सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग के लिए जापानी टीम आएगी यूपी, नई प्रौद्योगिकी में साझेदारी को मिलेगा विस्तार
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*सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग के लिए जापानी टीम आएगी यूपी, नई प्रौद्योगिकी में साझेदारी को मिलेगा विस्तार*
*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जापान के राजदूत ओनो केइची की शिष्टाचार भेंट*
*जापान के साथ अपने आर्थिक और औद्योगिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए तैयार है उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री*
*टूरिज्म एक्सपो जापान-2026 में यूपी की सहभागिता होगी, जापानी पक्ष के अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने दी सहमति*
*जापानी निवेश से सेमीकंडक्टर और कौशल विकास तक, उत्तर प्रदेश-जापान सहयोग को मिलने जा रही नई गति*
*एमएसएमई से बड़े उद्योगों तक जापानी निवेश के लिए यूपी में मिलेंगे व्यापक अवसर*
*जापानी उद्योगों की जरूरत के अनुरूप युवाओं की स्किलिंग होगी, स्किल डेवलपमेंट सेंटर के विकास में मिलेगा सहयोग*
*लखनऊ, 21 अगस्त:* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शुक्रवार को भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तर प्रदेश और जापान के बीच निवेश, उन्नत प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, मानव संसाधन विकास, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने पर सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश जापान के साथ अपने आर्थिक और औद्योगिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए तैयार है। प्रदेश में जापानी निवेशकों के लिए एमएसएमई से लेकर बड़े उद्योगों तक व्यापक अवसर उपलब्ध हैं और दोनों पक्षों के पारस्परिक सहयोग से इन संभावनाओं को ठोस परिणामों में बदला जा सकता है।
भेंट के दौरान सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग को लेकर विशेष चर्चा हुई। जापानी पक्ष ने बताया कि जुलाई 2026 में जापान के प्रधानमंत्री ताकाइची की भारत यात्रा के दौरान सेमीकंडक्टर को जापान-भारत आर्थिक सुरक्षा सहयोग के पांच प्राथमिक क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इसी क्रम में जापानी उद्योग जगत की एक टीम सितंबर के मध्य में सेमीकॉन इंडिया के साथ एचसीएल टेक्नोलॉजीज का दौरा करेगी। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की सेमीकंडक्टर समिति की बैठक में सहभागिता की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। जापानी पक्ष ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए अपनी टीम के उत्तर प्रदेश दौरे की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकी के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जापानी कंपनियों के लिए उत्तर प्रदेश में निवेश की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। एमएसएमई से लेकर बड़े उद्योगों तक जापान के निवेशकों का स्वागत है। प्रदेश का विशाल बाजार, बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत औद्योगिक आधार और तेजी से विकसित हो रहा आधारभूत ढांचा जापानी कंपनियों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा रहा है। नोएडा स्थित जापान सिटी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसके आसपास प्रमुख औद्योगिक क्लस्टरों और उत्कृष्ट कनेक्टिविटी के कारण निवेश की और भी बड़ी संभावनाएं हैं। यामाहा, डेंसो, एनटीटी डेटा, टोयो इंक और पैनासोनिक जैसी जापानी कंपनियां उत्तर प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। जापान सिटी के निकट कुबोटा द्वारा ट्रैक्टर और निर्माण मशीनरी के विनिर्माण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। जेईटीआरओ और जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सहयोग से प्रदेश में जापानी निवेश को और विस्तार देने पर भी चर्चा हुई।
मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश और जापान के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर भी विचार हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास बड़ी संख्या में युवा मानव संसाधन है और जापानी उद्योगों की जरूरत के अनुरूप इनके कौशल विकास को आगे बढ़ाया जा सकता है। जापान के तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा विशिष्ट कौशल श्रमिक कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को जापान में काम करने और अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच ऐसे स्किल डेवलपमेंट सेंटर के विकास में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई, जहां युवाओं को जापानी उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप तकनीकी एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा सके। इससे कौशल विकास को सीधे रोजगार के अवसरों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
विनिर्माण, कृषि और नर्सिंग केयर जैसे क्षेत्रों में जापान में उपलब्ध रोजगार अवसरों के लिए उत्तर प्रदेश के युवाओं को तैयार करने पर भी चर्चा हुई। इसी क्रम में मार्च में आगरा के आर.बी. पीजी कॉलेज में कृषि क्षेत्र में जापान में रोजगार के अवसरों के लिए आयोजित रोजगार मेले का उल्लेख किया गया। एमिटी विश्वविद्यालय और जापान के इबाराकी प्रीफेक्चर के बीच विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप और प्रशिक्षण के अवसर विकसित करने के लिए हुए समझौते को भी दोनों देशों के बीच बढ़ते मानव संसाधन सहयोग की महत्वपूर्ण पहल बताया गया। जापानी भाषा, तकनीकी दक्षता और उद्योग आधारित प्रशिक्षण को साथ लेकर युवाओं के लिए जापान में रोजगार के अवसरों को और व्यापक बनाया जा सकता है।
पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। जापानी पक्ष ने सितंबर में आयोजित होने वाले टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में उत्तर प्रदेश की सहभागिता का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की ओर से इसमें सहभागिता की सहमति दी। दोनों पक्षों ने इस आयोजन को उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों को जापानी पर्यटकों और पर्यटन उद्योग के सामने प्रस्तुत करने तथा दोनों देशों के बीच पर्यटन आदान-प्रदान को बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर माना। वर्ष 2025 में 2.19 लाख जापानी नागरिकों ने भारत की यात्रा की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.5 प्रतिशत अधिक है। उत्तर प्रदेश के बौद्ध, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन स्थलों में जापानी पर्यटकों के लिए व्यापक संभावनाएं हैं।
बैठक में भारत और जापान के बीच साझा बौद्ध एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन सहयोग की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में रेखांकित किया गया। सारनाथ और जापान के नारा के बीच बौद्ध एवं सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों के ऐतिहासिक जुड़ाव को दर्शाते हैं। वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होंगे। इस अवसर को दोनों देशों के बीच पर्यटन, संस्कृति और जनस्तरीय संबंधों को और मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा गया।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश-जापान निवेश बैठक के सिलसिले में इस समय जापान के उद्योग जगत के 200 से अधिक प्रतिनिधियों का दल उत्तर प्रदेश की यात्रा पर है। जापानी निवेशकों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में हुए संवाद के परिणामस्वरूप अनेक एमओयू हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों से लगभग 10 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
यूपी और यामानाशी के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मिलेगी नई मजबूती*
*विधानसभा स्तर पर पहली बार संस्थागत सहयोग की दिशा में बड़ा कदम, सूचना आदान-प्रदान, प्रतिनिधिमंडल दौरों और शिक्षा-कृषि से पर्यटन तक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा*
*जापानी प्रतिनिधिमंडल ने किया विधानसभा परिसर का भ्रमण, सदन की कार्यप्रणाली, भूमिका तथा ऐतिहासिक एवं लोकतांत्रिक विरासत की दी गई जानकारी*
*लखनऊ, 21 अगस्त।* उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच मैत्रीपूर्ण एवं संस्थागत संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यामानाशी प्रीफेक्चरल असेंबली ऑफ जापान और उत्तर प्रदेश विधानसभा के बीच मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते का उद्देश्य दोनों विधानसभाओं के बीच नियमित संवाद, आपसी समझ और अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने जापान के यामानाशी प्रीफेक्चरल असेंबली के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। जापानी प्रतिनिधिमंडल को विधानसभा परिसर का भ्रमण कराया गया और सदन की कार्यप्रणाली, उसकी भूमिका तथा ऐतिहासिक एवं लोकतांत्रिक विरासत की जानकारी दी गई। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिनिधिमंडल को स्मृति चिह्न भेंट कर मित्रता और सद्भाव का संदेश दिया।
एमओयू पर उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना और यामानाशी प्रीफेक्चरल असेंबली के चेयरमैन हिदेनोरी मियामोतो (Hidenori Miyamoto) ने हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों को विकसित करने तथा दोनों क्षेत्रों के बीच करीबी और मैत्रीपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।
*प्रतिनिधिमंडलों के दौरों और सूचना आदान-प्रदान को बढ़ावा*
एमओयू के तहत दोनों विधानसभाओं के बीच म्युचुअल विजिट्स, इनफॉर्मेशन एक्सचेंज और एक्सचेंज एक्टिविटीज को प्रोत्साहित किया जाएगा। दोनों पक्ष अपनी कार्यप्रणाली, प्रक्रियाओं और अनुभवों को साझा करेंगे। प्रतिनिधिमंडलों के पारस्परिक दौरों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों के बीच सीधा संवाद बढ़ाने और दोनों क्षेत्रों की बेहतर समझ विकसित करने पर जोर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने प्रतिनिधिमंडल को उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा और विधानसभा की भूमिका से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से विकसित हो रहा प्रदेश है और यहां दोनों राज्यों के बीच सहयोग एवं साझेदारी की व्यापक संभावनाएं हैं।
*काशी से बौद्ध सर्किट तक साझा होंगे सांस्कृतिक संबंध*
बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी उल्लेख किया गया। दुनिया के प्राचीन जीवंत शहरों में शामिल काशी तथा उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट की विशेषताओं के बारे में जापानी प्रतिनिधिमंडल को जानकारी दी गई। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक एवं जनसंपर्क को और मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
*अर्थव्यवस्था, पर्यटन, कृषि और शिक्षा में सहयोग*
एमओयू में अर्थव्यवस्था, पर्यटन, कृषि, शिक्षा और मानव संसाधन विकास सहित आपसी हित के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग एवं आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। दोनों पक्ष आवश्यकता के अनुसार अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं तलाशेंगे। एक्सचेंज प्रोग्राम और कोऑपरेटिव प्रोजेक्ट्स के माध्यम से तकनीक, ज्ञान और कौशल के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
*भारत-जापान संबंधों को राज्य स्तर पर मिलेगा संस्थागत आधार*
उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच यह समझौता व्यापक भारत-जापान संबंधों को राज्य और प्रांतीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दोनों देशों के बीच आर्थिक, औद्योगिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विधानसभा स्तर पर संवाद और प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान से निवेश, कौशल विकास, शिक्षा, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाओं को मजबूती मिलेगी।
एमओयू दोनों विधानसभाओं के बीच मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान और सहयोग की प्रतिबद्धता को व्यक्त करता है। इसका उद्देश्य भविष्य में होने वाले विभिन्न आदान-प्रदान और संयुक्त गतिविधियों के लिए आधार तैयार करना है। समझौते के प्रभावी होने के साथ दोनों पक्षों के बीच पीपुल टू पीपुल कॉन्टेक्ट, इंस्टीट्यूशनल डायलॉग और सेक्टोरल कोऑपरेशन को नई गति मिलने की पूरी उम्मीद है।
जापानी प्रतिनिधिमंडल ने देखी वीमेन पावर लाइन 1090 की कार्यप्रणाली*
*काउंसलिंग से लेकर शिकायतों के समाधान तक समझी पूरी प्रक्रिया*
*महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के मॉडल पर यूपी-जापान में हुआ अनुभवों का आदान-प्रदान*
*लखनऊ, 21 अगस्त।* यूपी–जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 के तहत जापानी प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की महिला सुरक्षा के लिए संचालित वीमेन पावर लाइन 1090 का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने यहां महिलाओं की सुरक्षा, शिकायतों पर त्वरित सहायता, काउंसलिंग और जागरूकता से जुड़ी व्यवस्थाओं को समझा। इस दौरान उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और जापानी प्रतिनिधिमंडल के बीच महिला सुरक्षा, स्कूली स्तर पर जागरूकता, बच्चों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देने और महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से अनुभव साझा किए गए।
दौरे के दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि वीमेन पावर लाइन 1090 महिलाओं को कठिन, भय या उत्पीड़न की स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण व्यवस्था के रूप में कार्य करती है। प्रतिनिधिमंडल ने यह समझने में रुचि दिखाई कि किसी महिला की ओर से सहायता के लिए संपर्क किए जाने के बाद उसकी समस्या को किस तरह समझा जाता है और कैसे उस तक उचित सहायता पहुंचाई जाती है।
*शिकायत से काउंसलिंग तक की प्रक्रिया समझी*
जापानी प्रतिनिधिमंडल ने 1090 की कार्यप्रणाली को करीब से समझते हुए कॉल रिसीव करने से लेकर महिला की समस्या को समझने, आवश्यक काउंसलिंग उपलब्ध कराने और जरूरत के अनुसार संबंधित सहायता तंत्र से जोड़ने की प्रक्रिया की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं की बात ध्यानपूर्वक सुनना और उन्हें सहज एवं सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। विशेष रूप से काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग को लेकर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि कई बार महिलाएं डर, तनाव या झिझक के कारण अपनी बात खुलकर नहीं रख पातीं। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित कर्मी संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुनते हैं, उनकी चिंताओं को समझते हैं और उन्हें उपयुक्त सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में काम करते हैं।
*स्कूलों में बचपन से सुरक्षा जागरूकता पर जोर*
बैठक के दौरान महिला सुरक्षा को केवल शिकायत निवारण तक सीमित न रखते हुए प्रीवेंटिव अवेयरनेस पर भी चर्चा हुई। जापानी प्रतिनिधिमंडल और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने स्कूलों में विद्यार्थियों को कम उम्र से ही सुरक्षा, अधिकारों और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के तरीकों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर विचार साझा किए। बच्चों में पांच वर्ष की आयु के बाद सुरक्षा संबंधी जागरूकता विकसित करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। इसमें बच्चों को अपनी सुरक्षा, संवाद करने और किसी कठिन परिस्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति से मदद मांगने के बारे में सहज तरीके से जानकारी देने के दृष्टिकोण पर विचार किया गया।
*जापान और यूपी के अनुभवों पर हुआ संवाद*
जापानी प्रतिनिधिमंडल ने जापान में महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों के बारे में अपने अनुभव साझा किए। वहीं उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने प्रदेश में संचालित महिला सुरक्षा और सहायता तंत्र की जानकारी दी। दोनों पक्षों ने माना कि जापान और उत्तर प्रदेश की सामाजिक एवं संस्थागत परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए किसी भी मॉडल को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समझना और लागू करना आवश्यक है। इसके बावजूद महिला सुरक्षा, बच्चों में जागरूकता, प्रभावी संवाद, काउंसलिंग और महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने जैसे क्षेत्रों में अनुभवों का आदान-प्रदान दोनों पक्षों के लिए उपयोगी हो सकता है।
*सुरक्षा से आत्मविश्वास और सशक्तीकरण तक*
चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महिला सुरक्षा का उद्देश्य केवल किसी घटना के बाद सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना विकसित करना भी है। जब महिलाएं यह महसूस करती हैं कि कठिन परिस्थिति में उन्हें समय पर सहायता मिल सकती है, तो वे अपनी समस्याओं को सामने रखने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में अधिक सहज महसूस करती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने माना कि महिला सुरक्षा, जागरूकता, काउंसलिंग और सहायता सेवाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इन व्यवस्थाओं को मजबूत करने से महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलता है।
*अनुभवों के आदान-प्रदान से सहयोग की नई संभावनाएं*
यूपी–जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 के तहत हुआ यह दौरा भारत-जापान संबंधों के सामाजिक आयाम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण जैसे विषयों पर दोनों पक्षों के बीच अनुभव साझा होने से भविष्य में जागरूकता, काउंसलिंग, बच्चों की सुरक्षा शिक्षा और महिला सहायता सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं बन सकती हैं। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने वीमेन पावर लाइन 1090 की व्यवस्था को समझते हुए उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए विकसित किए गए संस्थागत तंत्र की जानकारी हासिल की। वहीं इस संवाद से उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को जापान में अपनाई जा रही महिला सुरक्षा और जागरूकता की विभिन्न कार्यप्रणालियों को समझने का अवसर मिला।
यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 : पर्यटन विशेष*
*उत्तर प्रदेश और यामानाशी ने खोला पर्यटन सहयोग का नया अध्याय, बौद्ध सर्किट बनेगा जापान से जुड़ाव का आधार*
*द्विपक्षीय पर्यटन, आतिथ्य और वेलनेस सहयोग पर मंथन*
*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में पर्यटन सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर*
*सारनाथ और फुजिसान की विरासत से मजबूत होगा पर्यटन सहयोग*
*इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में यामानाशी और उत्तर प्रदेश पर्यटन के प्रतिनिधियों की बैठक, मंत्री जयवीर सिंह ने की अगुवाई*
*यामानाशी बन सकता है जापानी पर्यटकों के लिए उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार : मंत्री जयवीर सिंह*
*लखनऊ, 21 अगस्त :* उत्तर प्रदेश सरकार अब अपने तेजी से विकसित हो रहे बौद्ध पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस कड़ी में जापान को प्रदेश का एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण साझेदार माना जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को यामानाशी प्रीफेक्चर के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुए संवाद सत्र में कहा कि ‘यामानाशी, जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश के बौद्ध और आध्यात्मिक स्थलों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।’
लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) में आयोजित कार्यक्रम में यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी और डिप्टी-गवर्नर जुनिची इशिदेरा के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। संवाद सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने दोनों क्षेत्रों के बीच मौजूद सांस्कृतिक संबंधों को पर्यटन गतिविधियों और संस्थागत सहयोग में बदलने की संभावनाओं पर चर्चा की।
*बौद्ध सर्किट को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर*
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बौद्ध पर्यटन के विकास की सोच में व्यापक बदलाव आया है। अब सरकार का फोकस केवल स्मारकों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटक सुविधाओं, ठहरने की व्यवस्था और पर्यटन स्थलों पर बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने पर भी है। उन्होंने कहा कि बौद्ध सर्किट के प्रमुख स्थलों पर मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया गया है। अब सरकार की प्राथमिकता इस विकास को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की है। भगवान बुद्ध की विरासत सदियों से भारत और जापान के लोगों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से जोड़ती रही है, इसलिए जापान उत्तर प्रदेश के लिए एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण साझेदार है।’
*यामानाशी बनेगा जापान में यूपी पर्यटन का नया प्रवेश द्वार : जयवीर सिंह*
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘यामानाशी जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा यामानाशी को उत्तर प्रदेश के पर्यटन के लिए जापान में एक मजबूत प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की है। वहीं, उत्तर प्रदेश को बौद्ध धर्म, अध्यात्म, वेलनेस और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले जापानी पर्यटकों के लिए स्वाभाविक पर्यटन गंतव्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशाम्बी और संकिसा जैसे स्थल भगवान बुद्ध के जीवन और उनकी यात्राओं के अलग-अलग अध्यायों से पर्यटकों को जोड़ते हैं।
*’आर्थिक प्रगति और बौद्ध विरासत से निवेशकों को लुभा रहा यूपी’*
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत ही नहीं, अपितु तेज आर्थिक विकास और मजबूत होते बुनियादी ढांचे के कारण भी निवेशकों की पसंद बन रहा है। उन्होंने कहा कि हाईवे, नागरिक उड्डयन, उद्योग और निवेश के क्षेत्र में प्रदेश ने तेजी से प्रगति की है। साथ ही उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध से जुड़े छह प्रमुख स्थलों की भूमि है, जहां जापानी पर्यटकों को शांति और आध्यात्मिक अनुभव के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि जापानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम से पहले आगे बढ़ाया जाना उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बढ़ते संवाद और मजबूत होते संबंधों का सकारात्मक संकेत है। अमृत अभिजात ने जापानी निवेशकों को प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं का लाभ उठाने और पर्यटन उत्पादों व अनुभवों के विकास में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।
*उत्तर प्रदेश की पर्यटन विविधता को कोइजुमी ने सराहा*
यामानाशी के पर्यटन, संस्कृति एवं खेल विभाग के महानिदेशक योशीयुकी कोइजुमी ने उत्तर प्रदेश की पर्यटन विविधता और प्रतिनिधिमंडल के आत्मीय स्वागत की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘प्रदेश में विरासत, आध्यात्मिकता, प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति का अनूठा संगम है। कोइजुमी ने यह भी कहा कि यामानाशी और उत्तर प्रदेश के बीच मौजूद गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध दोनों प्रान्त के लोगों के बीच पर्यटन, आपसी आदान-प्रदान और बेहतर समझ को बढ़ावा देने का मजबूत आधार बन सकते हैं।’
*दोनों ओर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने पर संवाद*
संवाद सत्र में उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने के लिए व्यावहारिक अवसरों और आवश्यकताओं पर भी चर्चा हुई। इस बीच, टॉर्नोस के संस्थापक एवं सीईओ तथा फिक्की पर्यटन समिति के अध्यक्ष प्रतीक हीरा ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश और जापान की साझा सांस्कृतिक विरासत पर्यटन सहयोग के लिए स्वाभाविक आधार तैयार करती है। उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध की भूमि है और जापान में शिव, गणेश, सरस्वती, कुबेर, लक्ष्मण और यहां तक कि भगवान कृष्ण जैसे भारतीय देवी-देवताओं के प्रति भी श्रद्धा का भाव देखने को मिलता है। यामानाशी को जापान के ‘फ्रूट बाउल’ के रूप में जाना जाता है और उत्तर प्रदेश की मजबूत कृषि पहचान दोनों क्षेत्रों के बीच एक और समानता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर वर्ष करीब दो लाख भारतीय जापान की यात्रा करते हैं और दोनों दिशाओं में पर्यटन बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।’
सत्र के दौरान तबीज़ुकी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के राजन कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आतिथ्य परंपरा और खान-पान जापानी पर्यटकों के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने का अहम माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का समृद्ध इतिहास और विविधता, उत्तर प्रदेश की आतिथ्य परंपरा तथा लखनऊ के मशहूर खानपान को जापान की प्रसिद्ध खाद्य संस्कृति के साथ जोड़कर पर्यटन के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
*जापानी पर्यटकों के अनुरूप आतिथ्य सुविधाओं पर जोर*
पर्यटन पर संवाद सत्र में जापानी पर्यटकों की जरूरतों और उनकी पसंद के अनुरूप आतिथ्य सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया। लोटस निक्को की नेहा राय ने कहा कि ‘जापानी पर्यटकों के लिए विश्वसनीयता, समयबद्ध सेवाएं और खान-पान का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि उनका समूह श्रावस्ती और कुशीनगर में होटल संचालित कर रहा है और जापानी पर्यटक बाजार के साथ भी उसका अनुभव रहा है। बौद्ध सर्किट से गुजरने वाले जापानी पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए इन होटलों में जापानी भोजन की भी व्यवस्था की गई है।’
शीराज टूर्स की निदेशक हिना शीराज जैदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच पर्यटन को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है। खासकर युवा भारतीय पर्यटक जापानी संस्कृति, खान-पान, चेरी ब्लॉसम, माउंट फूजी और वहां के आधुनिक पर्यटन आकर्षणों को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल समूहों की यात्राएं भी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक समझ बढ़ाने और संपर्क मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
*बौद्ध पर्यटन को मिल रही रफ्तार- मृदुल चौधरी*
विशेष सचिव एवं पर्यटन निदेशक मृदुल चौधरी ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश सरकार बौद्ध पर्यटन के नए चरण के लिए जरूरी पर्यटन सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में जुटी है। उन्होंने बताया कि राज्य योजना के तहत बौद्ध स्थलों पर 51 पर्यटन परियोजनाओं पर 218 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। वहीं, विश्व बैंक की सहायता से सारनाथ और कुशीनगर में एकीकृत पर्यटन विकास की योजना पर काम चल रहा है, जबकि श्रावस्ती में एसएएससीआई के तहत बड़े स्तर पर विकास कार्य प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास पर्यटन सुविधाओं, स्थलों की बेहतर व्याख्या, आतिथ्य सेवाओं और विभिन्न बौद्ध स्थलों के बीच सुगम आवागमन को एक साथ विकसित करने का है, ताकि पर्यटक पूरे बौद्ध सर्किट को अलग-अलग पड़ावों के बजाय एक संपूर्ण यात्रा के रूप में अनुभव कर सकें।’
*बौद्ध पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी*
उत्तर प्रदेश के बौद्ध पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत किया है। प्रदेश के छह प्रमुख बौद्ध पर्यटन स्थलों पर वर्ष 2022 में 22.4 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 81.8 लाख से अधिक हो गए। इसी अवधि में विदेशी पर्यटकों की संख्या 48 हजार से बढ़कर करीब 4.43 लाख पहुंच गई। वर्ष 2026 में जनवरी से जून के बीच ही बौद्ध सर्किट के प्रमुख स्थलों पर 30.07 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 2.02 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे।
*यूपी और यामानाशी मिलकर बढ़ाएंगे पर्यटन, एमओयू पर हस्ताक्षर*
उत्तर प्रदेश सरकार और यामानाशी प्रीफेक्चर के बीच पर्यटन सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह मौजूद रहे। एमओयू के तहत पर्यटन क्षेत्र में ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान, संयुक्त प्रचार अभियान, पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के बीच संपर्क, धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन मार्गों का विकास और दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने की दिशा में सहयोग किया जाएगा। समझौते में विशेष रूप से बौद्ध, आध्यात्मिक और वेलनेस पर्यटन को शामिल किया गया है। इसके अलावा संयुक्त प्रचार अभियान, प्रदर्शनियां, सेमिनार और डिजिटल सामग्री के माध्यम से दोनों क्षेत्रों के पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।
एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश के सारनाथ और जापान के फुजिसान से जुड़े यूनेस्को विश्व धरोहर मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इसके साथ ही भविष्य में दोनों क्षेत्रों के बीच बौद्ध विरासत की बेहतर व्याख्या, बहुभाषी पर्यटक सुविधाओं, ध्यान और वेलनेस पर्यटन, आतिथ्य, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पेशेवर प्रशिक्षण और ज्ञान हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
*अब वाराणसी और सारनाथ का दौरा*
जापानी प्रतिनिधिमंडल की उत्तर प्रदेश यात्रा को प्रदेश की पर्यटन विविधता से परिचित कराने के उद्देश्य से विशेष रूप से तैयार किया गया है। आगरा में ताजमहल और ब्रज की सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू होने तथा लखनऊ में पर्यटन और उद्योग से जुड़े संवाद के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल वाराणसी और सारनाथ का दौरा करेगा। यहां काशी की आध्यात्मिक परंपराएं, गंगा आरती और सारनाथ की बौद्ध विरासत जापानी मेहमानों को भारत और जापान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक व आध्यात्मिक रिश्तों से रूबरू कराएंग यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026*
*प्रदर्शनी में दिखी स्वदेशी तकनीक की ताकत, आसमान से खेत और सीमा तक के लिए अत्याधुनिक उत्पादों का प्रदर्शन*
*सीएम योगी ने यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 की प्रदर्शनी का किया अवलोकन, अत्याधुनिक उत्पादों की ली जानकारी*
*तेजस्वान से दिव्यास्त्र तक… लखनऊ में दिखी नई तकनीक की उड़ान*
*डिफेंस-एग्रीकल्चर से कंस्ट्रक्शन तक नवाचार का प्रदर्शन*
*मराल एयरोस्पेस का तेजस्वान ड्रोन बना प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण*
*12 घंटे तक लगातार उड़ान, 6 हजार मीटर ऊंचाई और 5 किलो पेलोड ले जाने में सक्षम होगा तेजस्वान*
*एस्कॉर्ट्स कुबोटा यूपी में कर रहा 2 हजार करोड़ से अधिक का निवेश, 154 एकड़ जमीन पर बनेगा सेंटर*
*27 लाख का कंबाइन हार्वेस्टर और 14 लाख का राइस ट्रांसप्लांटर प्रदर्शनी में रहे आकर्षण का केंद्र*
*400 से 500 किमी. रेंज वाले दिव्यास्त्र एमके वन ने खींचा ध्यान, यूपी डिफेंस कॉरिडोर में हो रहा विकास*
*कारगिल में जूतों की सप्लाई से आधुनिक बैलेस्टिक सुरक्षा उपकरणों तक पहुंची एमकेयू की यात्रा*
*90 देशों तक पहुंच रहे एमकेयू के सुरक्षा उत्पाद, बैलेस्टिक हेलमेट-जैकेट से नाइट विजन तकनीक तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉल पर पहुंचकर प्रदर्शित उत्पादों और उनकी तकनीक की जानकारी ली। प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक के साथ स्वदेशी उत्पादों की क्षमता भी देखने को मिली। एयरोस्पेस, डिफेंस, कृषि और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र से जुड़े अत्याधुनिक उत्पादों ने खासा आकर्षण बटोरा। आईआईटी कानपुर से इनक्यूबेटेड स्टार्टअप मराल एयरोस्पेस का तेजस्वान ड्रोन प्रमुख आकर्षण रहा। इसके अलावा एस्कॉर्ट्स कुबोटा के कृषि उपकरण, होवेरिट का दिव्यास्त्र एमके-1 तथा एमकेयू के बैलेस्टिक हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री ने इन उत्पादों की तकनीकी विशेषताओं और उपयोगिता के बारे में जानकारी ली।
*12 घंटे तक आसमान में रह सकेगा तेजस्वान*
प्रदर्शनी में सबसे ज्यादा चर्चा मराल एयरोस्पेस के स्वदेशी फिक्स्ड-विंग यूएवी तेजस्वान की रही। मराल एयरोस्पेस के फाउंडर विवेक कुमार पांडेय ने बताया कि कंपनी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) में इनक्यूबेट हुआ डीप-टेक एयरोस्पेस स्टार्टअप है। कंपनी रक्षा, सुरक्षा और वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए स्वदेशी डिजाइन वाले लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम मानवरहित हवाई प्रणालियां विकसित कर रही है। कंपनी के प्रमुख प्लेटफॉर्म तेजस्वान को लंबे समय तक आसमान में बने रहने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। यह करीब 12 घंटे तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है। साथ ही समुद्र तल से करीब 6000 मीटर की ऊंचाई तक संचालन के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसमें 5 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने और करीब 120 से 150 किलोमीटर की एकतरफा रेंज प्रस्तावित है। कंपनी के मुताबिक, रात में भी यह करीब चार घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम होगा। तेजस्वान में उच्च दक्षता वाले सोलर सेल, हल्की कंपोजिट संरचना, अधिक ऊर्जा घनत्व वाली बैटरियां, स्वायत्त उड़ान प्रणाली और सुरक्षा के लिए रिडंडेंट सिस्टम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसकी उपयोगिता खुफिया, निगरानी एवं टोही (आईएसआ), सीमा निगरानी, आपदा प्रबंधन, संचार रिले और बुनियादी ढांचे के निरीक्षण जैसे क्षेत्रों में बताई गई है।
*90 दिन तक आसमान में रहने वाले एचएपीएस पर भी काम*
मराल एयरोस्पेस केवल तेजस्वान तक सीमित नहीं है। कंपनी हाई-एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट यानी एचएपीएस प्लेटफॉर्म पर भी काम कर रही है। इसे करीब 90 दिनों तक लगातार संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। ऐसे प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर निगरानी, संचार और अन्य रणनीतिक जरूरतों में उपयोगी हो सकते हैं।
*प्रदर्शनी में 27 लाख का कंबाइन हार्वेस्टर से लेकर 6 लाख का कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर रहा आकर्षण का केंद्र*
प्रदर्शनी में एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड कंपनी के कृषि और कंस्ट्रक्शन उपकरण भी आकर्षण का केंद्र रहे। कंपनी के एग्री सॉल्यूशन प्रोडक्ट मैनेजर आतसुया ओता ने बताया कि कंपनी ने उत्तर प्रदेश में करीब 154 एकड़ जमीन 90 साल की लीज पर ली है। यहां आने वाले सात वर्षों में ट्रैक्टर, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और पार्ट्स सेंटर विकसित करने की योजना है। कंपनी की ओर से इस परियोजना में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की तैयारी है।
प्रदर्शनी में कंपनी की ओर से कंबाइन हार्वेस्टर, राइस ट्रांसप्लांटर, कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर और डीजल जेनसेट लगाए गए थे। कंबाइन हार्वेस्टर की बिक्री के मामले में वह देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि राइस ट्रांसप्लांटर की बिक्री में नंबर वन है। कंपनी के प्रदर्शित उत्पादों में कंबाइन हार्वेस्टर की कीमत करीब 27 लाख रुपये, राइस ट्रांसप्लांटर की करीब 14 लाख रुपये, कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर की करीब 6 लाख रुपये और डीजल जेनसेट की कीमत करीब 7 लाख रुपये है। कंपनी भारत में कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के लिए क्रेन, बैकहो लोडर और ट्रैक्टर जैसे उपकरणों का निर्माण कर रही है, जबकि कंबाइन हार्वेस्टर और राइस ट्रांसप्लांटर का आयात किया जाता है। कंपनी कृषि और निर्माण क्षेत्र के लिए मशीनरी और उपकरण तैयार करती है।
*400-500 किलोमीटर रेंज वाला दिव्यास्त्र एमके वन भी प्रदर्शनी में*
डिफेंस टेक्नोलॉजी की झलक होवेरिट प्राइवेट लिमिटेड के दिव्यास्त्र एमके वन में भी देखने को मिली। कंपनी के फ्लाइट टेस्टिंग इंजीनियर लारिब ने बताया कि दिव्यास्त्र एमके वन एक लोइटरिंग म्यूनिशन/आत्मघाती ड्रोन प्लेटफॉर्म है, जिसे लक्षित स्थान तक पहुंचकर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। लारिब ने बताया कि इसकी प्रस्तावित रेंज 400 से 500 किलोमीटर तक है और यह करीब 800 से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है। इसकी लगातार उड़ान क्षमता करीब 5 घंटे है। इसमें थर्मल इमेजिंग कैमरा लगाया गया है और यह आईसी इंजन से संचालित होता है। इसका मई 2026 में भारतीय सेना द्वारा सफल परीक्षण किया गया था। दिव्यास्त्र एमके वन करीब 20 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम है और लोड के साथ इसका कुल वजन करीब 40 किलोग्राम है। इसकी गति करीब 250 से 350 किलोमीटर प्रति घंटा है। कंपनी इसे मेड इन इंडिया प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित कर रही है। होवेरिट कंपनी यूपी डिफेंस कॉरिडोर के तहत काम कर रही है। दिव्यास्त्र का नया एमके-3 वेरिएंट जेट इंजन से संचालित होगा और इसका कानपुर में परीक्षण किया जा चुका है।
*कारगिल से आधुनिक बैलेस्टिक सुरक्षा तक पहुंचा एमकेयू*
प्रदर्शनी में सैनिकों की सुरक्षा से जुड़े उपकरणों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। दशकों पुरानी एमकेयू लिमिटेड ने बैलेस्टिक हेलमेट, बैलेस्टिक जैकेट, नाइट विजन बाइनोक्युलर और थर्मल वेपन साइट जैसे उत्पाद प्रदर्शित किए। कंपनी के सीनियर सेल्स मैनेजर सोहम सेठ ने बताया कि कंपनी ने कारगिल युद्ध के दौरान जूतों की आपूर्ति की थी। इसके बाद कंपनी ने बैलेस्टिक हेलमेट और बैलेस्टिक जैकेट के क्षेत्र में विस्तार किया। आज कंपनी भारत में सुरक्षा उपकरणों के निर्माण के क्षेत्र में काम कर रही है।
सीनियर सेल्स मैनेजर ने बताया कि उसके उत्पाद करीब 90 देशों तक पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनी में सैनिकों और सुरक्षा बलों के लिए आधुनिक बैलेस्टिक सुरक्षा उपकरणों के साथ-साथ कम रोशनी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निगरानी एवं लक्ष्य पहचान में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया है।


