हुसैनाबाद ट्रस्ट में भ्रष्टाचार व अवैध कब्ज़े की शिकायत, मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
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हुसैनाबाद ट्रस्ट में भ्रष्टाचार व अवैध कब्ज़े की शिकायत, मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
लखनऊ, 13 सितम्बर।
नवाबीन-ए-अवध कमेटी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपते हुए हुसैनाबाद एंड एलाईड्स ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कमेटी का कहना है कि ट्रस्ट, जिसे धार्मिक और सामाजिक प्रयोजनों के लिए स्थापित किया गया था, आज भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का गढ़ बन चुका है।
कमेटी ने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से अवैध गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं और उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद जावेद नवाब ने कहा कि हुसैनाबाद रोड पर ट्रस्ट की जमीनों पर खुलेआम मेले और व्यवसायिक गतिविधियाँ कराई जा रही हैं। धार्मिक माहौल को प्रभावित करने वाले इन कामों से आमजन को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कमेटी की प्रमुख माँगें
ज्ञापन में मुख्यमंत्री से चार प्रमुख माँगें रखी गई हैं—
1. छोटे इमामबाड़े के सामने बने नौबत खाने को खाली कराया जाए।
2. हुसैनाबाद रोड पर फुटपाथ पर अवैध रूप से लग रही दुकानों को हटाया जाए।
3. ट्रस्ट से जुड़े तथाकथित दलाल, जो अपने को नवाब बताते हैं और ठेके के नाम पर अवैध वसूली करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
4. ट्रस्ट में कार्यरत उन कर्मचारियों की जाँच कराई जाए जिनके पास आय से अधिक संपत्ति पाई जाती है।
“जनता को हो रही है असुविधा”
कमेटी ने कहा कि ट्रस्ट की संपत्तियाँ मूल रूप से धार्मिक और सामाजिक उपयोग के लिए थीं, लेकिन आज वहाँ अवैध कब्ज़ा, दुकानें और ठेके चल रहे हैं। इस वजह से श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
“जाँच कराए सरकार”
ज्ञापन में मुख्यमंत्री से अपील की गई है कि तत्काल प्रभाव से इस मामले में उच्च स्तरीय जाँच कराई जाए, ताकि भ्रष्टाचार और अवैध कब्ज़े की समस्या खत्म हो और ट्रस्ट की संपत्तियाँ अपने वास्तविक उद्देश्य के लिए उपयोग हो सकें।
कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद जावेद नवाब ने उम्मीद जताई है कि सरकार जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए ठोस कदम उठाएगी। उल्लेखनीय है कि उक्त समस्याओं के निदान के लिए कई बार उत्तर प्रदेश सरकार को और संबंधित उच्च अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए जा चुके हैं परंतु अभी तक भी कोई संतोषजनक कार्यवाही नहीं हो पा रही है अब देखना यह है कि इस संदर्भ में संतोषजनक कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कब अमल में लाई जाएगी अन्यथा यह मामला आगे चलकर बड़े आंदोलन का रूप भी ले सकता है


