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August 5, 2026

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वन नेशन वन एमएसपी नीति लागू करें सरकार- धर्मेंद्र मलिक

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‘वन नेशन वन एमएसपी नीति लागू करें सरकार- धर्मेंद्र मलिक

फसलों के दाम सी 2 के आधार पर तय करे कृषि मुल्य आयोग-भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक

 

आज कृषि लागत एवं मुल्य आयोग द्वारा रबी सीजन 2025-26 के मुल्य निर्धारण हेतु हितबद्ध किसानों के साथ एक बैठक का आयोजन अम्बेडकर भवन में किया गया। बैठक में सभी राज्यों के किसान प्रतिनिधि शामिल हुए

सभी किसान नेताओं ने मुल्य निर्धारण हेतु लागत सी 2 को फॉर्मूले में शामिल करने पर एकमत होकर लागू किए जाने की मांग की। बैठक में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक, पीजेंट वेल्फेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक बालियान,किसान पंचायत से रामपाल जाट सहित कई नेताओं ने अपनी बात आयोग के समक्ष रखी

 

श्री विजय पॉल शर्मा

अध्यक्ष, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग,

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार, नई दिल्ली।

विषय-रबी फसल (विपणन वर्ष- 2026-2027) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के सम्बन्ध में सुझाव।

महोदय,

 

कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP)विपणन वर्ष 2026-2027 में रबी फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले सभी हितधारकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श कर रहा है। गेहूं, चना, मसूर, जौ और सरसों रबी की प्रमुख फसलें हैं। इसके लिए हम आपका धन्यवाद ज्ञापित करते हैं

भारत सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत लगभग 82 करोड़ नागरिको को सस्ता सब्सिडी वाला अनाज उपलब्ध कराती है लेकिन इस सस्ते अनाज के वितरण की कीमत गेंहू, चावल का उत्पादन करने वाले किसान चुका रहे हैं।सस्ता अनाज वितरण के लिए किसानों को उनकी फसलों का सही मुल्य दिए जाने से रोका जाता है। दूसरी तरफ यही सब्सिडी पर दिया जाने वाला सस्ता अनाज दक्षिण भारत में गेंहू,उत्तर भारत में चावल बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से आधी कीमतों पर बाजार में बेचा जाता है,जिससे किसानों को उनकी फसलों का मुल्य नहीं मिलता है। देश में गेहूं उत्पादन मांग के बराबर है थोड़ी सी कम पैदावार भी देश की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) सी2 लागत जोड़ने का सुझाव देती रही है। सी2 लागत में खेती के वास्तविक खर्च और कृषक परिवार की मजदूरी (ए2+एफएल) के साथ जमीन के किराए और खेती में लगी स्थायी पूंजी पर ब्याज को भी शामिल किया जाता है।

आयोग विभिन्न वस्तुओं की मूल्य नीति की सिफारिश करते समय मूल्य और आपूर्ति, उत्पादन की लागत, बाजार में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल और अंतर फसल मूल्य समता जैसे विभिन्न घटकों का विश्लेषण करता है।

 

फसलों के लिए उपयुक्त बाजार, स्टोर हाउस, और सप्लाई चैन को दुरुस्त किए बिना कृषि संकट से नहीं निपटा जा सकता है।भारत सरकार को अपने कृषि क्षेत्र को बचाने के लिए कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए नए बाजार भी ढूंढने होंगे।

भारतीय किसान यूनियन कृषि लागत एवं मुल्य आयोग द्वारा आज दिनांक 16 जून 2025 को रबी फसल (विपणन वर्ष- 2026-2027) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में निम्न सुझाव प्रस्तुत करती है

 

 

 

1. एमएसपी लागत सी2 का डेढ़ गुना तय किया जाए-

देश की दोनों सरकारों 2004 से आज तक राष्ट्रीय किसान आयोग की सबसे चर्चित सिफारिश किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य सी2 के आधार पर दिया जाय,लेकिन सरकारों ने इसे अव्यवहारिक मानते हुए लागू नहीं किया । दुनियाभर में वस्तुओं की कीमत सी2 जैसी व्यापक लागत के आधार पर तय होती है। ए2 +एफएल और सी2 के बीच भी व्यापक अंतर है। इसके कारण किसानों को लगभग 30,000 करोड़ का सालाना घाटा है, इसलिए मुल्य निर्धारण में सी2 लागत को जोड़ा जाए। फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गणना में अधिकतम लागत को शामिल करने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा।

2. जिन फसलों की सरकार ‘एमएसपी’ पर खरीद करती है,उनके लिए राज्य सरकारों के प्रस्ताव भेजने व फिर केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने में विलम्ब न हो इसके लिए एक क़ानूनी सुरक्षा के साथ नीति बनानी होगी। जैसे अभी हाल में ही मध्यप्रदेश में ‘एमएसपी’ पर खरीद पर मूंग की खरीद न होने पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि, ”मध्य प्रदेश सरकार जैसे ही प्रस्ताव भेजेगी समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी पर सहमति देंगे। मूंग सार्वजनिक वितरण प्रणाली का हिस्सा नहीं है, इसलिए ‘एमएसपी’ पर खरीद के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार के प्रस्ताव की जरूरत होती है।

 

3. ‘एमएसपी’ तय करते समय कटाई के बाद के कार्यों जैसे सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और परिवहन लागत को भी इसमें शामिल किया जाये।

 

4. किसान द्वारा उठाए जाने वाले जोखिमों को एक निश्चित प्रतिशत तक एमएसपी में जोड़ा जाये और इस जोखिम में निर्यात पर विभिन्न तरह के प्रतिबन्ध से कृषि उपज के मूल्य गिरने के जोखिम को भी शामिल किया जाए। तथा आयत से कृषि उपज के मूल्य गिरने के जोखिम को भी एमएसपी में शामिल किया जाये।

 

5. कृषि उपज का आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत ‘न्यूनतम आरक्षित मूल्य’ निर्धारित हो और सरकारी एजेंसियां इसे सरकारी मंडियों के बाहर भी सुनिश्चित करें।इस व्यवस्था से बाजार पर ‘एमएसपी’ लागू हो जाएगी। यह ‘न्यूनतम आरक्षित मूल्य’ व्यवस्था गन्ने से निकलने वाली चीनी में वर्ष 2018 से लागू है।

 

6. न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित अन्य रबी, खरीफ व जायद फसलों व मुख्य फलों व सब्जियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की सूची में सम्मिलित किया जाये। तथा कृत्रिम सिंचाई के कारण साल भर उगाई जाने वाली फसलें जायद फसलें हैं। इन्हें भी न्यूनतम समर्थन मूल्य के दायरे में लाया जाना चाहिए।

 

7. देशभर के किसानों की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए ‘वन नेशन वन एमएसपी’ लागू की जाए, जिससे सभी जगह एमएसपी पर खरीद हो सके।पंजाब-हरियाणा में गेहूं 2425 रू,मध्य प्रदेश 2600 रुपए,राजस्थान में 2575 रुपए पर गेहूं खरीद की गई है

ऐसा भेदभाव क्यों देश में एक फसल एक दाम एक राष्ट्र की नीति लागू की जाए

 

8. न्यूनतम समर्थन मूल्य और किसान को मिली कीमत में अंतर की भरपाई के लिए ‘नकद भुगतान’ की पूरक व्यवस्था को बीमा के माध्यम से या स्वम् सरकार के माध्यम से को देश में लागू किया जाय। जैसे अमेरिका में सरकार द्वारा किसानों को कुछ सहायता प्रदान की जाती है, जैसे कि फसल बीमा, जो उपज और मूल्य हानि के खिलाफ बीमा प्रदान करता है। इसके अलावा, सरकार किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान के माध्यम से भी मदद करती है, जैसे कि मूल्य हानि कवरेज। मूल्य हानि कवरेज, जो तब किया जाता है जब बाजार मूल्य एक निर्धारित सीमा से नीचे गिर जाता है।

 

9. सरकार को एमएसपी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बाजारों में कारोबार करने वाले निजी व्यापारियों को भी साथ जोड़ने की व्यवस्था करनी चाहिए।

10. न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी पर खरीद से किसानों का शोषण एवं आत्महत्याओं को रोका जा सकता है ।इससे फसल विविधिकरण एवं टिकाऊ खाद्य सुरक्षा को भी बढावा मिलेगा

आशा है कि आज कृषि लागत और मूल्य आयोग द्वारा आयोजित बैठक में दिए गए सुझावों पर गौर करके इनको मुल्य निर्धारण के फार्मूले में शामिल करेगा जिससे किसानों को उनका हक मिलना सम्भव होगा

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