क्या है यह गोरख धंधा जरूर देखें ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में प्लास्टिक सर्जन की होती है अहम भूमिका
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ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) पूरी दुनिया में महिलाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है, ऐसे में इसके इलाज के लिए एक व्यापक और मल्टीडिसीप्लिनरी नजरिए की जरूरत है ताकि बीमारी का खात्मा होने के साथ-साथ मरीज को उसकी नॉर्मल लाइफ भी वापस मिल सके. पिछले कुछ सालों में ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में प्लास्टिक सर्जन की भूमिका को समझा गया है जो मरीज की हॉलिस्टिक केयर में अहम भूमिका निभा रहे हैं. यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा में प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर अश्विनी कुमार सिंह ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है. सर्जरी के बाद जो रिकंस्ट्रक्शन की प्रक्रिया होती है उसमें प्लास्टिक सर्जन का रोल काफी महत्वपूर्ण रहता है जो ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर की ओवरऑल रिकवरी में अहम कड़ी साबित होते हैं.
ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में सर्जरी का विकल्प चुनना मरीज के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है. हालांकि, ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करने वाली टीम में प्लास्टिक सर्जन के आने जो स्किन से जुड़ी समस्याएं होती हैं उनके ठीक होने की उम्मीद बनती है. मास्टेक्टॉमी के बाद रिकंस्ट्रक्शन की प्रक्रिया काफी अहम होती है क्योंकि इसमें स्तन की पुरानी शेप को बहाल किया जाता है और मरीज को सर्जरी के बाद भी सबकुछ नॉर्मल होने और सेल्फ स्टीम होने एहसास कराया जाता है.
ब्रेस्ट कैंसर की इलाज टीम में प्लास्टिक सर्जन होने का सबसे पहला फायदा तुरंत रिकंस्ट्रक्शन हो जाना है. टीम में प्लास्टिक सर्जन के होने से उसी कैंसर सर्जरी के दौरान ही रिकंस्ट्रक्शन की प्रक्रिया भी कर ली जाती है. इससे किसी मरीज को सर्जरी के बाद ये एहसास नहीं होता कि वो बिना ब्रेस्ट के हैं. साथ ही रिकंस्ट्रक्शन के लिए अलग से कोई सर्जरी नहीं करनी पड़ती. सर्जरी के तुरंत बाद रिकंस्ट्रक्शन होने से न सिर्फ अच्छे रिजल्ट आते हैं बल्कि मरीज भी दिमागी तौर पर अच्छा फील करते हैं, उनके अंदर ज्यादा पॉजिटिविटी रहती है और वो आत्मविश्वास से भर जाते हैं.
कैंसर टीम में जो प्लास्टिक सर्जन होते हैं वो अलग तरह की स्किल्ड से लैस होते हैं. प्लास्टिक सर्जन नई-नई रिकंस्ट्रक्टिव तकनीक जैसे ऑटोलोगस टिशू रिकंस्ट्रक्शन और इम्प्लांट आधारित रिकंस्ट्रक्शन में पारंगत होते हैं. प्लास्टिक सर्जन के अंदर इस तरह की स्किल्स होने से हर मरीज को उसकी जरूरत के हिसाब से पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट मुहैया कराना संभव होता है. कैंसर सर्जन और प्लास्टिक सर्जन आपसी सहयोग से मरीज की मेडिकल कंडीशन, उनकी लाइफस्टाइल और पहले जैसी नॉर्मल लुक की चाहत के अनुरूप इलाज प्लान करते हैं.
बॉडी शेप में लुक के फायदों के साथ ही सर्जरी के बाद रिकंस्ट्रक्शन प्रक्रिया होने से मरीज को इमोशनल और साइकोलॉजिकल मदद मिलती है जो उनकी रिकवरी में काम आती है. अलग-अलग रिसर्च बताती हैं कि जो महिलाएं स्तन कैंसर की सर्जरी के बाद रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी कराती हैं उनके अंदर आत्मसम्मान के परिपूर्ण होती हैं, बॉडी इमेज और क्वालिटी लाइफ भी बेहतर होता है. ऐसे में कैंसर टीम में प्लास्टिक सर्जन के होने से न सिर्फ मरीज को अच्छा इलाज मिल पाता है बल्कि उन्हें इमोशनल और साइकोलॉजिकल तौर पर भी मजबूती मिलती है.
ब्रेस्ट कैंसर की टीम में प्लास्टिक सर्जनों की भूमिका काफी अहम है, जो एक व्यापक और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण में योगदान करती है. प्लास्टिक सर्जन के होने से ब्रेस्ट कैंसर से ग्रसित महिलाओं को इलाज के साथ-साथ इमोशनल और फिजिकल दोनों तरह की चुनौतियों से पार पाने में मदद मिलती है. कैंसर सर्जरी के बाद रिकंस्ट्रक्शन प्रक्रिया होने से रिकवरी के दौरान मरीज को विश्वास मिलता है, उनके जीवन में पॉजिटिविटी रहती है.