ऑल इंडिया मुशायरा में शायरों ने पेश किए कलाम
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ऑल इंडिया मुशायरा में शायरों ने पेश किए कलाम
मुशायरे में शेरो-शायरी, गजल नगमे सुन वाह-वाह करते रहे श्रोता
खतौली :- प्राचीन मेला श्रावणी छड़ियान के अवसर पर नगर पालिका परिषद खतौली के तत्वाधान में मंगलवार की शाम उस्ताद सुनहरामल व सलीम खतौलवी की याद में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरे में देशभर से आए नामचीन शायरों ने शायरी में शिक्षा, सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के विषयों पर अपने-अपने कलाम से शमा बांध दिया।
मुशायरे का शुभारंभ खतौली चैयरमैन हाजी शाहनवाज, मुख्य अतिथि लतेश विधूड़ी, सपा नेता नबील अहमद ने संयुक्त रूप से फीता काटकर व समाजसेवी हसन अली ने शमा रोशन कर किया। निजामत नदीम फरुख ने की ।
मुशायरा में अपने कलाम पेश करते हुए बिलाल सहारनपुरी ने खून के रिश्तों से दामन को छुड़ाने निकले, अपनी तहज़ीब को हम खुद ही मिटाने निकले, आश्रम में किया माँ बाप को दाखिल और नई कार में कुत्तों को घुमाने निकले, जैसे ही शायर ने यह पंक्तियां पढ़ी तो पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
हाशिम नोमानी ने कहा सख्त मुश्किल में हूं किस किस की जरूरत देखूं… अपना मैं फर्ज निभाऊ’ या मुहब्बत देखूं… इक पड़ोसी ने मिरे पास अमानत रख दी अब मैं ईमान संभालूं कि जरूरत देखूं ।
आदिल रशीद ने पढ़ा उसकी हर एक याद में लज़्ज़त होती है
पहली मोहब्बत, पहली मोहब्बत होती है…तेरे साथ नहीं है तो अहसास हुआ, एक तस्वीर की कितनी कीमत होती हैं।
हिमांशी बाबरा ने सुनाया.. दिल ऐसे मुब्तला हुआ तेरे मलाल में
ज़ुल्फ़ें सफ़ेद हो गईं उन्नीस साल में…ऐसे वो रो रहा था मिरा हाल देख कर, आया हुआ हो जैसे किसी इंतिक़ाल में ।
शबीना अदीब ने सुनाया.. अभी न आएगी नींद तुमको अभी न हमको सुकूं मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़्यादा अभी ये चाहत नयी-नयी है ।
अबरार काशिफ ने अपनी मशहूर नज़्म मिरे रब की मुझ पर इनायत हुई…कहूँ भी तो कैसे इबादत हुई…हक़ीक़त हुई जैसे मुझ पर अयाँ…क़लम बन गया है ख़ुदा की ज़बाँ । पढ़ कर श्रोताओं को कुर्सियों से उठने पर मजबूर कर दिया ।
अलताफ जिया ने अदब की हद में रहने से सुखन मेला नहीं होता गजल पढ़ी।
मजाहिया शायर सज्जाद झंझट ने अपनी शायरी से श्रोताओं को खूब हंसाया।
मशहूर शायर महशर आफरीदी ने पढ़ाया अपने मेयार से नीचे तो मैं आने से रहा, शेर भूखा हो मगर घास तो खाने से रहा। कर सको तो मेरी चाहत का यकीन कर लेना, अब तुम्हें चीर के मैं दिल तो दिखाने से रहा।।
इसके बाद जितने भी शायर माइक पर आए सबने कौमी एकता और वतन परस्ती के कलाम सुनाकर लोगों का दिल जीता।
कार्यक्रम संयोजक सोनू फरीदी सभासद, सह संयोजक असद शालू सभासद व दानिश मुल्तानी सभासद ने बाहर से आए अतिथियों लतेश विधूड़ी, मुकीत अब्बासी, एड. इमरान अहमद, हाजी सलमान, डॉक्टर शाहिद कुरैशी व शहर की कई हस्तियों डॉक्टर अमीर आज़म, अजय जन्मेजय, उस्ताद जमाल हाशमी, काजी नबील अहमद, अदिल अहमद तासीर हसन, हाजी जमीरुद्दीन, शादाब शीशा, शाहिद सलमानी आदि को स्मृति चिन्ह भेंट कर व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम सलाहकार परवेज़ काजी ने मुशायरे को सफल बनाने के लिए सभी श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
मुशायरा में डॉक्टर मंसूर, इंजीनियर नासिर अहमद, प्रवीण ठकराल, हाजी यूसुफ, लइक अहमद, मुब्बशिर हाशमी, नदीम अंजुम, हारून खान, जावेद मुल्तानी, जावेद पठान, अभिषेक गोयल एडवोकेट, नबील कुरैशी, शादाब जाट, साकिब अली, हम्माद सिद्दीकी आदि नगर व आसपास के हजारों की संख्या में लोगों ने शिरकत की।


