चारबाग रेलवे स्टेशन: अवैध स्टैंड का ‘VIP’ खेल, अधिकारी मौन, भ्रष्टाचार अपने शबाब पर
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*चारबाग रेलवे स्टेशन: अवैध स्टैंड का ‘VIP’ खेल, अधिकारी मौन, भ्रष्टाचार अपने शबाब पर!*
*लखनऊ:* चारबाग रेलवे स्टेशन अब यात्रियों के लिए एक सफर की शुरुआत से ज्यादा, एक ‘ठगी’ का नया डेस्टिनेशन बन चुका है। यहां आते ही आपको लगेगा कि ट्रेन से उतरकर किसी रेलवे स्टेशन पर नहीं, बल्कि ‘अवैध स्टैंड महोत्सव’ में आ गए हैं! टैक्सी चालकों का ऐसा जबरदस्त मैनेजमेंट है कि प्रशासन की आंखों पर पट्टी बंधी है, और जीआरपी? अरे भैया, वो तो इस खेल के सबसे ‘स्पेशल मेंबर’ हैं!
*रेलवे प्रशासन: देख कर भी अनदेखा!*
रेलवे को रोज़ाना करोड़ों का नुकसान हो रहा है, लेकिन अधिकारी इस ‘व्यवस्था’ से इतने खुश हैं कि उन्हें यात्रियों की लूट, अराजकता और नियमों की धज्जियां उड़ते हुए नहीं दिखतीं। कोई तय किराया नहीं, कोई नियम नहीं—बस ‘खुला खेल फर्रुखाबादी’! प्रयागराज महाकुंभ के चलते श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय रेल मंत्री व्यवस्था सुधारने में लगे हैं, मगर उत्तर पूर्वी रेलवे प्रशासन चैन की नींद सो रहा है।
अब तक कई शिकायती पत्र और मीडिया रिपोर्ट्स आ चुकी हैं, मगर कार्रवाई? वो तो चारबाग के अवैध स्टैंड जितनी ही ‘अदृश्य’ है!
*अवैध स्टैंड का असली मालिक कौन?*
सूत्रों के मुताबिक, इन अवैध स्टैंडों के पीछे समाजवादी पार्टी से जुड़े **इस्लाम नामक व्यक्ति और उनके छोटे भाई** का मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है। इनके जीआरपी और रेलवे अधिकारियों से इतने मधुर संबंध हैं कि ‘कानून’ इनके लिए सिर्फ नाम की चीज़ रह गई है। जीआरपी इन टैक्सी चालकों को ‘विशेष सुविधा’ देती है और बदले में हर महीने अच्छी-खासी ‘कृपा राशि’ वसूलती है। यानी यात्रियों से जबरन पैसा खींचने की यह योजना बेहद सुनियोजित तरीके से चलाई जा रही है।
*एनईआर: रेलवे स्टेशन या टैक्सी माफिया का अड्डा?*
चारबाग का उत्तर पूर्वी रेलवे (NER) सेक्शन अब ट्रेन यात्रियों के लिए कम और टैक्सी माफिया के लिए ज्यादा सुविधाजनक जगह बन चुका है। प्लेटफॉर्म नंबर 6 से लेकर दुर्गापुरी मेट्रो स्टेशन तक, हर जगह अवैध टैक्सियों का ‘स्वर्णिम साम्राज्य’ फैला हुआ है। सुबह-सुबह पुष्पक एक्सप्रेस से उतरने वाले यात्री इनके ‘वीआईपी कस्टमर’ होते हैं, जिनसे मनचाहा किराया वसूला जाता है।
अब तो हालत यह हो गई है कि *स्टेशन के बाहर ये टैक्सी चालक बाकायदा यात्रियों को ‘हाईजैक’ कर लेते हैं!* जैसे ही कोई यात्री बाहर निकला, वैसे ही उसे चारों तरफ से घेर लिया जाता है, और फिर शुरू होता है ‘जबरदस्ती टैक्सी में बैठाने का गेम’! विरोध किया? तो मारपीट, धमकी और सामान छीनने का भी पूरा इंतज़ाम है।
*शिकायतें ठंडे बस्ते में, प्रशासन ‘बेखबर’!*
रेलवे के इस बड़े घोटाले को लेकर कई बार शिकायतें हुईं, लेकिन नतीजा? ढाक के वही तीन पात! एनआर स्टैंड के अध्यक्ष *नफ़ीस* ने रेलवे के उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर इस अराजकता पर रोक लगाने की मांग की, मगर जवाब वही पुराना सरकारी राग— *”आगे भेज रहे हैं, कार्रवाई होगी!”*
अब आप ही बताइए, कार्रवाई होगी या जीआरपी और टैक्सी माफिया का ‘खेल’ ऐसे ही जारी रहेगा? जब तक हर महीने ‘चढ़ावा’ पहुंच रहा है, तब तक कोई समस्या नहीं। रेलवे को घाटा हो या यात्री परेशान हों, इससे किसी को क्या फर्क पड़ता है?
*तो क्या अब नियम-कानून भी VIP पास से चलेंगे?*
चारबाग स्टेशन पर अगर आपको कभी नियम-कानून लागू होता दिख जाए, तो समझ जाइए कि कोई बहुत बड़ा चमत्कार हुआ है! लेकिन अब देखना यह है कि क्या रेलवे प्रशासन और जीआरपी की आंखें कभी खुलेंगी, या फिर इस अवैध स्टैंड का खेल यूं ही ‘चालू’ रहेगा?
*यात्रियों, सावधान! अगली बार चारबाग स्टेशन आइए, तो नियम-कानून की उम्मीद मत रखिए, क्योंकि यहां ‘अवैध स्टैंड’ और ‘भ्रष्टाचार’ ही असली बॉस हैं!*


