भाजपा के लिए ‘तेजपत्ता’ बना वैश्य समाज: चुनाव में उपयोग और बाद में दरकिनार, अभिषेक गोयल ने जताई कड़ी आपत्ति
1 min read
भाजपा के लिए ‘तेजपत्ता’ बना वैश्य समाज: चुनाव में उपयोग और बाद में दरकिनार, अभिषेक गोयल ने जताई कड़ी आपत्ति
खतौली। उत्तर प्रदेश में रविवार को हुए भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में वैश्य समाज की पूर्ण अनदेखी को लेकर समाज में भारी नाराजगी पनप रही है। अखिल भारतीय वैश्य महासंगठन खतौली के नगर अध्यक्ष अभिषेक गोयल एडवोकेट ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा सरकार पर वैश्य समाज का सिर्फ चुनावी इस्तेमाल करने और बाद में दरकिनार करने का गंभीर आरोप लगाया है।
अभिषेक गोयल ने कहा कि भाजपा वैश्य समाज को मूर्ख समझ रही है। चुनाव के समय पार्टी इस समाज का उपयोग ‘वोट और चंदा’ लेने के साथ-साथ दरी बिछाने और झंडा उठाने के लिए करती है। उन्होंने कड़ा तंज कसते हुए कहा, “भाजपा ने वैश्य समाज को ‘तेजपत्ता’ समझ लिया है। जिस तरह स्वाद (जीत) के लिए तेजपत्ते का इस्तेमाल कर उसे बाहर फेंक दिया जाता है, उसी तरह चुनाव जीतने के बाद जब मंत्रिमंडल या पदों की बारी आती है, तो वैश्य समाज को बाहर कर दिया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज अब समझ चुका है कि भाजपा को सिर्फ उनके संसाधनों की जरूरत है, उन्हें सम्मान देने की नहीं।
समाज के नेताओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए गोयल ने कहा कि वैश्य समाज के भाजपा नेता और कार्यकर्ता अब महज अन्य जातियों के मंत्रियों के साथ फोटो खिंचवाने और उनके पीछे झंडा उठाने में ही गर्व महसूस कर रहे हैं, जबकि असल में पूरे समाज के साथ अन्याय हो रहा है। भाजपा ने समाज को इसी भूमिका तक सीमित कर दिया है। उन्होंने भाजपा शीर्ष नेतृत्व से इस रवैये में सुधार कर वैश्य समाज को उसका उचित हक और सम्मान देने की मांग की है।
आगामी चुनावों की ओर इशारा करते हुए अभिषेक गोयल ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि भाजपा ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो पार्टी को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह लगातार हो रही उपेक्षा समाज में गहरी मायूसी और आक्रोश पैदा कर रही है। खतौली सहित पूरे पश्चिमी यूपी का वैश्य समाज अब एकजुट हो रहा है। अगर समाज को उसका सम्मान वापस नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में वैश्य समाज कड़ा फैसला लेने और अपनी उपेक्षा का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बता दें कि 10 मई 2026 को हुए उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय संतुलन साधने के उद्देश्य से 6 नए चेहरों को मंत्री बनाया गया, जबकि दो मंत्रियों को प्रोन्नत किया गया। हालांकि, इस विस्तार में वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व न मिलने से समाज में असंतोष है।


