भारतीय रेलवे मनाएगा गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस
1 min read
भारतीय रेलवे मनाएगा गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस
रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बोले – रेलवे और सिख संगठनों का यह सहयोग होगा ऐतिहासिक
गोरखपुर, 29 अगस्त(गोरखपुर से वरिष्ठ पत्रकार उमेश तिवारी की विशेष कवरेज) भारतीय रेलवे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को भव्य और गरिमामय ढंग से मनाने की तैयारी कर रहा है। इस अवसर का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को गुरु जी की शिक्षाओं और बलिदानों से अवगत कराना तथा उनकी महान विरासत को और अधिक सशक्त रूप से समाज तक पहुँचाना है।
नई दिल्ली स्थित रेल भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने प्रमुख सिख संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि रेलवे, इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं से प्राप्त सभी सुझावों का स्वागत करता है। यह पहल न केवल गुरु तेग बहादुर जी के शौर्य और बलिदान की स्मृति को सजीव करेगी बल्कि रेलवे और सिख समुदाय के बीच एक मजबूत साझेदारी का भी प्रतीक बनेगी।
रेलवे की ओर से विशेष श्रद्धांजलि
बैठक में रेलवे द्वारा कई प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इनमें देशभर के प्रमुख स्टेशनों और रेलगाड़ियों में गुरु जी की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करना, शताब्दी वर्ष में विशेष स्मारक ट्रेनों का संचालन करना, हरियाणा, पटना और हजूर साहिब सहित विभिन्न स्टेशनों पर पंजाबी साइनबोर्ड लगाना तथा सचखंड एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में बेहतर स्वच्छता और लंगर व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है।
इसके साथ ही तीर्थयात्रा ट्रेनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और दिल्ली सहित अन्य महानगरों से सिख तीर्थ स्थलों तक रेल संपर्क को और सुगम बनाने पर भी सहमति बनी।
महत्वपूर्ण सुझाव
बैठक में प्रमुख नेताओं ने कई ठोस सुझाव रखे। इनमें दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर गुरु तेग बहादुर रेलवे स्टेशन करने, पटना साहिब स्टेशन पर लिफ्ट, एस्केलेटर और पैंट्री कार जैसी सुविधाओं को बढ़ाने, तख्त श्री पटना साहिब के लिए दैनिक रेल सेवा उपलब्ध कराने, तीर्थ स्थलों वाले स्टेशनों पर स्वच्छता प्रबंधन को मजबूत करने तथा वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों से पटना साहिब, हजूर साहिब और अन्य तख्तों तक बेहतर संपर्क स्थापित करने की बातें प्रमुख रहीं।
इसके अलावा, आगामी तीन महीने के लिए पांचों तख्तों को जोड़ने वाली एक विशेष श्रद्धांजलि ट्रेन चलाने का भी प्रस्ताव आया। वहीं करनाल और कुरुक्षेत्र जैसे स्थानों पर प्रमुख ट्रेनों के ठहराव बढ़ाने की मांग भी की गई।
बैठक में शामिल प्रतिनिधि
इस बैठक में देशभर से आए प्रमुख सिख नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें एस. मनजिंदर सिंह सिरसा, कैबिनेट मंत्री, एनसीटी दिल्ली सरकार; एस. गुरचरण ग्रेवाल, महासचिव, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी); एस. जगजोत सिंह सोही, अध्यक्ष, तख्त श्री पटना साहिब; एस. जगदीश सिंह झींडा, अध्यक्ष, हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति; डॉ. विजय सतबीर सिंह, प्रशासक, हजूर साहिब गुरुद्वारा प्रबंधक समिति; एस. तरलोचन सिंह, पूर्व सांसद, राज्यसभा तथा एस. विक्रमजीत सिंह साहनी, सांसद, राज्यसभा एवं अध्यक्ष, विश्व पंजाबी संगठन प्रमुख रहे।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी रहे मौजूद
रेलवे की ओर से भी शीर्ष स्तर पर भागीदारी रही। बैठक की अध्यक्षता करते हुए रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री सतीश कुमार ने आश्वासन दिया कि सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और इस शताब्दी समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।
रेलवे अधिकारियों में श्री नवीन गुलाटी (सदस्य, बुनियादी ढांचा), श्री हितेन्द्र मल्होत्रा (सदस्य, संचालन एवं व्यवसाय विकास), श्री अशोक कुमार वर्मा (महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे), श्री संजय कुमार जैन (सीएमडी, आईआरसीटीसी) और श्री धनंजय सिंह (कार्यकारी निदेशक, रेल मंत्रालय) भी मौजूद रहे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उद्देश्य
गौरतलब है कि गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे, जिन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा हेतु 1675 में अपने प्राणों का बलिदान दिया। उन्होंने औरंगज़ेब की जबरन धर्मांतरण की नीति का विरोध करते हुए बलिदान दिया और इतिहास में “हिंद की चादर” के रूप में प्रसिद्ध हुए। उनका जीवन संदेश है कि सत्य और न्याय की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में खड़ा रहना चाहिए।
रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने कहा कि “गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान ने न केवल सिख धर्म, बल्कि पूरे भारतीय समाज में स्वतंत्रता, धार्मिक सहिष्णुता और भाईचारे के मूल्यों को गहराई से स्थापित किया। रेलवे का यह आयोजन नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ने का एक प्रयास है।”
भविष्य की दिशा
बैठक में यह भी तय किया गया कि शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। रेलवे की ओर से विशेष प्रदर्शनी और यात्राएं निकाली जाएंगी, ताकि यात्रियों और युवाओं को गुरु जी के जीवन और उनके योगदान से परिचित कराया जा सके।
इस तरह भारतीय रेलवे, सिख संगठनों और समाज के बीच यह सहयोग एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में सामने आ रहा है, जो न केवल श्रद्धांजलि स्वरूप होगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा प्रदान करेगा।(गोरखपुर से वरिष्ठ पत्रकार उमेश तिवारी की विशेष कवरेज)


