अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव नहीं रहे
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अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव नहीं रहे: मीडिया जगत में शोक की लहर
लखनऊ 12 मई प्राप्त दुखद समाचार के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्री के.विक्रम राव का स्वर्गवास हो गया है पूरा मीडिया जगत गम के माहौल में है पूरे मीडिया जगत में शोक की लहर है मिली जानकारी के अनुसार
देश के प्रतिष्ठित वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के.विक्रम राव का आज प्रातः लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनको साँस संबंधी तकलीफ़ के कारण आज सुबह अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली।
डॉ. राव पत्रकारिता के क्षेत्र में दशकों से सक्रिय थे और उन्होंने श्रमजीवी पत्रकारों की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। उनका जीवन संघर्षशील पत्रकारिता, सिद्धांतनिष्ठ विचारों और निर्भीक लेखनी का पर्याय रहा। पत्रकारिता जगत के लिए यह अपूरणीय क्षति है।
*उनका पार्थिव शरीर 703, पैलेस कोर्ट अपार्टमेंट, निकट कांग्रेस कार्यालय, मॉल एवेन्यू, लखनऊ में अंतिम दर्शनार्थ रखा गया है।*
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार को यह वज्राघात सहने की शक्ति दे।
उनका अंतिम संस्कार कल प्रातः 10 बजे भैसाकुंड, लखनऊ में होगा।*
दिलीप सिन्हा
सदस्य
उत्तर प्रदेश मान्यताप्राप्त संवाददाता समिति
UPSACC Condoles the Death of K. Vikram Rao
LUCKNOW, 12 May. About fifteen days before his 87th birthday on 29th May, the President of the Indian Federation of Working Journalists, Shri K Vikram Rao, passed away in a hospital, where he had been admitted for respiratory issues. He was a prolific journalist and wrote in both Hindi and English with equal ease. He was the son of K Rama Rao, who was also an eminent journalist and the founding editor of the National Herald. Shri K Vikram Rao maintained good relationships with politicians of all hues and colours. He is survived by his wife, a medico, two sons, a daughter and grandchildren.
He represented the IFWJ in the Press Council of India for two terms and was a member of the Manisana and Majithia Wage Boards for newspaper and news agency employees. UPSACC has deeply condoled the passing away of Shri Rao on behalf of the organisation as well as on his own.
DILEEP SINHA
MEMBER
Uttar Pradesh Accredited Correspondent Committee
*डॉ. के. विक्रम राव जी के अंतिम संस्कार संबंधी सूचना..*
यह अत्यंत शोक और गहरी वेदना के साथ सूचित किया जा रहा है कि मेरे पूज्य पिताजी, *डॉ. के. विक्रम राव, वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष,* का आज प्रातः लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे कुछ समय से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे, आज प्रातः उन्होंने अपना नश्वर शरीर त्यागकर ब्रह्मपथ की ओर प्रस्थान किया।
पिताजी का जीवन एक साधना का रूप था, जिसमें वे न केवल पत्रकारिता के क्षेत्र में, बल्कि समाज और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते रहे। उनका संघर्ष और समर्पण हमें प्रेरणा देता रहेगा। अब उन्होंने इस लौकिक संसार से पारलौकिक जगत की ओर यात्रा प्रारंभ की है, एक ऐसी यात्रा जो शाश्वत शांति और मोक्ष की ओर अग्रसर है। हम उनकी इस दिव्य यात्रा को श्रद्धा और सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं।
*पिता जी का अंतिम संस्कार कल प्रातः 10 बजे भैसाकुंड, लखनऊ में संपन्न होगा।*
इस दुःख की घड़ी में, हम आपके प्रार्थनाओं के लिए आभारी हैं। कृपया हमें इस कठिन समय में अपनी सहानुभूति और संबल प्रदान करें, ताकि हम इस अपूरणीय क्षति को सहन कर सकें।
के. विश्वदेव राव
(पत्रकार)
9415010300
आज दिनांक 12 .5.2025 को वरिष्ठ पत्रकार केo विक्रम राव जी के निधन से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर छा गई
जिसको एक पत्रकारिता जगत में बड़ी हानि के रूप में देखते हुए राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के सभी पदाधिकारीयों ने स्वर्गीय केo विक्रम राव जी के निधन पर 2 मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की
पत्रकार के. विक्रम राव के निधन से पत्रकारिता जगत मे शोक की लहर
लखनऊ।वरिष्ठ – ख्यातिलब्ध पत्रकार एवं इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के. विक्रम राव के आकस्मिक निधन पर उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन ने गहन शोक व्यक्त किया है।एसोसिएशन के अध्यक्ष हरी ओम शर्मा एवं महामंत्री अब्दुल वहीद ने अपने शोक सन्देश मे कहा कि डॉ. राव पत्रकारिता के क्षेत्र में एक मील के पत्थर के सामान थे।उन्होंने वर्षो -वर्ष तक पत्रकारों एवं पत्रकारिता जगत की सेवा के लिए अपनी सेवाएं अर्पित की।उनका सम्पूर्ण जीवन संघर्षशील,निडर,जनपयोगी एवं सैधन्तिक पत्रकारिता को समर्पित रहा।उन्हें हमेशा सत्य,निस्वार्थ निष्पक्ष,निर्भीक लेखनी के लिए जाना जाता रहेगा।वह एक ऐसे बहुमुखी प्रतिभा के जुझारू व्यक्तिव रहे है कि उनके जाने से रिक्त हुए स्थान की कभी पूर्ति नहीं हो सकती है।
उनके निधन पर उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के कैंट स्थित कार्यालय मे पर 2 मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया गया और उनको श्रद्धांजलि अर्पित की गयी उक्त शोक सभा मे मुख्य रूप से अध्यक्ष पंडित हरिओम शर्मा,चेयरमैन अब्दुल अजीज सिद्दीकी,महामंत्री अब्दुल वहीद,सचिव जुबेर अहमद,तौसीफ हुसैन,अभय अग्रवाल,संजय गुप्ता,भानु प्रताप सिंह,आरिफ़ मुकीम,रामबाबू,सज्जाद रिज़वी अवधेश सोनकर,अमरजीत कुरील सहित कई पत्रकार उपस्थित रहे। दुःखद समाचार…
भारतीय पत्रकारिता जगत ने आज अपना एक स्तंभ खो दिया।
देश के प्रतिष्ठित वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के.विक्रम राव का आज प्रातः लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे साँस संबंधी तकलीफ़ के कारण आज सुबह अस्पताल में भर्ती कराए गए थे, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली।
डॉ. राव पत्रकारिता के क्षेत्र में दशकों से सक्रिय थे और उन्होंने श्रमजीवी पत्रकारों की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। उनका जीवन संघर्षशील पत्रकारिता, सिद्धांतनिष्ठ विचारों और निर्भीक लेखनी का पर्याय रहा।
*उनका पार्थिव शरीर 703, पैलेस कोर्ट अपार्टमेंट, निकट कांग्रेस कार्यालय, मॉल एवेन्यू, लखनऊ में अंतिम दर्शनार्थ रखा गया है।* पत्रकारिता जगत के लिए यह अपूरणीय क्षति है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार को यह वज्राघात सहने की शक्ति दे।
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स IFWJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ट्रेड यूनियन जगत के जुझारू पत्रकार के. विक्रम राव जी के निधन की सूचना अत्यंत कष्टकारी है। वे मीडियाकर्मियों के हितों के लिए जीवन भर संघर्षरत रहे। यूनियन लीडर होने के साथ साथ अंतिम समय तक लेखनी चलाते रहे। यूनियन मूवमेंट को लेकर वे हमेशा चिंतित रहते थे। हम लोगों की यूनियन NUJ के साथ भी उनका सतत संवाद रहता था। उनके निधन से पत्रकारिता जगत और मीडिया में ट्रेड यूनियन मूवमेंट को बड़ी क्षति हुई है,इसे पूरा करना असंभव है। ईश्वर से प्रार्थना है कि राव साहब की आत्मा को सद्गति प्रदान करे। परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। ॐ शांति। विनम्र श्रद्धांजलि।
सर्वेश कुमार सिंह
अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (उपज)
डॉक्टर के विक्रम राव के निधन से पत्रकारिता के एक युग का अंत हो गया 1 मई को प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में आदरणीय राव साहब बीमार होने के बाद आए और मैं काफी देर तक उनके पास में बैठा रहा बातचीत हुई उनका एक अलग अंदाज था पत्रकार हितों के लिए चिंतित भी रहते थे इसका उदाहरण 1 मई को जब वह प्रेस क्लब में आए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आदरणीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर सिंह थे उन्होंने मुझसे उनके बारे में जानकारी मांगी जो उपलब्ध कराई गई राव साहब ने माननीय मंत्री जी से अनुरोध किया पत्रकारों की चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित कर दें उन्होंने कहा मैं तो एक रेलवे अधिकारी का पति हूं मुझे इलाज की पूरी सुविधाएं मिल रही है लेकिन दूसरे पत्रकारों को ऐसी सुविधा नहीं है आप मुख्यमंत्री जी से पत्रकारों के बेहतर इलाज के लिए बात करें अन्य कई बातें उन्होंने माननीय मंत्री से पत्रकार के हितों को लेकर कही उनकी पूरे देश में शोहरत थी और सबसे अच्छी क्वालिटी जो पत्रकारों में नहीं दिखाई देती वह यह थी की अखबार पढ़ते ही अगर आपकी कोई स्टोरी उनको अच्छी लगी तो तत्काल फोन करके वह बधाई देते थे अपना आशीर्वाद देते थे यह उनका सबसे और अलग अंदाज था जो पत्रकारों के लिए एक प्रोत्साहन और जज्बा पैदा करता था मेरे बीच नहीं रहे लेकिन उनके जज्बे को पत्रकारिता जगत हमेशा याद करेगा मुझे नहीं पता था की 1मई मजदूर दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में राव साहब से मेरी अंतिम मुलाकात होगी मैं बड़े दावे के साथ कह सकता हूं कि पूरे देश में अगर उत्तर प्रदेश की धरती से किसी एक पत्रकार को पूरा मीडिया जगत जानता है तो वह थे आदरणीय के विक्रम राव साहेब मैं पिछले काफी दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों का भ्रमण किया और जब भी बाहर जाता था राव साहब के बेटे विश्व देव राव से पूछता था की भाई कर्नाटक जा रहा हूं केरला जा रहा हूं तमिलनाडु जा रहा हूं आंध्र प्रदेश जा रहा हूं पश्चिम बंगाल जा रहा हूं और बहुत सारे राज्यों में जहां मैं जाता था उनसे पूछता था किसी वरिष्ठ पत्रकार का मोबाइल नंबर दो और मुझे मोबाइल नंबर मिलते थे और जब भी मैं राव साहब के रेफरेंस फोन करता था कोई भी राज्य हो विशेष कर दक्षिण राज्यों में बहुत सम्मानजनक रिस्पांस मिलता था और जब भी मैं वहां जाता था तो वरिष्ठतम पत्रकार पूरा सम्मानदेते थे जो चाहता था उसमें पूरा सहयोग करते थे डाटा हो या ऐतिहासिक घटनाक्रम हो तथ्यों के साथ उपलब्ध कराते थे यही नहीं कई स्थानों पर उनके साथ यात्रा भी की और हर पत्रकार राव साहब के साथ अपनी मुलाकातों का जिक्र करता कई वरिष्ठतम पत्रकारों के आवास पर भी दक्षिण भारत के राज्यों में गया राव साहब के साथ चित्र भी उनके ड्राइंग रूम में लगे थे राव साहब इस उम्र में इतने सक्रिय की हर दिन उनका पोस्ट तथ्यों के साथ इतिहास के पन्नों से व्हाट्सएप ग्रुप में पढ़ने को मिलता था ऐसे ऐसे तथ्य और अनुभव अपनी लेखनी में साझा करते थे जो आपको पुस्तकों में नहीं मिलेंगे अभी एक दिन पहले ही एक फोटो आई थी जिसमें राव साहब बेटे के साथ आदरणीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मिलकर अपनी पुस्तक भेंट किए हैं बहुत सक्रिय थे राव साहब के नेतृत्व में वर्ष 2000 में श्रीलंका के एक हफ्ता यात्रा भी की थी बहुत सुखद और यादगार यात्रा थी आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके व्यक्तित्व की छाप हमेशा जीवन में बनी रहेगी उनके साथ बिताए समय और समय-समय पर मिलता रहा आशीर्वाद हमेशा याद रहेगा ऐसे महान शख्सियत को प्रभु अपने चरणों में स्थान दे और परिवार को इस दुख की घड़ी में सहनशक्ति की अपार क्षमता दे ओम शांति
आसमान से चमकेगा भारतीय पत्रकारिता जगत का जगमगाता सितारा
पत्रकारिता जगत को रोशन करके एक नए युग का प्रारंभ करने वाले के विक्रम राव का निधन हम सबके लिए बेहद कष्टकारी है, डॉ. राव पत्रकारिता के क्षेत्र में दशकों से सक्रिय थे और उन्होंने श्रमजीवी पत्रकारों की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। उनका जीवन संघर्षशील पत्रकारिता, सिद्धांतनिष्ठ विचारों और निर्भीक लेखनी का पर्याय रहा। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट IFWJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ जहां एक तरफ उन्होंने विश्व भर के पत्रकारों को एकजुट करके संगठनात्मक ढांचे में लाने का प्रयास किया गया तो वही उत्तर प्रदेश के हर छोटे बड़े पत्रकारों को अपना सानिध्य और मार्गदर्शन देकर पत्रकारिता की सही दिशा और दशा दिखाने का हमेशा प्रयास किया गया। जिस तरह एक सिपाही जंग के मैदान में ही वीरगति प्राप्त करना चाहता है ठीक उसी तरह के विक्रम राव का कलम कभी रुका नहीं और अपनी लंबी बीमारी के दौरान भी प्रतिदिन उनके द्वारा स्वर्णिम अक्षरों के लेख लिखे जाते रहे और समस्त पत्रकार बिरादरी के लिए अत्यंत गर्व की बात है की जीवन चक्र समाप्ति से पहले भी उनके लिखे को समाचार पत्रों में प्रकाशित किया गया भारत-पाकिस्तान के युद्ध को जिस तरह से उन्होंने अपनी कलम के माध्यम से अनोखा दृष्टांत दिखाते हुए लिखा वह आने वाली मीडिया के लिए यादगार बन गया है
कलम न रूकती है और न ही टूटती है , के विक्रम राव का परिवार इसका जीवंत उदाहरण है जहां पीढ़ी दर पीढ़ी कलम अपना अस्तित्व और अपना रंग दिखाती रहती है, भले ही आज पत्रकारिता जगत के एक मजबूत स्तंभ के जीवन चक्र का अंत हुआ है लेकिन उनकी लेखनी उनके जीवन के अमरत्व को दर्शाती रहेगी और जिस तरह अपने पिताजी के जीवन चक्र समाप्ति के उपरांत के विक्रम राव का नाम पत्रकारिता जगत में चमकता रहेगा वैसे ही उनकी अगली पीढ़ी अपने पिता से मिले गुणों से समाज को जाग्रत करने का काम करते रहेंगे। के विक्रम राव के अंतिम समय मे सेवा करते रहे उनके पुत्र के विश्वदेव राव का नाम भी भविष्य में अपने पिता द्वारा लिखी पुस्तकों और उनके कार्यकलापो को आगे बढ़ाने में दिखता रहेगा।
विश्व के पत्रकारों को एकजुटता और संगठन ढांचे में ढालने का कार्य के विक्रम राव द्वारा IFWJ संगठन से किया गया और उनके पुत्र द्वारा बचपन से ही अपने पिता के साथ रहकर पत्रकारिता के हर दांव में दक्षता हासिल की गयी है और आने वाले भविष्य में के विक्रम राव की कलम भी अपने पिता के नामों को उज्जवल करती हुई चलती रहेगी और के विक्रम राव द्वारा लिखी 13 पुस्तको का विमोचन पूरी भव्यता से कराया जायेगा क्योंकि ये पुस्तकें नहीं बल्कि पत्रकारिता के लिए धर्मग्रंथ होगा जिसको के विक्रम राव ने अपने जीवन काल में कलमबद्ध किया गया है।
शेखर पंडित
9415922005
सदस्य राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त समिति
शोक सन्देश
देश के प्रख्यात व इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (आईएफडब्ल्युजे) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पत्रकारिता क्षेत्र में ट्रेड यूनियन के जुझारू पत्रकार डा. के. विक्रम राव जी का निधन हो गया है यह सूचना बहुत पीड़ादायक है। उनके निधन पर उप्र मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति शोक प्रकट करती है।
डा. राव पत्रकार हितों के लिए आजीवन जीवन संघर्ष करते रहे। पत्रकार यूनियन नेता होने के साथ-साथ अनवरत उनकी लेखनी चलती रही। देश के भीतर पत्रकारिता क्षेत्र में काम कर रही यूनियनों को लेकर वह लगभग सभी से चर्चा भी करते और आपसी संवाद भी रखते थे। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की गतिविधियों पर वह नजर बनाए रखते और बीच-बीच में जानकारी भी प्राप्त करते थे। ऐसे में पत्रकारिता और यूनियन मूवमेण्ट क्षेत्र में अपूर्णीय क्षति हुई है। डा. राव साहब के न रहने है उस रिक्त की पूर्ति कर पाना कठिन होगा।
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति भगवान से प्रार्थना करती है कि उनकी पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में सुखद स्थान दें।
भारत सिंह
सचिव
श्रद्धांजलि: के. विक्रम राव सर— कलम के सच्चे प्रहरी
वरिष्ठ पत्रकार, विचारक और श्रमजीवी पत्रकार संघ के मजबूत स्तंभ के. विक्रम राव का निधन पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे न केवल एक निर्भीक और स्पष्टवादिता से भरपूर लेखक थे, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने कलम को सामाजिक चेतना का माध्यम बनाया।
उनकी लेखनी में तथ्य, दृष्टि और संवेदना का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता था। चाहे वह राजनीतिक विहंगम दृष्टि हो या सामाजिक विसंगतियों पर गहरी चोट—राव साहब ने हमेशा जनता के पक्ष में, सत्ता से सवाल करने की परंपरा को जीवित रखा। उनका हर लेख विचारों की लौ जलाने वाला और पाठकों को चिंतन के लिए विवश कर देने वाला होता था।
उनका जाना केवल एक पत्रकार का जाना नहीं है, बल्कि उस जुझारूपन, उस ईमानदारी और उस निर्भीकता का अवसान है, जो आज के समय में और भी दुर्लभ होती जा रही है। वे आज भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, परंतु उनकी लेखनी, उनके विचार और उनके शब्दों की शक्ति हमें सदैव मार्गदर्शन देती रहेगी।
उनकी स्मृति को नमन।
शाश्वत तिवारी
श्रद्धा स्मरण/ डाॅ. के. विक्रम राव
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हम न मरब मरिहैं संसारा….
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-रतिभान त्रिपाठी
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फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना।
अजल क्या है खुमार-ए-बादा-ए-हस्ती उतर जाना।।
पंडित ब्रज नारायन चकबस्त का यह शेर अपनी जगह दुरुस्त है लेकिन इसके बरक्स डॉ. के. विक्रम राव की हस्ती बरकरार है। शब्द ब्रह्म होता है और अक्षर अजर अमर अविनाशी। के. विक्रम राव साहब ने अक्षर-अक्षर शब्द रचे हैं। वह अक्षर वह शब्द कभी मिटेंगे नहीं। भौतिक शरीर तो एक न एक दिन छूटता ही है लेकिन किसी ने जो रचा होता है, वही उसकी कीर्ति बनकर उसे अमरता प्रदान करता है। इसीलिए तो युगदृष्टा कबीर ने कहा है – हम न मरब मरिहैं संसारा…।
सत्तासी साल की उम्र में भी राव साहब हर रोज बिना नागा कुछ न कुछ लिखते रहे हैं, कुछ न कुछ रचते रहे हैं। उनके विचारों, उनकी लेखनी से कोई असहमत हो सकता है लेकिन उसे खारिज नहीं कर सकता है। राव साहब इस उम्र में लखनऊ के इकलौते पत्रकार रहे हैं जो हर रोज लिखते रहे हैं। उनके लेखन में धार रहती रही है, दिशा और दृष्टि भी।
पत्रकारिता उन्हें विरासत में मिली थी। उनके पिता के. रामाराव नेशनल हेराल्ड के संस्थापक संपादक रहे हैं। तेलुगूभाषी दक्षिण भारतीय ब्राह्मण थे राव साहब लेकिन पत्रकार और लेखक के रूप में उन्होंने मुख्य रूप से अंग्रेजी और हिंदी में अपनी कलम का जौहर दिखाया है। इधर हिंदी में वह हर रोज आलेख लिखते थे तो पढ़ने का चाव होता रहा है। वाक्य विन्यास और शब्द प्रयोग की चाशनी में लिपटे उनके आलेख किसी भी पाठक को सम्मोहित करते थे। अंग्रेजी के अनेक शब्द उन्होंने हिंदी में ऐसे अनूदित किए मानो वह मूल शब्द हो। जैसे हम अक्सर बोलचाल में ‘बाॅडी लैंग्वेज’ कहते हैं लेकिन राव साहब ने इसे हिंदी में हमेशा ‘अंग भाषा’ लिखा। उनकी रचनात्मक लेखनी में ऐसे हीअनेक गुण समाहित हैं।
राव साहब पत्रकार थे, पत्रकार नेता थे, लेखक थे और राजनेताओं के बीच अपनी लेखनी की बदौलत लोकप्रिय रहे हैं। उनके परिवार में उनके दो पुत्र एक पुत्री और पत्नी डॉ. सुधा राव हैं। साधन संपन्नता के बावजूद वह अपने को सदा श्रमजीवी मानते रहे हैं और वैसा ही व्यवहार करते रहे हैं। उनके पिता संपादक के साथ साथ सांसद भी रहे हैं। उनके भाई और परिवार के सदस्य खासे ओहदेदार रहे हैं लेकिन राव साहब में ऐसा कोई गुमान नहीं था। वह जूनियर मोस्ट पत्रकारों को भी ‘जी’ लगाकर संबोधित करते थे। ऐसी थी उनकी विनम्रता।
वह आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में देश विदेश में प्रख्यात रहे हैं। जुझारू, संघर्षशील जैसे शब्द उन बिल्कुल फिट होते हैं। पत्रकार हितों के लिए वह आजीवन लड़ते रहे, उनकी चिंता करते रहे हैं।
उनसे मेरा जुड़ाव तो बीस पच्चीस बरसों से ही रहा है लेकिन लखनऊ की पत्रकारिता में राव साहब लगभग साठ पैंसठ बरस से अपरिहार्य रहे हैं। पिछले वर्षों में मैं जब हेमवती नंदन बहुगुणा नामक ग्रंथ का संपादन कर रहा था तो राव साहब से आलेख मांगा। बहुगुणा जी पर उन्होंने ऐसा आलेख लिखा जो केवल वही लिख सकते थे। राव साहब जब अधिक अस्वस्थ रहने लगे तो मैं सिर्फ टेलीफोन पर उनसे बातें करता था। उम्रदराज होने के बावजूद जिज्ञासा प्रति जिज्ञासा उनमें रची बसी लगती थी। अस्वस्थता की स्थिति में भी उनकी हंसी में ऐसी खनक होती थी मानो उन्हें कुछ हुआ ही न हो। यह उनके आत्मविश्वास और आत्मबल का प्रमाण है।
राव साहब का व्यक्तित्व और व्यवहार ऐसा था कि बड़े-बड़े राजनेता राव साहब से संपर्क रखते हुए अपने को धन्य मानते थे। न जाने कितने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल उनकी लेखनी के प्रशंसक रहे हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी भी राव साहब का बहुत सम्मान करते हैं।
राव साहब लंबे समय से अस्वस्थ थे। उन्हें किडनी में समस्या थी। हफ्ते में दो दिन डायलिसिस हो रही थी लेकिन जिजीविषा ऐसी कि काल को मात देते हुए वह न केवल निरंतर लिखते रहे बल्कि कार्यक्रमों में शामिल होते रहे, और तो और कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं। अभी छह महीने पहले पत्रकारों का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम वृंदावन में हुआ था तो राव साहब दो दिन लगातार इतने सक्रिय रहे, मानो कोई युवा हो। उनकी सक्रियता का आलम यह था कि अभी परसों ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मिलने गए थे। अपनी दो पुस्तकें भी उन्हें भेंट की थीं। उनकी 13 पुस्तकों का विमोचन प्रस्तावित था।
लेकिन ईश्वर की नियति कुछ और ही थी। आज सुबह उनकी तबियत बहुत बिगड़ गई। उनके सुपुत्र के. विश्वदेव राव अस्पताल ले गए लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। के. विक्रम राव का जाना भारतीय पत्रकारिता की अपूरणीय क्षति है। पत्रकार समुदाय ही नहीं, उनके लेखों के लाखों पाठक भी उनके निधन से मर्माहत हैं। अभी कल उनका आलेख आया। मैंने प्रतिप्रश्न करते हुए कुछ जिज्ञासाओं को शांत करने का आलेख लिखने की उनसे अपेक्षा की थी। काश! नियति ने उन्हें कुछ समय और दिया होता तो शायद वह उन जिज्ञासाओं का समाधान भी दे पाते। श्रमजीवी पत्रकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले महायोद्धा के. विक्रम राव भले ही सशरीर हमारे बीच अब नहीं रहे लेकिन उनकी लेखनी, उनके विचार और उनका व्यक्तित्व हम सबके लिए सदैव प्रेरणादाई और मार्गदर्शक रहेगा। इन्हीं चंद शब्दों के साथ मैं अपने प्रिय लेखक, अग्रज, मनीषी और ऋषितुल्य राव साहब को अश्रुपूरित नेत्रों से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
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वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के. विक्रम राव जी के निधन का दुःखद समाचार पत्रकारिता जगत के साथ मेरे लिए भी अपूर्णीय क्षति है।ईश्वर पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे।ईश्वर शोक संतप्त परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति दे।
विनम्र श्रद्धांजलि
हेमंत मैथिल
एसोसिएट एडिटर
विख्यात पत्रकार एवं IFWJU के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर के वक्रम राव के निधन की खबर समूचे पत्रकारिता जगत के लिए एक पक्षाघात जैसा है। देश की पत्रकारिता के लिए अपूरणीय क्षतिहै। पत्रकार और पत्रकारिता के लिए उनका जीवन पर्यंत संघर्ष उनकी जीवंतता का एक सटीक उदाहरण है। जो कभी विस्मृत होने वाला नहीं है। वह पत्रकारिता के इतिहास पुरुष है। मैं उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना कि उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें और उनके परिवार को यह असहनीय पीड़ा सहन करने का साहस प्रदान करें।
प्रेम शंकर अवस्थी वरिष्ठ पत्रकार राज्य मुख्यालय लखनऊ , दैनिक सूरज केसरी के मान्यता प्राप्त राज्य मुख्य पत्रकार सैयद मुजम्मिल हुसैन एवं दैनिक सूरज केसरी समाचार पत्र परिवार ने स्वर्गीय के विक्रम राव साहब को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एवं उनके परिवार को इस असहनीय दुःख सहन करने की ईश्वर से प्रार्थना की है
