अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर नज्म मुजफ्फरनगरी के बारे में विस्तृत लेख और समाचार
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अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर नज्म मुजफ्फरनगरी के बारे में विस्तृत लेख और समाचार
राशिद खान राजा नगर संवाददाता दैनिक सूरज केसरी समाचार पत्र ने लिया साक्षात्कार, मुज़फ्फरनगर 14 सितंबर प्राप्त समाचार के अनुसार
मुज़फ्फरनगर की सरज़मीं साहित्य, कला और संस्कृति की गहरी परंपराओं से सजी रही है। इसी धरती ने कई महान कवियों और लेखकों को जन्म दिया है। इन्हीं में से एक नाम है नजमुल इस्लाम ‘नज्म’, जिन्हें साहित्यिक जगत में नज्म मुजफ्फरनगरी के नाम से जाना जाता है। अपनी ग़ज़लों और शायरी की वजह से उन्होंने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
शिक्षा और साहित्यिक पृष्ठभूमि
नज्म ने उच्च शिक्षा के रूप में एम.ए. बी.एड. और बी.ए. (उर्दू) की पढ़ाई की। शिक्षा के साथ ही साहित्य के प्रति उनका गहरा लगाव बचपन से ही रहा। उन्होंने शब्दों को अपनी ज़िंदगी का आईना बनाया और कलम को साधन। उनकी रचनाओं में जीवन का अनुभव, समाज की सच्चाई और इंसानियत की झलक साफ दिखाई देती है।
पुरस्कार और सम्मान
नज्म को अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें उर्दू रतन अवॉर्ड, अब्र अहसानी अवॉर्ड दिल्ली, हकीम मोहम्मद अहमद अवॉर्ड सहारनपुर, महान शायर अवॉर्ड और मीर अनीस अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है। इसके अलावा उन्हें ग्लोबल राइटर्स एसोसिएशन, इटली से भी सम्मानित किया गया।
प्रकाशित कृतियाँ
उनकी साहित्यिक यात्रा केवल मुशायरों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कई पुस्तकें भी प्रकाशित की हैं, जिनमें “इश्क-ए-ख़ुदा”, “अक्स-ए-जमाल” और “ग़ज़ल नामा” प्रमुख हैं। इन कृतियों को न केवल भारत में बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और यूरोप के उर्दू पाठकों ने भी खूब सराहा है।
मुशायरे और कवि सम्मेलन
नज्म की पहचान एक ऐसे शायर की है, जिसने देश-विदेश के तमाम मंचों पर अपनी ग़ज़लों और शायरी से लोगों का दिल जीता है। वे ऑल इंडिया रेडियो दिल्ली, चंडीगढ़ और जालंधर के अलावा दूरदर्शन और हरियाणा उर्दू एकेडमी के कार्यक्रमों में भी शिरकत कर चुके हैं।
उन्होंने देश के लगभग सभी बड़े मुशायरों और कवि सम्मेलनों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। मेरठ विश्वविद्यालय, नौचंदी मुशायरा मेरठ, खाटौली, मुज़फ्फरनगर और चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के मंच उनकी शायरी की गवाही देते हैं।
अंतरराष्ट्रीय पहचान
नज्म की ग़ज़लें न केवल भारत की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं और मैगज़ीनों में भी छपीं। महकता आँचल, पाकीज़ा आँचल, रूह-ए-शोभा, सरिता, रीह्नुमा, तालीम, जरीअम शमा जैसी पत्रिकाओं में उनकी ग़ज़लें प्रकाशित हुईं।
उन्होंने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अन्य देशों की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में भी अपने कलाम से जगह बनाई। इससे उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय शायर का दर्जा मिला।
पत्र-पत्रिकाओं से सराहना
नज्म की रचनाओं को कई राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं ने भी सराहा। दैनिक भास्कर, दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, हिंदुस्तान डेली, इंडिया इन इंडिया, साक्षी, जागरण और शाह टाइम्स जैसे अखबारों में उनकी ग़ज़लें और कहानियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं।
उनकी हिंदी कहानियाँ “गुमराह” और “आदमी की जीत” को भी व्यापक पाठक वर्ग ने पसंद किया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंज
नज्म ने ऑनलाइन मंचों के ज़रिये भी अपनी ग़ज़लों को दुनिया भर के पाठकों तक पहुँचाया। उन्होंने Urdustan Mehfil और अन्य साहित्यिक पोर्टल पर अपनी शायरी प्रस्तुत की, जिसे भारत के साथ-साथ यूरोप, अमेरिका और मध्य-पूर्व में भी पाठकों ने खूब पसंद किया।
जीवन और व्यक्तित्व
नज्म का व्यक्तित्व विनम्र और सादगी से भरा हुआ है। उनका मानना है कि साहित्य का मकसद समाज को जागरूक करना और इंसानियत का पैग़ाम देना है। वे उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी तीनों भाषाओं में दक्ष हैं। शतरंज खेलना उनका प्रिय शौक है, लेकिन उनकी असली रुचि कलम और काग़ज़ में ही बसी है।
आज नज्म मुजफ्फरनगरी न केवल मुज़फ्फरनगर बल्कि पूरे देश का गौरव हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि जुनून और मेहनत हो तो एक छोटे से शहर से भी कोई शायर दुनिया के मंच पर अपनी गूंज पैदा कर सकता है। उनकी ग़ज़लें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। अगर आपको भी अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर जब नज्म मुजफ्फरनगरी से संपर्क करना है तो उनके मोबाइल नंबर: 971990 32 38 पर संपर्क किया जा सकता है


