रेरणा तथा मार्गदर्शन है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने भारत की ज्ञान परम्परा तथा धरोहर को विस्तार देकर संहिताबद्ध करते हुए भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित करने का कार्य किया। महर्षि वेदव्यास के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए उनकी जयंती को हम गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। उन्हें सनातन हिन्दू धर्म के गुरु के रूप में मान्यता देते हैं। हमारे यहां कथा परम्पराओं में व्यास पीठ, ऋषि परम्परा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए होती है। महर्षि वेदव्यास ने महाभारत काल की आठ पीढ़ियों को अपनी आंखों से देखा और घटनाक्रम का संरक्षण किया। उन्होंने उस समय उभरती हुई व्यवस्था और राजवंश को देखा तथा वह महाभारत युद्ध के साक्षी बनें।

महर्षि वेदव्यास ने कहा था कि ‘ऊध्र्वबाहुर्विरौम्येष न च कश्चिच्छृणोति मे। धर्मादर्थश्च कामश्च स किमर्थं न सेव्यते।।’ अर्थात मैं दोनों भुजाएं ऊपर उठा कर पुकार-पुकार कर कह रहा हूं, किन्तु मेरी बात कोई नहीं सुनता। धर्म से मोक्ष तो मिलता ही है, अर्थ और काम भी धर्म से ही सिद्ध होते हैं, फिर भी लोग उसका सेवन नहीं करते। यह केवल महर्षि वेदव्यास की ही पीड़ा नहीं थी, वर्ष 2014 से पूर्व पूरे देश और वर्ष 2017 से पूर्व पूरे उत्तर प्रदेश की भी यही पीड़ा थी। वर्ष 2017 के पूर्व उत्तर प्रदेशवासियों के सामने पहचान का संकट था। प्रदेश का युवा पहचान छुपाने के लिए मजबूर था। प्रदेश में रोजगार के अवसर नहीं थे। बाहर जाने पर नौकरी नहीं मिलती थी।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में 22 जनवरी 2024 को प्रभु श्री रामलला अपने स्वयं के भव्य मन्दिर में विराजमान हुए। पूरा देश इस दृश्य से अभिभूत था। सत्य व न्याय का पक्षधर दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति गौरवान्वित था। हर सनातन धर्मावलम्बी की आंखों में हर्ष तथा गौरव के आंसू थे। वह इस आन्दोलन में अपनी पीढ़ियों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहभागिता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्होंने इस वातावरण का प्रत्यक्ष अनुभव किया। प्रदेश की आबादी 25 करोड़ है तथा देश की जनसंख्या 140 करोड़ है। आयोजन में कमोवेश देश के प्रत्येक प्रदेश का प्रतिनिधित्व था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, जनप्रतिनिधिगण, पूज्य संतों, आचार्यों के साथ-साथ समाज के प्रत्येक तबके की उपस्थिति थी। ऊर्जा से भरपूर अद्भुत वातावरण था। जिस उत्तर प्रदेश के नागरिकों को देखकर टिप्पणी की जाती थी तथा जिस प्रदेश में कोई आना नहीं चाहता था, आज देश दुनिया का हर व्यक्ति उत्तर प्रदेश आने के लिए तैयार है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सदन के पहले दिन सर्वदलीय बैठक में प्रत्येक सदस्य के चेहरे पर आत्मसंतोष का भाव था कि जो अयोध्या में हुआ है, अच्छा हुआ है। प्रत्येक व्यक्ति के मन में अयोध्या जाने का भाव था। यह अद्भुत, अलौकिक तथा अविस्मरणीय क्षण था। हर व्यक्ति गौरव की अनुभूति इसलिए कर रहा था कि लगभग 500 वर्षों तक चले एक लम्बे संघर्ष के पश्चात सर्वानुमति से उसके समाधान का रास्ता निकला तथा पूरे देश की जन भावनाओं के अनुरूप श्रीरामलला के भव्य मन्दिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। श्रीरामलला प्रत्यक्ष रूप से विराजमान हुए। यह दुनिया के अन्दर पहली घटना थी, जहां प्रभु को अपने स्वयं के अस्तित्व के लिए स्वयं प्रमाण जुटाने पड़े। श्रीराम की मर्यादा हमें

 

धैर्य की प्रेरणा देती है। यह धैर्य सनातन धर्मावलम्बियों ने 500 वर्षों तक किया। इस धैर्य का फल दीपोत्सव, प्रसन्नता, आतिशबाजी के रूप में 22 जनवरी 2024 को देश और दुनिया के सनातन धर्मावलम्बियों को प्राप्त हुआ।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रभु श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा तथा भारत के गौरव की पुनस्र्थापना की प्रसन्नता के साथ-साथ इस बात की भी प्रसन्नता थी कि हमने वचन निभाया और मन्दिर वहीं बनाया। जो कहा सो किया। जो संकल्प लिया उसकी सिद्धि हुई। हम केवल बोलते नहीं करते भी हैं। आज नव्य, भव्य और दिव्य अयोध्या को देखकर प्रत्येक व्यक्ति अभिभूत है। यह कार्य बहुत पहले हो जाना चाहिए था। मन्दिर विवाद न्यायालय में लम्बित था, लेकिन वहां की सड़कों को चैड़ा तथा घाटों का पुनरुद्धार किया जा सकता था। अयोध्यावासियों को बिजली की आपूर्ति की जा सकती थी। अयोध्या में स्वच्छता की व्यवस्था की जा सकती थी। स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं दी जा सकती थीं। एयरपोर्ट का निर्माण किया जा सकता था।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विकास के इन कार्यों को एक मंशा के साथ रोका गया था। इसी मंशा से अयोध्या, काशी तथा मथुरा-वृन्दावन का विकास अवरुद्ध किया गया था। यह मुद्दा नीयत का था। हमारी आस्था भी नीति और नीयत भी साफ तथा स्पष्ट थी। हम बिना रुके, बिना डिगे तथा बिना झुके अयोध्या सहित प्रदेश के हर जनपद में गए। मैं स्वयं अयोध्या और काशी के साथ ही, नोएडा और बिजनौर भी गया। अयोध्या को इसलिए अभिशिप्त कर दिया गया था कि वहां जाने से वोट बैंक कट जाएगा। नोएडा और बिजनौर लोग इसलिए नहीं जाते थे कि वहां जाने पर कुर्सी चली जाएगी।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हम इन चारों जगह गए। अयोध्या इसलिए गए क्योंकि यह हमारी आस्था का स्थल है। इसी प्रकार, नोएडा और बिजनौर के बारे में उन्हें अवगत कराया गया कि वहां जाने से मुख्यमंत्री की कुर्सी चली जाती है। वह नोएडा और बिजनौर दोनों जगह गए। क्यांेकि नोएडा और बिजनौर, दोनों ही उत्तर प्रदेश का हिस्सा हैं। जब व्यक्ति स्वयं शाश्वत नहीं है, तो फिर कुर्सी किसकी शाश्वत रहेगी।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अयोध्या का भव्य दीपोत्सव आज राष्ट्रीय आयोजन तथा राष्ट्रीय उत्सव बन गया है। इसे शुरू करने का सौभाग्य हमारी सरकार को प्राप्त हुआ। आज यह नित नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। अयोध्या को उसकी पहचान दिलायी गई। विवाद एक स्थल विशेष का था, जिसकी न्यायालय में सुनवाई हो रही थी, लेकिन अयोध्या की जनता तथा वहां आने वाले श्रद्धालुओं को वंचित कर दिया गया था।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पिछली सरकारों के समय अयोध्या नगरी को कफ्र्यू और प्रतिबन्धों के दायरे में लाया गया था। सदियों तक अयोध्या एक सुनियोजित तिरस्कार झेलती रही। अयोध्या के साथ अन्याय हुआ। लोक आस्था और जनभावना के साथ ऐसा खिलवाड़ सम्भवतः दूसरी जगह नहीं देखने को मिलेगा। जब अन्याय की बात होती है तो 5,000 वर्ष पूर्व पाण्डवों के साथ भी अन्याय हुआ था। उस समय कृष्ण ने कौरवों से कहा था ‘बस दे दो केवल 05 ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम। हम वहीं खुशी से खाएंगे, परिजन पर असि न उठाएंगे। लेकिन दुर्योधन वह भी दे न सका, आशीष समाज की ले न सका।’ दुर्योधन ने भगवान श्रीकृष्ण को भी बन्धक बनाने का प्रयास किया। ‘उल्टे हरि को बांधने चला, जो था असाध्य, साधने चला।’ यही अयोध्या, काशी और मथुरा के साथ हुआ।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सैकड़ों वर्षों से हमारी आस्था केवल 03 स्थलों की बात कर रही है। क्योंकि यह सामान्य स्थल नहीं हैं, बल्कि विशिष्ट स्थल हैं। यह ईश्वर के अवतरण की धरती है। लेकिन एक जिद तथा वोट बैंक की राजनीति से विवाद की स्थिति बनी है। विदेशी आक्रान्ताओं ने देश की धन-दौलत लूटने के साथ ही, इस देश की आस्था को भी रौंदने का कार्य किया था। आजादी के बाद अपने वोट बैंक के लिए उन आक्रान्ताओं को महिमा मण्डित करने के कुत्सित प्रयास हुए।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जन्म से हम सनातनी भारतीय हैं। यह बोलने में संकोच नहीं होना चाहिए। भारत के महापुरुषों, वीर सेनानियों तथा आराध्य देवों को सम्मानित करने के बजाए हम उन आक्रान्ताओं का महिमा मण्डन करें, जिन्होंने भारत की लोक आस्था पर प्रहार किया और जन विश्वास को रौंदा, यह देश अब बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करेगा। उस समय दुर्योधन ने कहा था ‘सूच्याग्रं नैव दास्यामि बिना युद्धेन केशव।’ अर्थात हे कृष्ण, बिना युद्ध के सूई की नोक के बराबर भी जमीन नहीं दूंगा। परिणाम हुआ कि सभी कौरव समाप्त हो गए।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज अयोध्या में सदियों की प्रतीक्षा दूर हुई है। अयोध्या में आज इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है, जहां से 14-15 फ्लाइट्स देश के अलग-अलग स्थानों के लिए जा रही हैं। आज उत्तर प्रदेश 04 इण्टरनेशनल एयरपोट्र्स के साथ 09 एयरपोट्र्स को क्रियाशील कर चुका है। 10 अन्य एयरपोट्र्स को क्रियाशील करने जा रहे हैं। अयोध्या में माता शबरी केे नाम पर रसोई घर तथा

 

निषादराज के नाम पर रैनबसेरा बन गया है। अयोध्या में भरत कुण्ड सहित प्राचीन कुण्डों का पुनरुद्धार हो रहा है। आज अयोध्या का वैदिक रामायण सिटी के रूप में विकास हो रहा है। साथ ही, भौतिक विकास के रूप में एक भव्य और दिव्य अयोध्या दिख रही है। वर्तमान में अयोध्या एवं अयोध्या से जुड़े अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर कार्यों के लिए 31,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट या चल रहे हैं या तो पूरे हो चुके हैं। इनमें धर्म पथ, राम पथ, भक्ति पथ तथा जन्मभूमि पथ का निर्माण हो चुका है। अयोध्या की सिंगल लेन की सड़कें 4-लेन हो गई हैं।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अयोध्या में गुप्तार घाट, राम घाट तथा नया घाट एक नए स्वरूप में आ गए हैं। रामजी की पैड़ी पर दीपोत्सव का भव्य आयोजन हो रहा है। अयोध्या में 6-6 मल्टीलेवल पार्किंग बनी हैं। वहां रैनबसेरे बन रहे हैं। नई अयोध्या बसाने के लिए टाउनशिप की नई स्कीम आ रही है। अयोध्या में सभी राज्यों के स्टेट गेस्ट हाउस बनाने तथा भारत के सनातन धर्म से जुड़े हर पंथ और सम्प्रदाय को धर्मशाला निर्माण के लिए भूमि आवंटन की कार्यवाही चल रही है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अयोध्या के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी गई। वर्ष 2019 में मा0 उच्चतम न्यायालय से सर्वसम्मत फैसला आया। आज भव्य मन्दिर का निर्माण हमें देखने को मिला है। वर्तमान पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि 500 वर्षों के लम्बे अन्तराल के बाद अवधपुरी में प्रभु के भव्य, दिव्य और नव्य मन्दिर निर्माण के हम साक्षी बने हैं।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विगत 16 दिनों में 36 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अयोध्या धाम में दर्शन किए हैं। कल अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, वहां की कैबिनेट तथा पूरी विधान सभा अयोध्या में दर्शन करने आयी थी। कल ही नेपाल के सांसदगण भी अयोध्या दर्शन के लिए गए थे। आज फिजी और कल सूरीनाम के राष्ट्र प्रमुख अयोध्या जा रहे हैं। जो भी अयोध्यापुरी में जा रहा है, उनके मुख से तुलसीदास जी की यह पंक्तियां निकल रही हैं कि ‘अवधपुरी अति रुचिर बनाई।’

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पहले अयोध्या की गलियों में गोलियां चलती थीं, परिक्रमाएं प्रतिबन्धित होती थीं और कफ्र्यू लगता था। आज भव्य, दिव्य और नव्य अयोध्या हर सनातन धर्मावलम्बी सहित प्रत्येक भारतवासी को आकर्षित करेगी। साथ ही, यह देश-दुनिया में सबसे बड़े टूरिस्ट डेस्टिनेशन तथा दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर होगी। अयोध्या को इस रूप में विकसित करने की तैयारी सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई है। राज्यपाल जी ने भी इस ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया है। अयोध्या में पंचकोसी, चैदहकोसी तथा चैरासीकोसी परिक्रमा मार्ग को भव्य स्वरूप देने जा रहे हैं। अब अयोध्या की गलियों में ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ की गूंज सुनाई देगी।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना ने अयोध्या से सम्बन्धित संकल्प सदन में रखा, जिस पर कुछ सदस्यों ने अपना विरोध व्यक्त करने का प्रयास किया। यह कृत्य जनभावनाओं के विपरीत है। जनभावनाएं कहती हैं कि ‘जाके प्रिय न राम बैदेही, तजिये ताहि कोटि बैरी सम, जदपि परम सनेही।’ आज हम से पूरा भारत एक नई अपेक्षा रखता है। इसी अपेक्षा के साथ आज अयोध्या प्रभु के दर्शन करने के लिए सभी को आमंत्रित करती है। प्रभु श्रीराम सबके हैं। वह भक्तवत्सल हैं। हम सभी को वहां जाना चाहिए। पूरा देश और पूरी दुनिया अयोध्या आना चाहती है। राज्यपाल जी ने अपने अभिभाषण की शुरुआत यहीं से की थी, लेकिन नेता प्रतिपक्ष ने इस पर एक भी शब्द नहीं बोला। पूरे सदन को राज्यपाल जी के शब्दों के प्रति समवेत स्वर से समर्थन करना चाहिए था, लेकिन वह नहीं हो पाया।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्यपाल जी ने अभिभाषण में कहा कि इस वर्ष के माघ मेले का वर्ष 2025 के प्रयागराज महाकुम्भ के रिहर्सल के रूप में लेकर, उसके अनुसार रणनीति बनायी जा रही है। वर्ष 2019 के प्रयागराज कुम्भ के आयोजन का सौभाग्य हमारी सरकार को मिला था। 15 जनवरी से 04 मार्च, 2019 तक यह आयोजन हुआ था। पहली बार 24 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से प्रयागराज कुम्भ में एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ। प्रयागराज कुम्भ में सुरक्षा, स्वच्छता तथा सुव्यवस्था का माॅडल देखने को मिला था। दुनिया के 100 से अधिक देशों के एम्बेसडर, हाई कमिश्नर तथा कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष वहां आए थे। सभी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में की गई प्रयागराज कुम्भ की व्यवस्था की सराहना की थी।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन 05 करोड़ श्रद्धालुओं ने प्रयागराज में संगम तट पर स्नान किया था। आजादी के बाद पहली बार प्रयागराज में अक्षयवट को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला गया था। सरस्वती कूप के भी दर्शन श्रद्धालुओं ने किए। हमारी सरकार ने अभी से यह प्रयास प्रारम्भ कर दिए हैं कि प्रयागराज महाकुम्भ-2025 में सुरक्षा, स्वच्छता तथा

 

सुव्यवस्था के उसी माॅडल को स्थापित करेंगे, जो वर्ष 2019 के कुम्भ में किया गया था।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रयागराज कुम्भ-2019 के आयोजन के समय श्री काशी विश्वनाथ धाम, माँ विन्ध्यवासिनी धाम, अयोध्या धाम सहित चित्रकूट तथा नैमिषारण्य आज के रूप में नहीं थे। डबल इंजन की सरकार का सौभाग्य है कि आज एक नई काशी का दर्शन श्री काशी विश्वनाथ धाम से कर सकते हैं। बड़ी संख्या में लोग काशी आए हैं। इससे उत्तर प्रदेश को बहुत लाभ हो रहा है। हमारा अनुमान है कि वर्ष 2025 के प्रयागराज महाकुम्भ में वर्ष 2019 के कुम्भ की तुलना में डेढ़ से दोगुना अधिक श्रद्धालु वहां आएंगे। उन्हें उसी प्रकार की अवस्थापना सुविधाएं प्रदान करने तथा उनके विस्तार करने की तैयारियां चल रही हैं।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रयागराज में 09 आर0ओ0बी0 बनाने तथा नया सिविल टर्मिनल का कार्य किया गया है। 250 से अधिक सड़कों के चैड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण का कार्य भी सम्पन्न हुआ है। 01 लाख 14 हजार 500 से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया। इस वर्ष माघ मेले में पहला स्नान मकर संक्रान्ति को हुआ। अब तक लगभग 40 लाख श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज भारत ने जिस सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए दौर में प्रवेश किया है, इसमें अयोध्या का दीपोत्सव, ब्रज का रंगोत्सव तथा काशी की देव दीपावली पूरे देश में अपनी पहचान बना रही है। अयोध्या तीर्थ विकास परिषद, देवीपाटन तीर्थ विकास परिषद, ब्रज तीर्थ विकास परिषद, विन्ध्यधाम तीर्थ विकास परिषद, शुकतीर्थ विकास परिषद, चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद, नैमिषधाम तीर्थ विकास परिषद गठित करके, इन सभी धार्मिक व आध्यात्मिक केन्द्रों का भौतिक, आध्यात्मिक तथा धार्मिक नियोजित विकास किया जा रहा है। श्री काशी विश्वनाथ धाम काॅरिडोर का कार्य पूरा हो चुका है। 100 वर्षों के बाद यहां माँ अन्नपूर्णा की प्रतिमा पुनःस्थापित हो चुकी है। सोरो के विकास का कार्य सरकार ने प्रारम्भ किया है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में रामायण परिपथ, बौद्ध परिपथ, आध्यात्मिक परिपथ, शक्ति परिपथ, ब्रज परिपथ, बुन्देलखण्ड परिपथ तथा महाभारत परिपथ के कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश की सम्भावनाओं पर सरकार व्यवस्थित तरीके से कार्य कर रही है। इसका परिणाम हुआ है कि विगत वर्ष काशी विश्वनाथ धाम में लगभग साढ़े 06 करोड़, मथुरा-वृन्दावन में 06 करोड़ से अधिक तथा नैमिषारण्य में 10 लाख श्रद्धालु आए। बुन्देलखण्ड में 02 करोड़ 55 लाख, बौद्ध सर्किट में लगभग 30 लाख तथा शुकतीर्थ में लगभग 10 लाख पर्यटक एवं श्रद्धालु अलग-अलग समय में आए। पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं ने नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में नया अनुभव किया है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार बुन्देलखण्ड के किलों सहित उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़े स्थलों को हेरिटेज टूरिज्म के नए डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा रही है। वर्ष 2017 से पूर्व, उत्तर प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में देश में कहीं नहीं था। आज प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर है। यहां पर्यटन के विकास के साथ ही, लाखों लोगों को नौकरी व रोजगार के अवसर भी मिले हैं। यह सर्विस सेक्टर है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन के माध्यम से बढ़ोत्तरी हो रही है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया है। राज्यपाल जी ने अभिभाषण में इसका उल्लेख किया है। डबल इंजन सरकार की स्वाभाविक रूप से डबल स्पीड भी है। अमृतकाल में इसके डबल से अधिक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने आजादी के अमृत महोत्सव के मुख्य समारोह के अवसर पर देशवासियों से पंचप्रण का आह्वान किया था। हमारी सरकार इन्हें जमीनी धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है। डिजिटल इण्डिया के माध्यम से सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में प्रयास प्रारम्भ हुए हैं। टेक्नोलाॅजी का उपयोग कर शासन की कार्यपद्धति में पारदर्शिता लाने के लिए शासन स्तर पर संवाद स्थापित किया गया है। प्रदेश के हर जनपद में होने वाली प्रत्येक कार्यवाही तथा गतिविधि की सतत निगरानी करने के लिए सी0एम0 कमाण्ड सेण्टर, सी0एम0 हेल्पडेस्क की स्थापना की गई है। स

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