लखनऊ में ‘बृज की रसोई’ का आयोजन
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लखनऊ में ‘बृज की रसोई’ का आयोजन
दिवंगत विश्वास राज शुक्ला की स्मृति में जरूरतमंदों को मिला निःशुल्क भोजन
लखनऊ (आशियाना), 31 अगस्त 2025।
मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और इसी सोच को केंद्र में रखकर इंडियन हेल्पलाइन सोसाइटी (रजि.) द्वारा रविवार को आशियाना क्षेत्र में ‘बृज की रसोई’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष सेवा कार्य को दिवंगत विश्वास राज शुक्ला की पावन स्मृति को समर्पित किया गया। आयोजन प्रेरणास्रोत बाबा नीम करौली जी की असीम कृपा और संस्था के संस्थापकों एवं सदस्यों के अथक प्रयासों से संभव हो सका।
श्रद्धांजलि के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वास राज शुक्ला की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर और मौन रखकर श्रद्धांजलि देने के साथ किया गया। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक विपिन शर्मा ने कहा कि यह आयोजन न केवल दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देने का माध्यम है, बल्कि समाज को यह संदेश देने का भी प्रयास है कि भूखों को भोजन कराना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने कहा कि हर इंसान यदि अपनी क्षमता के अनुसार थोड़ा-सा योगदान करे, तो समाज से भुखमरी और निराशा जैसी समस्याओं का समाधान संभव है।
कई क्षेत्रों में हुआ भोजन वितरण
संस्था के सदस्य आदित्य शुक्ला ने बताया कि भोजन वितरण के लिए स्वयंसेवक आशियाना क्षेत्र के चिन्हित इलाकों में गए। इनमें सेक्टर-एम रिक्शा कॉलोनी, रतन खंड, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पास की झुग्गियाँ, निर्माणाधीन भवनों में कार्यरत श्रमिकों के अस्थायी आवास, नगर निगम जोन-8 की मलिन बस्तियाँ और रतनखंड पानी टंकी प्रमुख स्थान रहे। इन क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों, बुजुर्गों और बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया गया।
गरीबों और बच्चों के चेहरों पर खिला संतोष
मीडिया प्रभारी दीपक भुटियानी ने बताया कि आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में गरीब, असहाय और निराश्रित लोग भोजन ग्रहण करने पहुंचे। बच्चों और बुजुर्गों के चेहरे पर भोजन पाकर जो संतोष दिखाई दिया, वही इस सेवा कार्य की सबसे बड़ी सफलता थी। सामाजिक कार्यकर्ता राजीव पाण्डेय ने कहा कि जब जरूरतमंद व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान आती है, तो स्वयंसेवकों को भी आत्मिक संतोष का अनुभव होता है।
सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
कार्यक्रम में शामिल संस्था सदस्य पंकज राय ने कहा कि भूखे को भोजन कराना ही सबसे बड़ा धर्म है। यह आयोजन दिवंगत विश्वास राज शुक्ला की स्मृति को जीवित रखते हुए समाज में मानवीय मूल्यों को जीवित रखने का संदेश देता है। विकास पाण्डेय ने बताया कि भोजन वितरण के उपरांत सभी उपस्थित लोगों ने मिलकर राष्ट्र की प्रगति, समाज की खुशहाली और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की।
दानदाताओं और स्वयंसेवकों का आभार
संस्था के सक्रिय सदस्य आशीष श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने वाले सभी दानदाताओं और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि मानवता की सेवा में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। उनके शब्दों में— “एक छोटा-सा दान भी बड़ा बदलाव ला सकता है।”
समाज की भागीदारी से बनी मिसाल
इस अवसर पर सुष्मिता शर्मा ने बताया कि आयोजन में आदित्य शुक्ला, राजेन्द्र कुमार शुक्ला, पंकज राय, राजकुमार शुक्ला, सतीश जुगरान, आयुष शुक्ला, दीपक भुटियानी, यशस्वी शुक्ला, रामचन्द्र यादव, राजीव पाण्डेय, अखिलेश सिंह, विकास पाण्डेय, अतुल यादव, आशीष श्रीवास्तव, मुकेश कनौजिया, नवल सिंह और गोविन्द सिंह ठाकुर सहित वैष्णवी शुक्ला और स्वयं सुष्मिता शर्मा सक्रिय रूप से मौजूद रहे। सभी ने मिलकर जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया और समाज सेवा की इस मिसाल को जीवंत बनाया।
मानवता की मिसाल बना आयोजन
पूरे आयोजन के दौरान आशियाना क्षेत्र की गलियों और बस्तियों में जब स्वयंसेवक भोजन लेकर पहुंचे, तो वहां का माहौल मानो बदल गया। छोटे-छोटे बच्चे थाली में भोजन पाकर प्रसन्न दिखाई दिए, बुजुर्गों के चेहरे पर संतोष की मुस्कान झलकने लगी और श्रमिक परिवारों को भी राहत महसूस हुई। भोजन वितरण के इस क्षण ने यह साबित कर दिया कि यदि समाज संगठित होकर काम करे तो किसी भी भूखे पेट को खाली नहीं रहना पड़ेगा।
‘बृज की रसोई’ का यह आयोजन केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज में सेवा, करुणा और सहयोग की नई चेतना भी जगाई। यह कार्यक्रम न केवल दिवंगत विश्वास राज शुक्ला की स्मृति को श्रद्धांजलि था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश भी कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
इस तरह लखनऊ के आशियाना क्षेत्र में हुआ यह आयोजन सेवा, समर्पण और सहानुभूति की अद्वितीय मिसाल बन गया। इसमें शामिल हर स्वयंसेवक और दानदाता ने यह साबित कर दिया कि यदि समाज एकजुट हो, तो जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाना कठिन नहीं है।
