हिंदी दिवस पर कवयित्री अंजली उत्तरेजा गुप्ता को मिला विश्व हिंदी रत्न मानद उपाधि सम्मान
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हिंदी दिवस पर कवयित्री अंजली उत्तरेजा गुप्ता को मिला विश्व हिंदी रत्न मानद उपाधि सम्मान
हिंदी दिवस (2025) का दिन उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर के लिए एक ऐतिहासिक क्षण लेकर आया। जिले की ख्यातिप्राप्त कवयित्री अंजली उत्तरेजा गुप्ता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित “विश्व हिंदी रत्न मानद उपाधि सम्मान” से नवाजा गया। यह सम्मान नेपाल की साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउन्डेशन नेपाल द्वारा आयोजित विश्व हिंदी कविता प्रतियोगिता में उनकी उत्कृष्ट और भावनात्मक रचनाओं के आधार पर प्रदान किया गया।
इस प्रतियोगिता में देश-विदेश से हजारों कवि-कवयित्रियों ने भाग लिया। कई चरणों की कठोर चयन प्रक्रिया के बाद कुल 265 रचनाकारों का चयन हुआ। इनमें अंजली उत्तरेजा गुप्ता का नाम शामिल होना न केवल उनके लिए, बल्कि हिंदी साहित्य की पूरी धारा के लिए गर्व का विषय है।
अंजली का नाम हाल ही में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (2025) में दर्ज हुआ है, जो उनकी रचनात्मकता, परिश्रम और मौलिक सोच का प्रमाण है। वे अपने लेखन के साथ-साथ यूट्यूबर और मेकअप आर्टिस्ट के रूप में भी सक्रिय हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उनकी पहचान केवल साहित्य तक सीमित नहीं, बल्कि कला, सौंदर्य और अभिव्यक्ति के विविध आयामों तक फैली हुई है।
उन्होंने अब तक कई साझा संकलनों में संपादन और योगदान किया है। उनकी कविताओं का स्वर गहन, आत्मिक और प्रभावशाली होता है। वे जब भी ओपन माइक मंचों पर अपनी रचनाएँ प्रस्तुत करती हैं, श्रोताओं का मन मोह लेती हैं। यही कारण है कि आज उनकी कविताएँ सीमाओं को लांघकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी सुनी और सराही जा रही हैं।
सम्मान प्राप्त करने पर अंजली ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा—
“अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मेरी कविताओं का मूल्यांकन और सराहना होना मेरे लिए एक गौरवपूर्ण अनुभव है। शब्द प्रतिभा संस्था जिस समर्पण और निष्ठा से साहित्यकारों को मंच प्रदान कर रही है, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। यह सम्मान मेरे लिए केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है, जो मुझे और अधिक गहराई से लिखने और समाज को अपने शब्दों से दिशा देने के लिए प्रेरित करेगा।”
संस्था के अध्यक्ष आनन्द गिरि मायालु ने अंजली के लेखन की प्रशंसा करते हुए कहा—
“अंजली उत्तरेजा गुप्ता की कविताएँ सहजता और गहराई से भरी होती हैं। उनमें भावनाओं की सच्चाई, जीवन का अनुभव और समाज को रूपांतरित करने की क्षमता झलकती है। उनके शब्द पाठकों और श्रोताओं के मन में गहरा असर छोड़ते हैं।”
अंजली की साहित्यिक यात्रा बचपन से ही शब्दों के प्रति लगाव और संवेदनशीलता से शुरू हुई। उन्होंने जीवन के विविध पहलुओं को कविता में उतारते हुए अपने लेखन को लगातार निखारा। उनकी कविताओं में प्रेम, पीड़ा, जीवन का यथार्थ, अध्यात्म और सामाजिक सरोकार सहजता से दिखाई देते हैं।
विशेष रूप से, वर्तमान में उनका चल रहा भगवान शिव पर आधारित काव्य-संग्रह उनके लेखन को एक नई ऊँचाई देता है। इस संग्रह में वे शिव के विभिन्न रूपों—तांडव, समाधि, विराग, तत्व, भक्ति और करुणा—को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्त कर रही हैं। यह न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि आत्मबोध और दर्शन की यात्रा भी है।
उनकी रचनात्मकता का दायरा सोशल मीडिया तक भी फैला हुआ है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य मंचों पर उनकी कविताएँ और शायरी हजारों लोगों तक पहुँच रही हैं। वे युवा पीढ़ी को यह संदेश देती हैं कि शब्द केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि परिवर्तन और प्रेरणा का साधन भी हो सकते हैं।
इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार और मित्रों में उत्साह है, बल्कि पूरे मुज़फ्फरनगर जिले में गर्व और बधाई की लहर है। स्थानीय साहित्यकारों और पाठकों का मानना है कि अंजली की यह सफलता क्षेत्र की साहित्यिक धारा को नई पहचान दिलाएगी।
हिंदी दिवस पर यह सम्मान अंजली उत्तरेजा गुप्ता जैसी कवयित्रियों की प्रतिबद्धता और सृजनशीलता को रेखांकित करता है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि हिंदी साहित्य की गूंज केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे विश्व में सुनी और सराही जा सकती है।
आज वे उन साहित्यिक हस्तियों में शामिल हो चुकी हैं, जो आने वाले समय में हिंदी भाषा और साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।


