नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 9412807565,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें
October 24, 2026

Suraj Kesari

No.1 Digital News Channel of India

व्हीलचेयर पर मैक्स हॉस्पिटल, नोएडा, पहुंचे 40-वर्षीय मरीज ने कॉम्प्लेक्स स्पाइनल ट्यूमर की सर्जरी के बाद दोबारा चलना शुरू किया

1 min read

व्हीलचेयर पर मैक्स हॉस्पिटल, नोएडा, पहुंचे 40-वर्षीय मरीज ने कॉम्प्लेक्स स्पाइनल ट्यूमर की सर्जरी के बाद दोबारा चलना शुरू किया

 

 

मुजफ्फरनगर, अक्टूबर 24, 2026: मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के डॉक्टरों ने 40 वर्षीय मुजफ्फरनगर निवासी के रीढ़ की हड्डी में मौजूद कॉम्प्लेक्स ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाला। ट्यूमर के कारण मरीज के पैर की ताकत कम हो गई थी और उसे बिना सहारे चलने में परेशानी हो रही थी। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के न्यूरोसर्जरी एवं न्यूरो स्पाइन विभाग के सीनियर डायरेक्टर – डॉ. दिनेश रत्तनानी के नेतृत्व में आधुनिक सर्जिकल तकनीक की मदद से यह ऑपरेशन किया गया।

इमरान को पिछले छह महीनों से कमर के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत थी, जो बाएं पैर तक फैलता था। इसके साथ ही उनके बाएं पैर में कमजोरी, घुटने के नीचे मांसपेशियों की ताकत और सेंसेशन में कमी तथा चलने के लिए सहारे की जरूरत जैसी समस्याएं थीं। इन लक्षणों के कारण पहले एक अन्य हॉस्पिटल में उनका ऑपरेशन किया गया था, लेकिन ट्यूमर पूरी तरह नहीं निकाला जा सका। सर्जरी के बाद भी पैर की ताकत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद मरीज मैक्स हॉस्पिटल, नोएडा, की ओपीडी में व्हीलचेयर पर पहुंचे। जांच में उनके बाएं पैर की ताकत काफी कम पाई गई और घुटने के नीचे सेंसेशन भी प्रभावित थी। आगे की जांच में रीढ़ की हड्डी के D12-L1 स्तर पर इंट्राड्यूरल एक्स्ट्रामेडुलरी स्पाइनल ट्यूमर का पता चला।

लगभग 3×3 सेंटीमीटर आकार का यह ट्यूमर ड्यूरा नामक सुरक्षात्मक झिल्ली के भीतर स्थित था और उन नसों पर दबाव डाल रहा था, जो पैरों की गतिविधियों और सेंसेशन को नियंत्रित करती हैं। इसके कारण मरीज की चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित हो रही थी। पैर में गंभीर कमजोरी और चलने में परेशानी को देखते हुए सर्जरी का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान नर्व मॉनिटरिंग तकनीक की मदद से ट्यूमर को लगभग पूरी तरह निकाल दिया गया और नसों पर पड़ रहे दबाव को दूर किया गया।

 

 

इस मामले पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा, के न्यूरोसर्जरी एवं न्यूरो स्पाइन विभाग के सीनियर डायरेक्टर – डॉ. दिनेश रत्तनानी, ने कहा, “रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर होने पर लगातार कमर दर्द, पैरों में कमजोरी, सेंसेशन में बदलाव और चलने में परेशानी हो सकती है। ऐसा तब होता है, जब ट्यूमर आसपास की नसों पर दबाव डालता है। इन लक्षणों को सामान्य कमर दर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, विशेषकर जब कमजोरी लगातार बढ़ रही हो या चलने-फिरने में कठिनाई होने लगे। इस मरीज के बाएं पैर में काफी कमजोरी और सेंसेशन में कमी थी। इसलिए D12-L1 स्तर पर लैमिनेक्टॉमी करके ट्यूमर निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान न्यूरो नर्व मॉनिटरिंग का इस्तेमाल किया गया, ताकि सर्जरी के बाद नसों को नुकसान और कमजोरी के जोखिम को कम किया जा सके। साथ ही, ड्यूरा की सुरक्षित क्लोजर प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए ड्यूराजेन और टिसील ग्लू का इस्तेमाल किया गया।”

 

सर्जरी के बाद मरीज के बाएं पैर की मांसपेशियों की ताकत में सुधार हुआ और चलने की क्षमता भी बेहतर हुई। हालांकि, पैर में कुछ सुन्नपन बना रहा, लेकिन उनकी रिकवरी संतोषजनक रही और सर्जरी का घाव भी ठीक रहा। ऑपरेशन के पांचवें दिन उन्हें स्थिर स्थिति में हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। विशेष बात यह रही कि मरीज हॉस्पिटल में व्हीलचेयर पर आए थे, लेकिन सर्जरी के लगभग दो महीने बाद वह दोबारा स्वतंत्र रूप से चलने लगे और उनकी चलने-फिरने की क्षमता में काफी सुधार हुआ।

 

 

डॉ. रत्तनानी ने आगे कहा, “स्पाइनल ट्यूमर की सर्जरी का उद्देश्य नसों पर पड़ रहे दबाव को दूर करना और आसपास की महत्वपूर्ण नसों को सुरक्षित रखना होता है। इसके साथ ही, ड्यूरा की उचित क्लोजर प्रक्रिया जरूरी है, ताकि सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) के रिसाव जैसी कॉम्प्लीकेशन्स से बचा जा सके। सर्जरी के बाद ताकत और चलने की क्षमता में सुधार कई बातों पर निर्भर करता है, जिनमें ट्यूमर की स्थिति, नसों पर उसके प्रभाव की गंभीरता और इलाज से पहले लक्षणों की अवधि शामिल हैं। इस मरीज में सर्जरी के बाद पैर की ताकत और चलने की क्षमता में हुआ सुधार उत्साहजनक है। बेहतर रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी, रिहैबिलिटेशन और नियमित फॉलो-अप भी महत्वपूर्ण हैं।”

 

 

यह मामला लगातार कमर दर्द के साथ पैरों में कमजोरी, सेंसेशन में बदलाव या चलने में परेशानी होने पर समय रहते जांच कराने के महत्व को दर्शाता है। ऐसे लक्षण रीढ़ की हड्डी या नर्वस सिस्टम से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं, जिसके लिए विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा में न्यूरोसर्जरी एवं न्यूरो स्पाइन सेवाओं के माध्यम से मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नर्वस सिस्टम से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

Right Menu Icon