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May 9, 2026

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डॉ.दिनेश शर्मा ने समाज,राष्ट्र और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को छुआ,मीरापुर विधानसभा में उनके भाषण से मंत्रमुग्ध दिखे मीरापुर क्षेत्रवासी

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ओजस्वी मन मीरापुर :-
हिंदी दिवस पर शनिवार को मीरापुर पहुंचे राज्यसभा सांसद एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने अपने अद्भुत वक्तव्य से लोगो को अंत तक बांधे रखा।अपने संबोधन में उन्होंने समाज,राष्ट्र और संस्कृति से जुड़े कई बिंदुओं को मानस पटल पर उकेरा।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी कुंवर देवराज पंवार व संचालन डॉ. राजीव कुमार ने किया।

ओजस्वी मन पत्रिका के संपादक पं.दीपक कृष्णात्रेय द्वारा आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे डॉ. दिनेश शर्मा ने ऐसे बिंदुओं पर प्रकाश डाला कि लोगो ने भावात्मक रूप से अपना जुड़ाव उनके साथ महसूस किया।इस अवसर पर डॉ. शर्मा बोले कि विपक्ष देश को अस्थिर करने की साजिश कर रहा है।आर्थिक अस्थिरता के इरादे से देश के उद्यमियों को बदनाम किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि तरक्की का दौर कायम रखने के लिए बांटने वालों से सावधान रहने की जरूरत है।वहीं उन्होंने कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी बहुत आवश्यक है।हमे अपने पूर्वजों की स्मृति में पेड़ लगाकर उनका संरक्षण करना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पं.कीर्तिभूषण शर्मा, राजीव भारद्वाज भराला,पं. सुशील शर्मा, दयाचंद भारती,नरेश शर्मा, वासुदेव शर्मा, भोलाराम शर्मा,मधु कौशिक,पुनीत राजपूत, शिखा शर्मा, अक्षय पुंडीर,प्रवेंद्र दहिया,अरविंद कुमार,आमिर खान,अमरदीप, प्रियांक शर्मा,भानु शर्मा,अर्चना चौधरी, बृजगोपाल शर्मा, जितेन्द्र कुमार, सुरेंद्र पाल शर्मा सहित विभिन्न शिक्षकों को सम्मानित किया।उन्होंने कहा कि गुरु धरती पर भगवान की तरह होते हैं, हमे उनका पूरा सम्मान करना चाहिये।विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष देश को अस्थिर करने की साजिश कर रहा है। अलग अलग समुदायों को लडाने का कुचक्र रचा जा रहा है। देश में आर्थिक अस्थिरता फैलाने की मंशा के तहत ही देश के उद्यमियों को बदनाम किया जा रहा है। वक्फ के नाम पर असंतोष को हवा दी जा रही है। रेल की पटरियों को नुकसान की भी साजिश की जा ही है। वन्दे भारत आज रेल का बदला हुआ चेहरा है जो हजम नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सत्ता के लिए लोगों को बांटने की खतरनाक चाल चल रहा है। इसके लिए आरक्षण और संविधान के नाम पर झूठ फैलाया जा रहा है। ऐसे प्रयास करने वाले ही असल में आरक्षण और संविधान के विरोधी हैं। कांग्रेस ने तो भारत के संविधान निर्माता को संसद में पहुचने से रोकने की तमाम कोशिश और षडयंत्र किए थे। ये सपा ही थी जिसके कार्यकाल में प्रमोशन में आरक्षण को समाप्त किया गया था। आज विपक्ष अपने राजनैतिक लाभ के लिए सनातन के लोगों को बांटना चाहता है। इसीलिए आरक्षण और संविधान के नाम पर हाय तौबा मचाई जा रही है। इनसे सावधान रहते हुए एकजुट रहने की जरूरत है। आने वाले उपचुनाव में भाजपा की ऐसी जीत होनी चाहिए कि पूरे देश में एक मजबूत संदेश जाए। मीरापुर विधानसभा मुजफ्फरनगर अंतर्गत हिन्दी दिवस पर आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में सांसद ने कहा कि शिक्षक समाज की दशा और दिशा को बदलने का कार्य करता है। वह समाज की नकारात्मकता को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुरु सही मायने में धरती पर भगवान की तरह होते हैं । उनका सम्मान करके ही जीवन में आगे बढा जा सकता है। लोगों को हिन्दी दिवस की बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत की अन्य भाषाओं की बडी बहन की तरह है। देश की नई शिक्षा नीति में सभी भाषाओं के सम्मान की व्यवस्था की गई है। हिन्दी को भारत की पहचान बताते हुए कहा कि भारत की संस्कृति का आधार ही समन्वय है जो सबके सुख की कामना करती है। पाश्चात्य संस्कृति बांटती है जबकि देश की संस्कृति जोडने का काम करती है। भारत पर तमाम बार आक्रान्ताओं ने हमला किया और सब कुछ नष्ट कर दिया पर भारत की संस्कृति को नष्ट नहीं कर पाए। जो भारत एकता और समन्वय का संदेश देता था उसे बांटा गया तथा यहां के गुरुकुलों और नालन्दा और तक्षशिला जैसे केन्द्रों को नष्ट किया गया। धर्मशास्त्र जलाए गए । आक्रान्ता अपने साथ इतिहासकार भी लाए थे जिन्होंने ही भारत के इतिहास को लिखा था। सनातन संकृति को नष्ट करने का काम किया गया। अंग्रेजों ने तो भारत पर लम्बे समय तक राज करने के लिए शिक्षा पद्धति को भी बदल दिया था। पुराने समय में भारत में जाति नहीं बल्कि वर्ण व्यवस्था थी पर अंग्रेजों ने भारत के समाज को तमाम जातियों में बांट दिया। शिक्षक की समाज का दिग्दर्शन करता है।

डा शर्मा ने चन्द्रगुप्त और उनकी शिक्षक चाणक्य का एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब चंद्रगुप्त ने सलूक स जो सिकंदर का सेनापति था उसे हरा दिया तो सेल्लुकुस ने अपनी पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त के साथ करने का प्रस्ताव दिया चंद्रगुप्त ने अपने गुरु चाणक्य से अनुमति मांगी। चाणक्य ने चन्द्रगुप्त के एक प्रश्र के जवाब में कहा दो विभिन्न संस्कृतियों के विवाह का कोई विरोध नहीं है लेकिन शर्त यह है विदेशी माता से पैदा हुई संतान राजसत्ता में उसका उत्तराधिकारी नहीं हो सकता है क्योंकि उसकी मानसिकता मैं विदेशी सोच अवश्य होगा । चाणक्य ने कहा कि विदेश की संस्कृति समागम का सम्मान है पर उसे राजसत्ता की कमान नहीं दी जा सकती है। देश का संचालन वहीं कर सकता है जिसने देश के लोगों का दर्द देखा हो। जो लोग आज देशवासियों को बांटकर कुर्सी पाना चाह रहे हैं उन्होंने अपने समय में देश में विकास नहीं केवल जातिवाद क्षेत्रवाद और सम्प्रदायवाद ही फैलाया था। पिछले दस साल में देश इन सबको पीछे छोडकर विकास की राह पर तेजी से बढ चला है। आज देश में सडको का जाल है बदलती रेल है गांव गांव में इंटरनेट आदि है जो नए भारत की कहानी है। बांटने वालों से बचने की जरूरत है तभी तरक्की का दौर कायम रहेगा और भारत विश्व गुुरु बन सकेगा। कार्यक्रम में भारी संख्या में शिक्षक,विद्यार्थी और राजनीतिक दलों से जुड़े हुए प्रतिनिधि उपस्थित थे।

वहीं पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री पं. सुनील भराला, प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल,एमएलसी वंदना वर्मा,पूर्व एमएलसी सुरेश कश्यप,राम कुमार सहरावत,राजकुमार छाबड़ा, सत्य प्रकाश विकल्प, राजीव अग्रवाल, मनीष चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष वीरपाल निरवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामा नागर, भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्ष सुधीर सैनी, पूर्व अध्यक्ष विजय शुक्ला, क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष किसान मोर्चा अजय भारद्वाज भराला,सत्यप्रकाश रेशू,अंकुर शर्मा पहलवान, अंकुर त्यागी,डीके जैन,डॉ. प्रवीण शर्मा, सचिन ठाकुर, इन्दर सिंह कश्यप, संजीव वत्स ,हरिओम शर्मा, अमित काकरान, नागेश चौहान, नितिन कुमार, विपिन कुमार, आर्यन चौधरी, हाजी शमीम प्रधान,अश्विनी शर्मा सहित हजारों लोगों की उपस्थिति रही।कार्यक्रम के पश्चात डॉ. दिनेश शर्मा संयोजक पं.दीपक कृष्णात्रेय के आवास पर भी पहुंचे जहां पर सैकड़ों लोगों ने उनका स्वागत किया।

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