बिहार को मिला हाई-स्पीड कॉरिडोर का बड़ा तोहफ़ा
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बिहार को मिला हाई-स्पीड कॉरिडोर का बड़ा तोहफ़ा
कैबिनेट ने मोकामा–मुंगेर खंड के 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड मार्ग के निर्माण को दी मंजूरी
(गोरखपुर से वरिष्ठ पत्रकार उमेश तिवारी की विशेष कवरेज)
गोरखपुर, 10 सितम्बर 2025 : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने बिहार को बड़ा तोहफ़ा देते हुए बक्सर-भागलपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के मोकामा–मुंगेर खंड के निर्माण को मंजूरी प्रदान कर दी। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युइटी मोड (एचएएम) पर लागू होगी। कुल 82.4 किलोमीटर लंबे इस खंड के निर्माण पर 4,447.38 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
औद्योगिक और क्षेत्रीय महत्व
यह खंड मोकामा, बड़हिया, लखीसराय, जमालपुर और मुंगेर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शहरों से होकर गुजरेगा या उन्हें सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। यह इलाके लंबे समय से औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं और अब तेज़ रफ्तार सड़क नेटवर्क से इन्हें नया आयाम मिलेगा।
मुंगेर–जमालपुर–भागलपुर क्षेत्र : यहाँ आयुध कारखाना, प्रस्तावित रक्षा मंत्रालय का आयुध गलियारा और जमालपुर स्थित लोकोमोटिव वर्कशॉप पहले से मौजूद हैं। साथ ही मुंगेर में आईटीसी जैसी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां इस क्षेत्र की औद्योगिक पहचान को मज़बूत कर रही हैं।
भागलपुर : सिल्क और वस्त्र उद्योग के लिए विश्वविख्यात शहर अब वस्त्र इको-सिस्टम और लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
बड़हिया : यह क्षेत्र खाद्य पैकेजिंग, प्रसंस्करण और कृषि-गोदाम गतिविधियों का नया केंद्र बन रहा है।
इन सबके चलते आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर पर माल ढुलाई और यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना है। नई सड़क इन गतिविधियों को गति देगी और कारोबारियों व किसानों दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।
तेज़ और सुरक्षित सफ़र
यह हाई-स्पीड कॉरिडोर 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड होगा, जिस पर टोल टैक्स प्रणाली लागू होगी। सड़क को 100 किलोमीटर प्रति घंटा की डिज़ाइन स्पीड पर बनाया जाएगा, जिससे वाहनों की औसत गति 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक संभव होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मोकामा से मुंगेर के बीच यात्रा का समय लगभग डेढ़ घंटे तक घट जाएगा।
यह न केवल यात्रियों को तेज़ और सुरक्षित सफ़र देगा बल्कि मालवाहक वाहनों को भी निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। बिहार के छोटे और बड़े शहरों के बीच बेहतर संपर्क से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान मिलेगी।
रोजगार और विकास के अवसर
परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से लगभग 14.83 लाख मानव-दिवस का रोजगार और अप्रत्यक्ष रूप से 18.46 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इतना ही नहीं, कॉरिडोर बनने के बाद इसके आसपास बढ़ने वाली औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां हजारों नए अवसर और खोलेंगी।
पूर्वी बिहार की कनेक्टिविटी में क्रांति
कैबिनेट की मंजूरी से पूर्वी बिहार को एक आधुनिक और तेज़ रफ्तार परिवहन व्यवस्था का तोहफ़ा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग से कृषि उपज, सिल्क उत्पाद और औद्योगिक सामानों की ढुलाई आसान हो जाएगी। इससे न केवल स्थानीय उद्योगों को बल मिलेगा बल्कि राज्य का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ाव और मजबूत होगा।
सरकार का यह कदम बिहार की विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। सड़क बुनियादी ढांचे में यह निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा और आने वाले वर्षों में पूर्वी भारत के औद्योगिक मानचित्र को बदलने की क्षमता रखता है।(गोरखपुर से वरिष्ठ पत्रकार उमेश तिवारी की विशेष कवरेज)


