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May 9, 2026

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कैराना से मुस्लिम सांसद इकरा हसन की असलियत क्या है,सोच क्या है उनकी

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कैराना से मुस्लिम सांसद इकरा हसन की असलियत क्या है,सोच क्या है उनकी

 

सांसद इकरा हसन पर की गई अभद्र टिप्पणी निंदनीय ओर महिलाओं के सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। सरकार ऐसे व्यक्ति पर कठोर कार्यवाही करे जिससे नज़ीर बन सके..

लेखक मौ0आसिफ कुरैशी की नजर में

देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और महिला सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई है। कैराना लोकसभा क्षेत्र की सांसद इकरा हसन के खिलाफ की गई आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणी न केवल एक जनप्रतिनिधि का अपमान है, बल्कि यह देश की समस्त महिलाओं के सम्मान पर सीधा प्रहार है।

जिस तरह से राजनीतिक विरोध की आड़ में महिला सांसद को निशाना बनाया गया है, वह भारत जैसे संवैधानिक लोकतंत्र में किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं हो सकता। लोकतंत्र में मतभेद की गुंजाइश हमेशा रहती है, परंतु किसी के विरुद्ध इस प्रकार की भाषा का प्रयोग, विशेषकर एक महिला नेता के लिए, हमारे समाज की गिरती राजनीतिक मर्यादा का प्रतीक है।

 

इकरा हसन एक शिक्षित, सक्रिय और जनसरोकारों से जुड़ी हुई सांसद हैं, जो लगातार अपने क्षेत्र और देशहित में कार्य कर रही हैं। उनके विरुद्ध की गई टिप्पणी यह दर्शाती है कि कुछ तत्व सांप्रदायिकता को बढ़ावा देकर अपनी रोटियां सेकने और सस्ती लोकप्रियता को हासिल की होड़ में लगे है,जो समाज के लिए हानिकारक है। ऐसे सोच रखने वाले व्यक्तियों को समाज के लोगों को आगे आकर लोकतांत्रिक रूप से विरोध करना चाहिए।

हम इस अभद्र और दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी की घोर निंदा करते हैं और संबंधित व्यक्तियों से तत्काल माफी की मांग करते हैं। साथ ही प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि वह ऐसे मामलों को गंभीरता से लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि, विशेषकर महिला नेताओं को इस प्रकार की अपमानजनक स्थिति का सामना न करना पड़े।

आज ज़रूरत इस बात की है कि हम राजनीति में भाषा की मर्यादा बनाए रखें और महिलाओं के सम्मान की रक्षा करें। इकरा हसन पर की गई टिप्पणी न केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली है, बल्कि यह पूरे देश की महिलाओं के आत्मसम्मान के विरुद्ध है।

आज कल पूरे देश में सांसद इकरा चौधरी के साथ एडीएम द्वारा किये गए दुर्व्यवहार को लेकर माहौल गरमाया हुआ है،जबकि सांसद महोदया के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर प्रदेश के नेताओं ने मोर्चा संभालते हुए इकरा चौधरी का समर्थन किया है।

आईये इकरा चौधरी को जानते है ओर समझते है।

उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट, जो कभी सामाजिक तनाव और राजनीतिक उथल-पुथल के लिए चर्चा में रही, आज एक नई पहचान बना रही है। इस बदलाव की प्रेरणा हैं समाजवादी पार्टी की युवा सांसद इकरा चौधरी, जिन्होंने अपनी शिक्षा, संवेदनशील नेतृत्व, और जनसेवा के प्रति समर्पण से न केवल कैराना को नई दिशा दी है, बल्कि भारतीय राजनीति में एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में अपनी जगह बनाई है। उनकी सादगी, सर्वधर्म समभाव, और जमीन से जुड़ा दृष्टिकोण उन्हें न केवल कैराना की जनता की पसंदीदा नेता बनाता है, बल्कि देशभर में एक नई उम्मीद का प्रतीक भी बनाता है।

शिक्षा: नेतृत्व की ठोस नींव

26 अगस्त 1994 को जन्मी इकरा चौधरी एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके दादा स्वर्गीय अख्तर हसन ओर पिता, स्वर्गीय चौधरी मुन्नवर हसन, और माता, बेगम तबस्सुम हसन, सांसद रह चुके हैं। लेकिन इकरा चौधरी ने अपनी पहचान केवल इस विरासत के सहारे नहीं बनाई। बल्कि उनकी शैक्षिक उपलब्धियां और विचारशीलता ने उन्हें एक विशिष्ट नेता के रूप में स्थापित किया है।

इकरा चौधरी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की, जो देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में से एक है। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन (SOAS) से अंतरराष्ट्रीय कानून और राजनीति में मास्टर डिग्री प्राप्त की। उनकी यह शैक्षिक पृष्ठभूमि उनके भाषणों, संसदीय चर्चाओं, और नीतिगत दृष्टिकोण में स्पष्ट रूप से झलकती है।

वे शिक्षा को केवल व्यक्तिगत विकास का साधन नहीं मानतीं, बल्कि इसे सामाजिक उत्थान और समावेशी विकास का आधार मानती हैं। यही कारण है कि वे अपने क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार को प्राथमिकता देती हैं, विशेषकर महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए। उनकी यह सोच उनके द्वारा उठाए गए शिक्षा से संबंधित मुद्दों में स्पष्ट दिखती है, जैसे कैराना में महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना और अल्पसंख्यक व दलित छात्रों के लिए तकनीकी शिक्षा संस्थानों की मांग।

जनता की आवाज, जीत की कहानी

2024 के लोकसभा चुनाव में इकरा चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी प्रदीप चौधरी को लगभग 69,000 वोटों के अंतर से पराजित किया। यह जीत केवल एक राजनीतिक सफलता नहीं थी, बल्कि यह उनकी जनता से गहरे जुड़ाव, उनकी सादगी, और हर वर्ग के साथ संवाद करने की कला की जीत थी।

चुनाव प्रचार के दौरान इकरा चौधरी ने बड़े-बड़े वादों के बजाय जनता की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान का भरोसा दिलाने पर ध्यान दिया। उन्होंने कैराना, गंगोह, नकुड, थानाभवन और शामली विधानसभाओं के क्षेत्रों में पैदल यात्राएं कीं, गाँव-गाँव जाकर लोगों से मुलाकात की, और उनकी समस्याओं को न केवल सुना, बल्कि उन्हें हल करने के लिए ठोस योजनाएं भी बनाईं। उनकी यह शैली, जिसमें वे हर समुदाय चाहे वह मुस्लिम, हिंदू, सिख, दलित, या पिछड़ा हो के साथ सहजता से संवाद करती थीं, जिसने उन्हें जनता का चहेता बना दिया।

उनके प्रचार का एक अनोखा पहलू यह भी था उनकी सुलभता। वे न तो बड़े काफिलों के साथ चलीं और न ही अनावश्यक प्रचार पर ध्यान दिया। उनकी सभाओं में लोग उनकी सादगी और स्पष्टता से प्रभावित होते थे। मीडिया को एक स्थानीय निवासी ने कहा, था “इकरा जी हमें अपनी बेटी जैसी लगती हैं। वे हमारी बात सुनती हैं और उसे संसद तक ले जाती हैं।” जो क्षेत्र में उनकी बड़ी पहचान बनी हुई है। वो अपनी लोकसभा की पांचों विधानसभाओं में जनता दरबार लगाती रहती है,ओर लोकसभा क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका प्राथमिकता से निस्तारण कराती है।

संसद में प्रभावशाली उपस्थिति

सांसद बनने के बाद इकरा चौधरी ने संसद में अपनी सक्रियता और स्पष्टवादिता से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। उनकी संसदीय कार्यशैली में एक अनुशासित और तथ्यपरक दृष्टिकोण दिखता है, जो उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि और जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है। वे न केवल अपने क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाती हैं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी राय रखने में पीछे नहीं रहतीं।

उन्होंने देश के प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों के साथ कैराना और आसपास के क्षेत्रों की कुछ प्रमुख मांगों को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया है,जिनमें उनके द्वारा उठाए गए कुछ राष्ट्रीय मुद्दों को देश भर में सराहा गया है। संसद में देखने में आया है कि इकरा चौधरी के संसदीय भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं ने भी उनकी सराहना की है। इकरा चौधरी ने वक्फ बिल के सम्बन्ध में अपने रुख को बहुत मजबूती से रखा है। ओर इसी तरह इकरा चौधरी ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे हमलों को भी संसद में उठाया था। संसद में उन्होंने विशेष रूप से रेल सेवाओं का विस्तार: शामली-प्रयागराज और शामली-कटरा के लिए सीधी रेल सेवाओं की मांग, जो क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। रेल लाइन का दोहरीकरण: दिल्ली-शामली-सहारनपुर रेल लाइन के दोहरीकरण की आवश्यकता, जो क्षेत्र में यातायात और व्यापार को सुगम बनाएगा।

शिक्षा के लिए पहल: कैराना में महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना और अल्पसंख्यक व दलित छात्रों के लिए तकनीकी शिक्षा संस्थानों की मांग, जो शिक्षा के क्षेत्र में समावेशिता को बढ़ावा देगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: कैराना, कांधला, तितावी, और नानौता क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की पैरवी, ताकि आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

बुनियादी ढांचे का विकास: बिजली, सड़क, और संचार सेवाओं में सुधार के लिए योजनाओं को गति देना, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए आवश्यक है।

इकरा संसद की एस्टिमेट्स कमेटी की एक सक्रिय सदस्य भी हैं, जो सरकारी खर्चों की निगरानी करती है। इस कमेटी में उनकी भूमिका उनके नीतिगत ज्ञान और जवाबदेही के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उनकी संसदीय चर्चाओं में तथ्यों और तर्कों का समावेश उन्हें एक प्रभावशाली वक्ता बनाता है।

सर्वधर्म समभाव: सामाजिक सद्भाव की प्रतीक

इकरा चौधरी की लोकप्रियता का सबसे बड़ा आधार उनका सर्वधर्म समभाव का दृष्टिकोण है। वे न केवल अपने समुदाय, बल्कि सभी धर्मों और जातियों के लोगों के लिए समान रूप से उपलब्ध रहती हैं। हाल ही में कांवड़ यात्रा के दौरान उनकी सक्रिय भागीदारी ने देशभर में सुर्खियां बटोरीं है। उन्होंने भगवा कांवड़ियों की सेवा में जुटी इकरा चौधरी ने न केवल प्रसाद बांटा और जल वितरण किया, बल्कि कांवड़ यात्रियों के लिए आयोजित सेवा शिविरों में भी हिस्सा लिया।

उनकी ये तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई है, और लोगों ने उन्हें सामाजिक सद्भाव की मिसाल के रूप में देखा। इस अवसर पर उनका यह कथन खूब चर्चा में रहा है कि “इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता। सेवा भावना सबसे बड़ा धर्म है।”

यह कथन आज के विभाजनकारी माहौल में न केवल प्रासंगिक है, बल्कि यह समाज को एकजुट करने का एक मजबूत संदेश भी देता है। उनकी यह पहल कैराना जैसे क्षेत्र में, जहां सामुदायिक तनाव का इतिहास रहा है, एकता और भाईचारे का संदेश देती है।

महिला गरिमा और लोकतंत्र की रक्षा

इकरा चौधरी ने हाल ही में सहारनपुर की एक प्रशासनिक बैठक में ADM द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के खिलाफ न केवल अपनी आवाज उठाई, बल्कि इस मामले को उच्च स्तर तक ले गईं। उन्होंने इसे न सिर्फ एक महिला सांसद के अपमान के रूप में देखा, बल्कि इसे लोकतंत्र और जनता की आवाज को दबाने की कोशिश के रूप में भी परिभाषित किया। उनका यह कथन इस घटना के बाद खूब चर्चा में रहा है कि “यह न सिर्फ एक महिला सांसद का अपमान है, बल्कि लोकतंत्र और जनता की आवाज को दबाने की कोशिश है।” इस घटना ने उनकी निडरता और महिला गरिमा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर किया। उनकी यह मुखरता न केवल कैराना की महिलाओं, बल्कि देशभर की महिला नेताओं के लिए एक प्रेरणा बन रही है। यह दर्शाता है कि वे न केवल अपने क्षेत्र की समस्याओं के लिए लड़ती हैं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक जवाबदेही के लिए भी सजग रहती हैं।

जमीन से जुड़ी सांसद

कई बार देखा जाता है कि सांसद बनने के बाद नेता अपने क्षेत्र से दूरी बना लेते हैं, लेकिन इकरा चौधरी इस मामले में अपवाद हैं। वे हर सप्ताह अपने क्षेत्र में मौजूद रहती हैं, लोगों की समस्याएं सुनती हैं, और अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर उनके समाधान का प्रयास करती हैं। चाहे वह जल निकासी की समस्या हो, बिजली कटौती की शिकायत हो, स्वास्थ्य केंद्रों की कमी हो, या छात्रवृत्तियों का मसला इकरा चौधरी हर मुद्दे पर व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करती हैं।

उनके क्षेत्र के लोग बताते हैं कि इकरा सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक सेवक के रूप में उनके बीच मौजूद रहती हैं। एक स्थानीय किसान ने कहा, “हमारी सांसद हमारी बात को गंभीरता से सुनती हैं और तुरंत कार्रवाई करती हैं। यह हमें विश्वास दिलाता है कि हमारी आवाज सुनी जा रही है।” उनकी यह कार्यशैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती है।

अंत में यह कहना जरूरी है कि राजनीति इकरा चौधरी उम्मीद की नई किरण इकरा चौधरी केवल एक सांसद नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी सोच हैं जो भारतीय राजनीति को सेवा, समर्पण, और समावेशिता से जोड़ती है। उनकी कार्यशैली, जिसमें भाषणों से ज्यादा धरातल पर काम को प्राथमिकता दी जाती है, उन्हें जनता का सच्चा प्रतिनिधि बनाती है। वे जाति, धर्म, और वर्ग की दीवारों को तोड़कर हर व्यक्ति की पीड़ा को अपनी समझती हैं और उसका समाधान निकालने में जुटी रहती हैं।

क्षेत्रीय दिग्गजों का समर्थन एक मजबूत जनादेश की ओर इशारा है।

सांसद इकरा चौधरी की राजनीतिक यात्रा को उस समय और भी व्यापक समर्थन मिला जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के दो सशक्त चेहरे मुजफ्फरनगर लोकसभा के सांसद एवं कद्दावर नेता हरेंद्र मलिक और भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए खुला समर्थन दिया। ओर महापंचायत तक बुलाने की घोषणा की है जो एक मजबूत समर्थन है। यह समर्थन न केवल इकरा चौधरी की स्वीकार्यता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि वे सभी वर्गों किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं की आवाज़ को लेकर चल रही हैं। हरेंद्र मलिक जैसे वरिष्ठ समाजवादी नेता का साथ और राकेश टिकैत जैसे ज़मीनी किसान नेता का समर्थन यह दर्शाता है कि इकरा चौधरी केवल एक समुदाय या वर्ग की नहीं, बल्कि एक समावेशी नेतृत्व की प्रतीक हैं। इन दोनों नेताओं का समर्थन उनके लिए राजनीतिक मजबूती का स्तंभ बना और यही वह व्यापक जनसमर्थन था जिसने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में एक ऐतिहासिक जीत दिलाई।

कैराना की धरती ने एक ऐसी बेटी को संसद में भेजा है जो न केवल अपने क्षेत्र का गौरव बढ़ा रही है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन रही है। इकरा चौधरी का नेतृत्व भविष्य की उस राजनीति का प्रतीक है, जो विभाजन के बजाय एकता, और प्रचार के बजाय सेवा को प्राथमिकता देती है।

आज जब देश को समावेशी और संवेदनशील नेतृत्व की आवश्यकता है, इकरा चौधरी जैसी युवा नेत्रियां नई उम्मीद की किरण बनकर उभर रही हैं। उनकी यह यात्रा न केवल कैराना के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक कहानी है।

लेखक: मौ0आसिफ कुरैशी

(वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता औरसामाजिक विश्लेषक है।)

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