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May 25, 2026

Suraj Kesari

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जनता पर महंगाई की मार , पेट्रोल 100 के पार.


जनता पर महंगाई की मार , पेट्रोल 100 के पार.

आजकल जब सुबह सोकर उठते हैं. तो सबसे पहले डर यह लगा रहता है किस किस चीज की कीमत बढ़ गई. खासकर पेट्रोल और डीजल पिछले 10 दिनों के भीतर चौथी बार देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमत मैं इजाफा हुआ है. और यह असामान्य और असाधारण तरीके से बढ़ गई है. पेट्रोल और डीजल का बढ़ना सिर्फ अकेले कम्युनिटी का बढ़ना नहीं होता इसका चैन रिएक्शन होता है. कोई भी सप्लाई चैन इससे प्रभावित होती. उधर पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ते हैं उसी हिसाब से महंगाई बढ़ जाती है. आखिरकार लोग सरकार से जानना चाहते हैं की कीमत रोज क्यों बढ़ रही है स्थिति सामान्य क्यों नहीं है हो रही है. मुनाफाखोर तेल कंपनियों पर अंकुश क्यों नहीं है. अब तक साथ रुपए से अधिक पेट्रोल और डीजल के दाम बड़े. अगर सरकार एक साथ बढ़ती तो लोग नाराज होते गुस्सा करते. और लोगों को लगता पॉकेट पर भारी भोज बड़ा है. और अभी ऐसा नहीं कि अब नहीं बढ़ेगा कल सुबह का कोई ठिकाना नहीं है. और यह हालत जब है जब इंटरनेशनल मार्केट में हम स्वीप कर रहे हैं नीचे आ रहे हैं. 95.98 प्रति बैरल के हिसाब से मार्केट में अवेलेबल है. लेकिन यह दावा किया गया कि पेट्रोलियम कंपनी को प्रतिदिन 1000 करोड़ का घाटा हो रहा है. अब सरकार की तरफ से दवा हुआ है तो ठीक ही हुआ होगा. सरकार कहती है तो बात सही होगी. आज एक खबर सुबह अखबार में और छुपी हुई थी. जिसको देखकर मैं हैरान हो गया. देश में जो तेल बेचने वाली कंपनियां है. उनको महेश 3 महीने के भीतर 20000 करोड़ का मुनाफा हुआ है. आप यह कह सकते हैं कि यह तो पहले का था जी नहीं. यह मुनाफा युद्ध शुरू होने के 1 महीने 4 दिन का भी है. युद्ध शुरू हुआ 28 फरवरी लेकिन यह बैलेंस शीट 31 मार्च तक की है. मुनाफे में कोई कमी नहीं आई. रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा. जिओ शामिल नहीं है इसमें. एक तरफ यह मुनाफा कमा रहे हैं. दूसरी तरफ यह इतना रो रहे हैं कि हमें घाटा लग रहा है. या तो बैलेंस शीट झूठी है या दावा झूठा है. यह जो 20000 करोड़ कमाए हैं यह क्या अपनी तिजोरी भरने के लिए कमाए हैं. जनता को राहत कैसे मिलेगी. आप कीमत ना बढ़ाते. बैलेंस शीट पर कोई प्रेशर तो था नहीं. आप ऑलरेडी फायदे में है. इसमें युद्ध का भी एक महीना तीन दिन शामिल है. लेकिन ऐसा लगता है कि कंपनी मुनाफा और बढ़ाना चाहती है. इसलिए सरकारों के माध्यम से जनता प्रेशर में है. इसमें पारदर्शिता का घोर अभाव है. आम जनता के मन में सवाल है कि जब आप मुनाफा कमा रहे हो तो जनता की पॉकेट क्यों काट रहे हो. महंगाई कल में साथ रुपए बढ़ाना इसके बहुत नुकसान है. पूरी अर्थव्यवस्था पर भोज पड़ता है जब पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते हैं. समान महंगे हो जाते हैं दवाइयां महंगे हो जाती है. आम आदमी के इस्तेमाल की चीज महंगी हो जाती हैं. इसमें सभी दुखी होते हैं किसान मजदूर महिलाएं. टिकट के रेट भी ट्रेन में बढ़ जाते हैं. सरकार की मंशा है यह रेट बढ़ाई जाए या फिर यह मनमानी कर रहे हैं. जब सरकार फसती है इन मामलों में तो यह कहती है यह तो कंपनियों का काम है हमारा तो है नहीं. मगर उनकी चिंता करती है सरकार की इनको नुकसान बहुत हो रहा है. आम लोगों का यह मानना है. भाजपा कहती थी कि हम महंगाई घटाने के लिए आए लेकिन यह तो महंगाई बढ़ा रहे हैं. आप तो रोजगार देने के लिए आए हैं आप पेपर लिक कर रहे हैं. आप तो मुनाफाखोरी कर रहे हैं अपने लोगों को. देश ताकतवर कैसे बनेगा. क्या राशन बांटने से देश ताकतवर बनेगा. 70 से ज्यादा परीक्षाओं के पेपर लीक हुए क्या इससे देश ताकतवर बनेगा. नफरत की भाषण देकर देश ताकतवर बनेगा. आम आदमी डरा हुआ है घबराया हुआ है

लेखक शमशाद रशीद माहीगीर

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