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July 17, 2026

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नाबार्ड और एनएसडीसी ने ग्रामीण उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के लिए

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नाबार्ड और एनएसडीसी ने ग्रामीण उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के लिए ‘ग्रामोदयम’ कार्यक्रम शुरू किया

14 जुलाई, 2026: ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देना हमेशा से नाबार्ड के विज़न और विकासात्मक दायित्व का मूल आधार रहा है। नाबार्ड के 45वें स्थापना दिवस के अवसर पर ग्रामीण भारत की उद्यमशील क्षमता को नई दिशा देने के उद्देश्य से तैयार किए गए परिवर्तनकारी उद्यमिता विकास कार्यक्रम ‘ग्रामोदयम’ का शुभारंभ नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी के. वी. ने किया।
यह पहल कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के सहयोग से लागू की जा रही है। यह ग्रामीण उद्यमिता के लिए एक सशक्त और जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (आईआईडी) के माध्यम से किया जाएगा।
‘ग्रामोदयम’ ग्रामीण भारत के युवाओं को समर्पित एक विशेष पहल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आकांक्षी उद्यमियों की पहचान करना, उनका मार्गदर्शन करना, उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करना तथा उन्हें सशक्त बनाना है। इसके तहत उन्हें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल, उद्यमिता संबंधी दक्षताएं और आवश्यक सहयोग तंत्र तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।
युवा नवाचारकर्ताओं को उनके विचारों को व्यवहार्य उद्यमों में परिवर्तित करने में सक्षम बनाकर ‘ग्रामोदयम’ का लक्ष्य स्थानीय अवसरों को सतत आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के सशक्त माध्यमों में बदलना है।
यह कार्यक्रम डिजिटल-प्रथम (डिजिटल-फर्स्ट) हाइब्रिड कार्यान्वयन मॉडल पर आधारित है, ताकि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक समान रूप से इसकी पहुंच सुनिश्चित की जा सके। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया सहभागिता, सामुदायिक संपर्क तथा जमीनी स्तर पर जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से इच्छुक उद्यमियों का पंजीकरण किया जाएगा और उन्हें उद्यमिता की एक सुव्यवस्थित यात्रा के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
इस यात्रा में मनोवैज्ञानिक (साइकोमेट्रिक) आकलन, परामर्श, उद्यमिता विकास प्रशिक्षण, उद्योग/व्यवसाय-विशिष्ट प्रशिक्षण, मेंटरशिप तथा उद्यम स्थापना संबंधी सहयोग शामिल होगा। इससे प्रतिभागियों को विचार की परिकल्पना (आइडिएशन) से लेकर सफल उद्यम की स्थापना तक प्रत्येक चरण में समग्र मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त होगी।
पारंपरिक कौशल विकास से आगे बढ़ते हुए, ‘ग्रामोदयम’ एक समग्र सहयोग ढांचा प्रदान करता है, जिसमें व्यावसायिक अवसरों की पहचान, व्यवसाय योजना तैयार करना, उद्यम प्रबंधन प्रशिक्षण, ऋण सुविधा, बाज़ार से जुड़ाव, मेंटरशिप तथा उद्यम की स्थापना के बाद भी निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग (हैंडहोल्डिंग) शामिल है।
यह कार्यक्रम केवल स्वरोज़गार के अवसर सृजित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सतत उद्यम विकास के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और सामुदायिक विकास को गति देने के लिए भी तैयार किया गया है। इस प्रकार, यह समावेशी और सुदृढ़ ग्रामीण आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत पंजीकृत सभी लाभार्थियों का एनएसडीसी के माध्यम से ई-केवाईसी सत्यापन किया जाएगा, जिससे लाभार्थियों की भागीदारी में पारदर्शिता और प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी।
पायलट चरण के दौरान ‘ग्रामोदयम’ का लक्ष्य एक विस्तारयोग्य (स्केलेबल) और चरणबद्ध कार्यान्वयन तंत्र के माध्यम से तीन वर्षों की अवधि में लगभग 4,000 ग्रामीण उद्यमियों को तैयार करने और उन्हें समर्थन प्रदान करने का है।
‘ग्रामोदयम’ की एक प्रमुख विशेषता इसका समग्र ऋण सुविधा (एंड-टू-एंड क्रेडिट फैसिलिटेशन) ढांचा है। कार्यक्रम के प्रतिभागियों को बैंक ऋण के लिए उपयुक्त विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने में विशेषज्ञ सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही, उन्हें नाबार्ड समर्थित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण सहायता प्राप्त करने के लिए आवश्यक संपर्क और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम के तहत डिजिटल ऋण आवेदन में सहायता तथा संबंधित सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों के बारे में मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। इससे औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी और नए उद्यम स्थापित करने में आने वाली वित्तीय बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के कार्यान्वयन की संरचना को एनएसडीसी के डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे लाभार्थियों की प्रगति की रीयल-टाइम निगरानी और ट्रैकिंग संभव होगी। यह निगरानी लाभार्थियों के चयन और जुटाव (मोबिलाइजेशन), प्रशिक्षण, उद्यम की स्थापना से लेकर उसके विकास तक प्रत्येक चरण में की जाएगी।
कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक व्यापक इम्पैक्ट असेसमेंट फ्रेमवर्क विकसित किया गया है, जिसके तहत प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों की निगरानी की जाएगी। इनमें लाभार्थियों का जुटाव, लैंगिक समावेशन, प्रशिक्षण पूर्ण करने की दर, प्रमाणन के परिणाम, जीएसटी एवं उद्यम (UDYAM) पंजीकरण, उद्यमों का संचालन प्रारंभ होना तथा सत्यापित व्यावसायिक अभिलेखों के आधार पर औसत बिक्री प्रदर्शन जैसे मानकों का मूल्यांकन शामिल होगा।
‘ग्रामोदयम’ के माध्यम से नाबार्ड और एनएसडीसी ने उद्यमिता-आधारित ग्रामीण परिवर्तन को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया है। कौशल विकास, मेंटरशिप, डिजिटल नवाचार, वित्तीय सेवाओं तक पहुंच तथा बाज़ार से जुड़ाव को एकीकृत करते हुए यह कार्यक्रम ग्रामीण उद्यमियों की एक नई पीढ़ी तैयार करने का प्रयास करेगा, जो समावेशी विकास को गति देगी, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बनाएगी और भारत की समृद्धि एवं आत्मनिर्भरता की यात्रा में सार्थक योगदान देगी।
यह पहल माननीय प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को साकार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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