इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन ब्रांच मुज़फ़्फ़र नगर द्वारा साइबर क्राइम
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इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन ब्रांच मुज़फ़्फ़र नगर द्वारा साइबर क्राइम , जी ई आर डी बीमारी एवं गुर्दा (किडनी)प्रत्यारोपण विषय पर सेमिनार का आयोजन l
मुजफ्फरनगर 16 फरवरी प्राप्त समाचार के अनुसार गत दिवस
सर्कुलर रोड स्थित आई एम ए भवन में अध्यक्ष डॉ हेमन्त शर्मा के कुशल निर्देशन में एक सतत चिकित्सा शिक्षा (सी॰एम॰ई॰) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका संचालन सचिव डॉ यश अग्रवाल ने किया जिसमें मैक्स हॉस्पिटल पटपड़गंज से पधारे गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ विभु मित्तल ने जी ई आरडी विषय पर व गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ वरुण वर्मा ने गुर्दा प्रत्यारोपण के बारे में विस्तार से आधुनिकतम जानकारियों के बारे में व्याख्यान दिया
l साथ ही आज के कार्यक्रम में साइबर क्राइम पुलिस अधिकारी श्री गौरव चौहान ने भी साइबर क्राइम से बचने हेतु उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कभी भी किसी अनजान के साथ अपना कोई ओ टी पी, पासवर्ड क्रेडिट कार्ड नंबर आदि शेयर न करे न ही कभी कोई अनजान लिंक क्लिक करे और न ही किसी अनजान साइट से कोई सॉफ्ट वेयर डाउनलोड करे। अपने पासवर्ड मुश्किल से मुश्किल बनाये व समय समय पर इसको बदलते रहें l सोश्यल मीडिया से भी सावधान रहने की ज़रूरत है। अपनी व्यक्तिगत जानकारी शेयर करने से बचे। उनके साथ साइबर क्राइम विभाग से श्री राजेंद्र चौधरी भी उपस्थित थे ।
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ विभु मित्तल ने अपने व्याख्यान में बताया कि गैस्ट्रो एसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD), पाचन से जुड़ी एक बीमारी है। इसमें खाना पचाने में मदद करने वाला एसिड खाने की नली की ओर आने लगता है। इसकी वजह से एसिड रिफ्लक्स या पित्त रिफ्लक्स की समस्या होने लगती है। जीईआरडी के सबसे आम लक्षण सीने में जलन और बार-बार खट्टी डकार आना हैं। इसके अलावा, आपको पेट में दर्द, गैस, ब्लोटिंग, मुंह से बदबू या मुंह में खराब स्वाद आना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जीईआरडी की समस्या का मुख्य कारण खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान है। बार-बार एसिड रिफ्लक्स की समस्या होने पर आपको डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। और उचित जाँच आदि कराकर उपचार कराना चाहिए। डॉ वरुण वर्मा ने गुर्दा प्रत्यारोपण पर प्रकाश डाला l
किडनी या गुर्दा रक्त से अतिरिक्त द्रव एवं बेकार के पदार्थों को हटाने का काम करते हैं। जब वे अपनी छानने की क्षमता खो देते हैं तब शरीर में द्रव एवं बेकार के पदार्थों की भारी मात्रा इकट्ठी हो जाती है जिनकी वजह से किडनी काम करना बंद कर देती है
किडनी सामान्य रूप से जितना काम करती है जब उसका सिर्फ एक अंश बराबर ही काम करने लगे तो इसे किडनी की बीमारी का स्टेज ए कहा जाता है। इस स्तर पर जब किडनी पूरी तरह से काम करना बंद कर दे तो या तो मरीज को खून में जमा अपद्रव्यों को बाहर निकालने के लिए नियमित रूप से डायलिसिस कराना पड़ता है या फिर किडनी ट्रांसप्लांट कराना पड़ता है। किडनी ट्रांसप्लांट में एक जीवित या मृत व्यक्ति की किडनी लेकर उस व्यक्ति में लगाई जाती है जिसकी किडनी ने ठीक तरह से काम करना बंद कर दिया है। कुछ परीक्षणों सहित ये एक जटिल प्रक्रिया है किंतु सरलता दर काफ़ी अधिक है l बाद में प्रश्नोत्तर काल में विषय विशेषज्ञों ने उपस्थित चिकित्सकों की शंकाओं का समाधान भी किया ।
सभा में काफ़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित थे जिसमें मुख्य रूप से कोषाध्यक्ष डॉ ईश्वर चंद्रा, मीडिया प्रभारी डॉ सुनील सिंघल, डॉ अशोक कुमार , डॉ आर एन गंगल, डॉ प्रदीप कुमार, डॉ डी एस मलिक, डॉ हरदेश अरोड़ा, डॉ रवींद्र जैन, डॉ सुनील चौधरी, डॉ के डी सिंह नेत्र रोग विशेषज्ञ , डॉ पंकज जैन, डॉ यू सी गौड़, डॉ सुनील गुप्ता, डॉ विनोद कुशवाहा, डॉ पंकज अग्रवाल, डॉ अनिल राठी,डॉ अजय सिंघल, डॉ कुलदीप सिंह चौहान, डॉ नीरज काबरा, डॉ पंकज सिंह, डॉ विपिन गुप्ता, डॉ रूप किशोर गुप्ता, डॉ पी के चाँद , डॉ सुजीत सिंह, डॉ मनेश अग्रवाल, डॉ राजीव काम्बोज, डॉ मनु गर्ग डॉ रेणु अग्रवाल , डॉ पूजा चौधरी, डॉ अनीता शर्मा, डॉ मंजु गुप्ता आदि उपस्थित थे ।
अतुल कुमार का विशेष सहयोग रहा

