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April 14, 2026

Suraj Kesari

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स्पोर्ट्स अल्फाबेटिकल बुकलेट्स का 21 भाषाओं में पूरे विश्व में एक साथ हुआ ऐतिहासिक विमोचन

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स्पोर्ट्स अल्फाबेटिकल बुकलेट्स का 21 भाषाओं में पूरे विश्व में एक साथ हुआ ऐतिहासिक विमोचन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, स्पोर्ट्स लिटरेसी मिशन
21 भाषाओं में खेल वर्णमाला
नई दिल्ली 3 अप्रैल प्राप्त समाचार के अनुसार विगत
दिनाँक 31 मार्च 2026 को सांय नई दिल्ली स्थिति इंडिया हेबिटेट सेंटर एक विशेष ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बना। सम्भवतः पहला अवसर है जब एक ही स्थान पर, एक ही समय पर, एक ही विषय पर, एक साथ 21 भाषाओं में किसी पुस्तक का विमोचन सम्पन्न हुआ हो। स्पोर्ट्स ए वे ऑफ लाइफ संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान एवं हिमाचल के पूर्व राज्यपाल श्री कलराज मिश्र जी ने की। इस अवसर पर विख्यात हॉकी खिलाड़ी, ओलम्पियन एवं अर्जुन अवार्डी श्री अशोक ध्यानचन्द, संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. मिलिन्द पाण्डेय सहित भारत के विभिन्न प्रान्तों के माननीय सांसदगण उपस्थिति हुऐ और उन्होंने एक साथ 21 भाषाओं में तैयार खेल वर्णमाला का एक साथ अपने कर कमलों से लोकार्पण किया।
संस्था के अध्यक्ष एवं विख्यात खेल शोधकर्ता डॉ. कनिष्क पाण्डेय की यह संकल्पना भारत में खेल संस्कृति विकसित करने के लिए पिछले एक दशक से लगातार जारी शोध एवं प्रयोगों का परिणाम है। इस अवसर पर कनिष्क ने बताया कि जिस प्रकार अक्षर ज्ञान बच्चे में पढ़ाई के प्रति अभिरूचि पैदा करने की पहली कड़ी है उसी प्रकार खेल वर्णमाला बच्चों में खेल के प्रति लगाव पैदा करने की कड़ी क्यों नहीं बनायी जा सकती। खेल वर्णमाला का दोहरा लाभ है। यहाँ बच्चा अक्षर ज्ञान और पढ़ाई से जुड़ने के साथ-साथ खेलों के साथ भी अपना जुड़ाव विकसित करेगा। जैसे ए फार एप्पल, बी फार बाय तथा क से कबूतर, ख से खरगोश सीखा कर पढ़ाई से जोड़ा जा सकता है तो साथ ही साथ क से कबड्डी, ख से खो-खो, ए फार
स्पोर्ट्स ए वे ऑफ़ लाइफ खेल वर्णमाला के चार लक्ष्य
1. खेल साक्षरता में वृद्धि
2. खेल और पढ़ाई को
प्रतिस्पद्र्धी के बजाय पूरक के रूप में विकसित करना।
3. व्यक्तित्व के संर्वागीण विकास में अनुशासन, लीडरशिप, निर्णय क्षमता जैसे 16 खेल मूल्यों का समावेशन किंडर गार्डन स्तर पर ही सुनिश्चित करना।
4. बच्चों में बढ़ती मोबाइल, कम्प्यूटर, ऑनलाइन गेमिंग जैसी अति आदतों से दूर करना और आउटडोर गतिविधियों को प्रोत्साहित करना।
एथलीट, बी फोर बासकेट बाल पढ़ा कर उसे पढ़ाई के साथ-साथ खेलों से भी जोड़ने में संकोच नहीं करना चाहिए।
कनिष्क ने आगे बताया कि हमारे देश में खेल और पढ़ाई को दो अलग-अलग विधाएँ मानकर नीतियाँ अब तक बनायी जाती रही हैं। खेल और पढ़ाई एक दूसरे के प्रतिरोधी है ऐसी नकारात्मक मनोवृत्ति समाज में रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि पढ़ाई और खेल प्रतिस्पद्र्धी नहीं बल्कि एक दूसरे के पूरक है।
दुनिया के विकसित देशों में उच्च शैक्षिक संस्थायें जहाँ एकेडमिक्स में अपना झंडा गाड़े हुऐ है वहीं खेलों में भी वे अव्वल है। मैंने अपने शोध के दौरान पाया कि ऑक्सफ़ोर्ड, कैम्ब्रिज व स्टॅफोर्ड जैसे नामी गिरामी विश्वविद्यालयों के छात्रों ने ओलम्पिक खेलों में अपने अपने देश को सबसे ज्यादा मेडल जिताये हैं। भारत में अलग से स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बनाने की नीति है। हम क्यों नहीं अपने उच्च शिक्षण संस्थाओं को ‘खेल शक्ति’ बनने की जिम्मेदारी नहीं सौंपते । खेल वर्णमाला, किंडर गार्डन स्तर पर पढ़ाई और खेल की संयुक्त नर्सरी बने यही इन 21 भाषाओं में तैयार पुस्तिकाओं का उद्देश्य है।
श्री कलराज मिश्र ने कनिष्क को बधाई देते हुऐ कहा कि हर भारतीय भाषा में खेलों की ये वर्णमाला देश की सांस्कृतिक विलक्षणता और एकता का जीता जागता उदाहरण है।
नेपाल के सांसद ने भी की सहभागिता
खेल वर्णमाला हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत, मराठी, बांग्ला, खासी, भोजपुरी, बुन्देली, राजस्थानी, कुमाऊँनी, गढ़वाली, कश्मीरी, पंजाबी, तेलगु, तमिल, कन्नड़, उडिया, मलयालम, गुजराती सहित दो विदेशी भाषाओं अरबी और नेपाली में भी तैयार की गई है। नेपाली भाषा में तैयार खेल वर्णमाला का विमोचन करने के लिए नेपाल के संसद सदस्य श्री अभिषेक प्रताप शाह जी स्वयं उपस्थित थे। श्री शाह नेपाल की कपिलवस्तु सीट से सांसद हैं और इस कार्यक्रम में प्रतिभाग करने के लिए काठमांडू से यहाँ पधारे हैं। उन्होंने न केवल इस किताब का विमोचन किया बल्कि स्पोर्ट्स ए वे ऑफ़ लाइफ के खेल साक्षरता अभियान की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने यह भी कहा कि इस खेल वर्णमाला को अपने देश की प्राथमिक पाठशालाओं में अनिवार्य रूप से लागू किये जाने की संस्तुति अपनी सरकार से करेंगे।
श्री अशोक ध्यानचन्द ने कहा कि मैं लम्बे समय से स्पोर्ट्स ए वे ऑफ़ लाइफ के कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ हूँ। अपने लम्बे जीवन में खेल संस्कृति विकसित करने के लिए इस तरह के वैज्ञानिक प्रयासों को मैंने पहली बार अनुभव किया है।
इस अवसर पर कई माननीय सांसदगणों ने स्वयं उपस्थित होकर तथा संदेशों के माध्यम से अपने आशीर्वचनो से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। देश में खेल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए 21 भाषाओं में प्रकाशित स्पोर्ट्स अल्फाबेट बुकलेट को युवा पीढ़ी के लिए अनूठी पहल और उनके सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष डॉ. कनिष्क पाण्डेय, उपाध्यक्ष प्रो. मिलिन्द पाण्डेय, श्री कलराज मिश्र, श्री अशोक ध्यानचन्द, सांसदगण श्रीमति सुलाता देव (सांसद राज्यसभा ओडिशा), श्री अभिषेक प्रताप शाह (सांसद कपिलवस्तु, नेपाल), श्रीमति सीमा द्विवेदी (सांसद राज्यसभा, उत्तर प्रदेश), श्री अनुराग शर्मा (सांसद लोकसभा, उत्तर प्रदेश), श्री गोल्ला बाबू राव (सांसद राज्यसभा, आन्ध्र प्रदेश), सहित सैकड़ों लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में संस्था के उपाध्यक्ष प्रो. मिलिन्द पाण्डेय ने उपस्थित अतिथिगणों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

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