हुसैनाबाद की धरोहर पर संकट
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हुसैनाबाद की धरोहर पर संकट : अतिक्रमण, अवैध होटल और शिकमी किराएदारों के विरुद्ध प्रशासन से कड़ी कार्यवाही की मांग
लखनऊ, 31 अगस्त
अवध की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर एक बड़ा विवाद अब सुर्खियों में है। राजधानी लखनऊ का हुसैनाबाद क्षेत्र, जो हुसैनाबाद एंड अलायड ट्रस्ट के अंतर्गत आता है, लगातार अतिक्रमण, अवैध होटल संचालन, शिकमी किराएदारों और असामाजिक गतिविधियों की गिरफ्त में आता जा रहा है। इस संबंध में अवध के तृतीय सम्राट बादशाह मोहम्मद अली शाह बहादुर के वंशज एवं उत्तराधिकारी मोहम्मद जावेद नवाब ने एक संयुक्त प्रार्थना पत्र उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, आयुक्त लखनऊ, जिलाधिकारी लखनऊ, पुलिस आयुक्त सहित कई शीर्ष अधिकारियों को प्रेषित किया है।
इस प्रार्थना पत्र में जावेद नवाब ने हुसैनाबाद क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण, कब्ज़े और ऐतिहासिक धरोहर स्थलों की दुर्दशा को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा है कि यदि 15 दिनों के भीतर प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्यवाही नहीं की गई, तो वह जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा पर शांतिपूर्ण धरना देने के लिए बाध्य होंगे।
अतिक्रमण ने बिगाड़ी स्थिति, आपात सेवाएँ प्रभावित
प्रार्थना पत्र के अनुसार हुसैनाबाद क्षेत्र में घंटाघर से अशफ़ाक़ होटल तक और आज़ादारी रोड पर होटल संचालकों द्वारा कुर्सी-मेज़ लगाकर फुटपाथ व सड़कों पर कब्ज़ा कर लिया गया है। इससे न केवल स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है, बल्कि एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाओं के आवागमन पर भी सीधा असर पड़ रहा है।
छोटे और बड़े दोनों गेटों के आसपास तथा खाली पड़ी जमीनों पर असामाजिक तत्वों ने अवैध रूप से काउंटर बना लिए हैं। फुटपाथ और सड़कें अब आम जनता के लिए नहीं बल्कि अवैध कारोबारियों के अड्डों में तब्दील होती जा रही हैं।
छोटे इमामबाड़े के सामने का नोबतखाना अवैध होटल में तब्दील
हुसैनाबाद क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या ऐतिहासिक धरोहरों पर हो रहा कब्ज़ा है। उदाहरणस्वरूप, छोटे इमामबाड़े के सामने स्थित नोबतखाना, जिसका निर्माण शाही दौर में नौबत (वाद्य) बजाने के लिए किया गया था, आज अवैध होटल में बदल गया है।
ज्ञातव्य है कि बड़े इमामबाड़े के सामने स्थित नोबतखाना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन है और वहाँ किसी प्रकार का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जाता। वहीं छोटे इमामबाड़े का नोबतखाना ट्रस्ट की देखरेख में होने के बावजूद अवैध होटल संचालकों के कब्ज़े में चला गया है।
जावेद नवाब के अनुसार, यह स्थिति न केवल ट्रस्ट के राजस्व की हानि कर रही है बल्कि धरोहर के स्वरूप और उसकी ऐतिहासिक पहचान पर भी गंभीर संकट खड़ा कर रही है।
शिकमी किराएदारों और गुंडागर्दी का जाल
प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि हुसैनाबाद ट्रस्ट की कई संपत्तियाँ अवैध शिकमी किराएदारों के कब्ज़े में हैं। ये लोग गुंडागर्दी कर भारी-भरकम हफ्ता वसूलते हैं और संपत्तियों को दूसरों को चढ़ा देते हैं। इसके चलते ट्रस्ट को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
इतना ही नहीं, एएसआई द्वारा संरक्षित भवनों में भी तोड़-फोड़ और बदलाव कराए जा रहे हैं, जो धरोहर संरक्षण अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल अवैध हैं बल्कि अवध की ऐतिहासिक धरोहरों के साथ गंभीर छेड़छाड़ भी है।
सामाजिक ताने-बाने को तोड़ रही अराजकता
प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि छोटे इमामबाड़े के आसपास लगने वाले अवैध फूड काउंटर अराजक तत्वों के जमावड़े का केंद्र बन चुके हैं। यहाँ दिन-प्रतिदिन असामाजिक गतिविधियाँ बढ़ती जा रही हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि हाल ही में खार वाली करबला में शराब सेवन की घटना तक सामने आई। इस घटना ने क्षेत्रीय निवासियों की भावनाओं को गहराई से आहत किया और लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।
प्रशासन से ठोस कदम उठाने की अपील
मोहम्मद जावेद नवाब ने अपने पत्र में प्रशासन से निम्न मांगें रखी हैं :
1. हुसैनाबाद क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण, होटल संचालन और शिकमी किराएदारी तत्काल रोकी जाए।
2. सभी फुटपाथ और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि जनता और आपात सेवाओं का आवागमन सुचारु हो सके।
3. छोटे इमामबाड़े के सामने स्थित नोबतखाना को अवैध कब्ज़े से मुक्त कर उसकी मूल ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखा जाए।
4. ट्रस्ट संपत्तियों एवं एएसआई संरक्षित भवनों में हो रही अवैध तोड़-फोड़ और बदलाव पर कठोर रोक लगाई जाए।
5. असामाजिक तत्वों और उन्हें संरक्षण देने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
“धरना देने के लिए बाध्य होऊँगा” – जावेद नवाब
पत्र में स्पष्ट चेतावनी देते हुए मोहम्मद जावेद नवाब ने कहा है कि यदि 15 दिनों के भीतर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जाती, तो वे अपने संगठन और क्षेत्रीय लोगों के साथ लखनऊ स्थित जीपीओ गांधी प्रतिमा पर शांति पूर्ण धरना देंगे।
उन्होंने कहा कि “अवध की धरोहरों पर अतिक्रमण और अवैध कब्ज़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह न केवल हमारी ऐतिहासिक पहचान से खिलवाड़ है बल्कि सामाजिक व्यवस्था और प्रशासनिक साख पर भी सवाल खड़ा करता है।”
क्षेत्रीय जनता में रोष
हुसैनाबाद क्षेत्र के स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से वे इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अवैध होटल और कब्ज़ों के कारण क्षेत्र का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो जनता भी जावेद नवाब के आंदोलन में शामिल होंगे
ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा की चुनौती
हुसैनाबाद लखनऊ की पहचान का अहम हिस्सा है। बड़े इमामबाड़ा, छोटे इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा और अन्य धरोहरें केवल इमारतें ही नहीं बल्कि शहर के गौरव और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं। यदि इन स्थलों पर अतिक्रमण और अवैध गतिविधियाँ जारी रहीं, तो यह न केवल अवध की परंपरा बल्कि पूरे प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर गहरा प्रश्नचिह्न होगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को किस स्तर पर लेता है और क्या आने वाले दिनों में अवैध कब्ज़ों, शिकमी किराएदारों और होटल संचालकों पर कार्रवाई होती है या नहीं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ धरोहर संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ भी इस प्रकरण को गंभीरता से देख रहे हैं।
मोहम्मद जावेद नवाब का यह कदम हुसैनाबाद की धरोहरों को बचाने की एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत माना जा रहा है। यदि प्रशासन तत्परता दिखाता है तो हुसैनाबाद की सूरत बदल सकती है, अन्यथा अवध की धरोहरों का क्षरण आने वाली पीढ़ियों के लिए केवल इतिहास की किताबों तक ही सीमित रह जाएगा।


