उत्तराखंड को लेकर कथित अपमानजनक टिप्पणी पर भड़के डॉ. अनुपम सिंह भंडारी
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उत्तराखंड को लेकर कथित अपमानजनक टिप्पणी पर भड़के डॉ. अनुपम सिंह भंडारी
भारतीय पर्वतीय महासभा ने की कड़ी निंदा, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उत्तराखंड के लोगों के लिए कथित तौर पर की गई अपमानजनक टिप्पणी को लेकर भारतीय पर्वतीय महासभा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुपम सिंह भंडारी ने इस टिप्पणी की घोर निंदा करते हुए कहा कि उत्तराखंड की जनता, उसकी संस्कृति, परंपराओं और स्वाभिमान का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
डॉ. भंडारी ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, संघर्ष, वीरता और बलिदान की गौरवशाली भूमि है। यहां के लोगों ने देश की सीमाओं की रक्षा से लेकर राष्ट्र निर्माण तक में अतुलनीय योगदान दिया है। ऐसे में उत्तराखंड के लोगों के लिए किसी भी प्रकार की अपमानजनक संज्ञा का प्रयोग करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
रामपुर तिराहा कांड के बलिदानों को नहीं भुलाया जा सकता
डॉ. भंडारी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन लंबे जनसंघर्ष और असंख्य आंदोलनकारियों के बलिदान का परिणाम है। वर्ष 1994 में पृथक राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलन के दौरान खटीमा गोलीकांड, मसूरी गोलीकांड और रामपुर तिराहा कांड जैसी घटनाएं उत्तराखंड के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में शामिल हैं।
2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में सात आंदोलनकारियों की मृत्यु हुई थी। इस घटना के दौरान महिला आंदोलनकारियों के साथ गंभीर अत्याचार के आरोप भी सामने आए थे। इन घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने अलग राज्य के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। लंबे संघर्ष, जनआंदोलनों और बलिदानों के बाद 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड अलग राज्य बना। इसलिए उत्तराखंड की जनता के आत्मसम्मान और ऐतिहासिक संघर्ष को किसी भी राजनीतिक टिप्पणी से कमतर नहीं आंका जा सकता।
उत्तर प्रदेश के विकास में उत्तराखंड का भी रहा है योगदान
डॉ. भंडारी ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंध रहा है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों ने अविभाजित उत्तर प्रदेश के विकास में भी योगदान दिया। यहां के युवाओं ने सेना, प्रशासन, शिक्षा, चिकित्सा और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा एवं परिश्रम से प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों की मेहनत, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति उनकी पहचान है। किसी भी समुदाय या क्षेत्र के लोगों को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
भारतीय पर्वतीय महासभा चलाएगी देशव्यापी अभियान
डॉ. अनुपम सिंह भंडारी ने स्पष्ट किया कि भारतीय पर्वतीय महासभा उत्तराखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आवाज उठाएगी।
उन्होंने कहा कि महासभा इस विषय पर देशभर में जनजागरण अभियान चलाने, विभिन्न राज्यों में रहने वाले उत्तराखंडी समाज के प्रतिनिधियों को एकजुट करने तथा शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने की दिशा में पहल करेगी। अभियान की आगामी रूपरेखा संगठन के पदाधिकारियों एवं विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के बाद घोषित की जाएगी।
उन्होंने कहा, “उत्तराखंड का अपमान, उत्तराखंड की अस्मिता और उसके गौरवशाली इतिहास का अपमान है। हम राजनीतिक विरोध से ऊपर उठकर अपने समाज के सम्मान की रक्षा करेंगे। हमारा विरोध किसी व्यक्ति या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि अपमानजनक टिप्पणी और ऐसी राजनीतिक भाषा के विरुद्ध है, जो समाज में वैमनस्य पैदा करती है।”
डॉ. भंडारी ने संबंधित राजनीतिक नेतृत्व से टिप्पणी के संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करने और उत्तराखंड की जनता की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।
उन्होंने अंत में कहा कि भारतीय पर्वतीय महासभा उत्तराखंड के शहीदों, राज्य आंदोलनकारियों और उनके परिवारों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। महासभा का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से उत्तराखंड की गरिमा, सामाजिक सम्मान और न्याय की आवाज को देशव्यापी स्तर पर बुलंद करना है।


