यूपी के सीएम योगी के सबल मार्गदर्शन और लोकप्रिय वरिष्ठ आईएएस प्रमुख सचिव पशुपालन के.रविंद्र नायक के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने निराश्रित / बेसहारा पशुओं को दिया है संरक्षण
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मुजफ्फरनगर 7 दिसंबर दैनिक सूरज केसरी समाचार पत्र की विशेष कवरेज के अनुसार उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल मार्गदर्शन में और उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव पशुपालन लोकप्रिय वरिष्ठ आईएएस श्री के रविंद्र नायक के कुशल नेतृत्व में राज्य भर में बेसहारा पशुओं को लगातार संरक्षण दिया जा रहा है और उनकी हर प्रकार से देखभाल की जा रही है पशुपालन विभाग उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव श्री के रविंद्र नायक ने बताया कि भारत वर्ष में प्राचीनकाल में पशुपालन और कृषि साथ-साथ होते रहे है। मानव सभ्यता के विकास के साथ ही पशुपालन की महत्ता बढ़ती रही। जिस व्यक्ति के पास जितने अधिक पशु होते थे, वह उतना ही आर्थिक रूप से सम्पन्न माना जाता था। पशु खेती, दुग्ध, सवारी, बोझ ढोने, खाद्य पदार्थों के उत्पादन आदि के लिए उपयोगी रहे हैं। कृषि और पशुपालन एक दूसरे के पूरक रहे हैं। देश में 20वी सदी के सातवें दशक के अंत में हरित क्रांति आने के बाद कृषि क्षेत्र के उपकरणों एवं उन्नतशील बीजों व रासायनिक उर्वरकों के आगमन से खेती के काम में आने वाले बैलों की कमी आने लगी। दुधारू पशुपालन लगातार होता रहा है। जो पशु उपयोगी नहीं रहें, उन्हें पशुपालकों द्वारा छोड़ दिया गया और ऐसे पशुओं को जंगल में छोड़ने पर उनका कुनबा बढ़ता गया। श्री के रविंद्र नायक ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने पशुओं, गाय को संरक्षण देने के लिए विशेष योजना बनाई है। मा० मुख्यमंत्री सहभागिता योजनान्तर्गत तथा पोषण मिशन हेतु इच्छुक कृषकों/पशुपालकों के निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों से अधिकतम 04 गोवंश प्रति लाभार्थी पशुपालक की सुपुर्दगी में दिये जा रहे है।
प्रदेश में निराश्रित/बेसहारा पशुओं से फसलों के नुकसान से बचाने हेतु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में गोसंरक्षण के लिये अस्थाई गोआश्रय स्थल-6621, गोवश वन्य विहार / वृहद गोसरक्षण केन्द्र-321, काजी हाउस 307, कान्हा गोशाला-286, अर्थात कुल 7535 गो-आश्रय स्थलों में 12 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित है, गो-पालन के लिए किसानों पशुपालकों को सुपुर्दगी में 1.43,160 गोवंश दिये जा चुके है। श्री के रविंद्र नायक ने बताया कि
गोवश के भरण-पोषण हेतु वित्तीय वर्ष 2023-24 में रू0 1000.00 करोड तथा वर्ष 2024-25 में अद्यतन रू0 670.41 करोड़ जनपदों को निर्गत किया गया है। वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 में स्वीकृत 100 वृहद गो-सरंक्षण केन्द्रों के सापेक्ष 100 केन्द्रों हेतु निर्माण की द्वितीय किस्त रू0 4492.00 लाख अवमुक्त की गयी। वर्ष 2024-25 में 45 नये वृहद गोसरंक्षण केन्द्रों के निर्माण लक्ष्य के सापेक्ष 26 केन्द्रों की प्रथम किस्त की वित्तीय स्वीकृति धनराशि रू० 2080 लाख प्राप्त तथा कार्यदायी संस्थाओं को धनराशि अवमुक्त व 182 वृहद गौ संरक्षण केन्द्रों का निर्माण कार्य चल रहा है। श्री के रविंद्र नायक के अनुसार
प्रदेश में विभाग द्वारा गोशालाओं का पंजीकरण ऑनलाइन किया जा रहा है। अद्यतन 592 गोशालायें उ०प्र० गौशाला अधिनियम 1964
2/2 गौ-संरक्षण केन्द्रों एवं सुपुर्दगी में दिये गये गौवंश के भरण पोषण हेतु रू० 50 प्रतिदिन प्रतिगौवंश की दर से डी०बी०टी० के माध्यम से संबंधितों के खातों में धनराशि हस्तांतरित की जा रही है।
श्री के रविंद्र नायक ने बताया कि
प्रदेश में अतिरिक्त चारा विकास कार्यक्रम (राज्य योजना) के अंतर्गत प्रदेश में उपलब्ध पशुधन हेतु समस्त 75 जनपदों में 4000 हे० क्षेत्रफल में हरा चारा उत्पादन के प्रोत्साहन हेतु प्रत्येक चयनित लाभार्थी को कम से कम 0.1 हे० तथा अधिकतम 0.5 हे० क्षेत्रफल हेतु रू० 500 प्रति ईकाई से (0.1 हे० क्षेत्रफल) चारा बीज निःशुल्क उपलब्ध कराये जाने के लिए कार्ययोजना बनी है। इस कार्ययोजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 की खरीफ रबी / जायद सीजन में जई चारा बीज 6900 कु० एवं बरसीम चारा बीज 112.82 कु० पशुपालकों को वितरित किया गया। वर्ष 2024-25 में बरसीम चारा बीज 408.16 कु० एवं जायद चारा बीज मिनीकिट 1142.82 कु० योजनान्तर्गत कुल 40000 पशुपालकों को निःशुल्क वितरित किया जा रहा है। प्रमुख सचिव पशुपालन उत्तर प्रदेश ने बताया कि
पशुपालन विभाग के प्रक्षेत्र पर उत्पादित चारा बीज का वर्ष 2020-21 में 10093.8 कु० वर्ष 2021-22 में 10174.87 कु० वर्ष 2022-23 में 8814.97 कु० गया।
प्रदेश में हरे चारे एवं पशु आहार की कमी को दूर करने एवं वर्ष पर्यन्त हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित तथा सूखे चारे को संरक्षित करने के उद्देश्य से उ०प्र० चारा नीति (2024-2029) एवं उ०प्र० पशु आहार नीति (2024-2029) प्रख्यापित की गयी है, जिससे प्रदेश में व्यापक हरे एवं सूखे चारे की कमी को कम कर पशुधन उत्पादकता में वृद्धि प्राप्त की जा सकेगी। चारा नीति संचालित करने की कार्यवाही क्रमित है। उत्तर प्रदेश सचिवालय के प्रमुख सचिव और प्रमुख सचिव पशुपालन डेयरी एवं मत्स्य विकास श्री के रविंद्र नायक ने बताया कि
ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (यू०पी०जी०आई०एस०)-2023 निवेश के अन्तर्गत 3232 प्रोजक्ट के एम०ओ०यू० हस्ताक्षरित कराये गये हैं, जिसके अन्तर्गत 585 इकाइयों के प्रोजेक्ट, जी०बी०सी० से स्वीकृत हैं, जिनमें रू0 2222.38 करोड़ का निवेश होगा तथा लगभग 1,23,439 से अधिक व्यक्तियों को स्वरोजगार प्राप्त होगा।
नस्ल सुधार हेतु राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आर०जी०एम०) के अन्तर्गत 200 गायों के ब्रीड मल्टीप्लीकेशन फार्म की स्थापना करायी जा रही है, जिसकी कुल लागत 04 करोड़ है, जिसमें 02 करोड की सब्सिडी भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही है। अब तक 8 मल्टीप्लिीकेशन फार्म की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, जिससे 32 करोड का अतिरिक्त निवेश होगा। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव सचिवालय और प्रमुख सचिव पशुपालन एवं प्रमुख सचिव देरी मत्स्य विकास लोकप्रिय वरिष्ठ इस श्री के रविंद्र नायक जहां एक और सचिवालय प्रशासन उत्तर प्रदेश का कार्य अत्यंत थी कुशलता पूर्वक और भरपूर परिश्रम एवं पारदर्शिता के साथ निर्वहन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर पशुपालन विभाग के अंतर्गत आने वाली पशुओं की हितेषी तमाम योजनाओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुसार बखूबी निभा रहे हैं और लगातार राज्य के पशुओं के विकास में बहुत ही बेहतरीन कार्य कर रहे हैं

