भोजपुरी एवं राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करके न्याय किया जाये – अजीत दूबे
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भोजपुरी एवं राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करके न्याय किया जाये – अजीत दूबे
नई दिल्ली। विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अजीत दूबे ने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में आज 22 भाषाएँ हैं। यह संख्या स्थिर नहीं है। समय-समय पर इसमें भाषाएँ जोड़ी गई हैं। फिर भोजपुरी और राजस्थानी को जोड़ने में हिचक क्यों? यह केवल भाषाई प्रश्न नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रश्न भी है। जब किसी भाषा को मान्यता नहीं मिलती, तो उस भाषा के बोलने वालों को भी एक तरह से हाशिए पर धकेल दिया जाता है। उनकी संस्कृति, उनका साहित्य, उनकी पहचान, सब कुछ ‘कमतर’ मान लिया जाता है। राजस्थान विधानसभा ने दो दशक पहले ही राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता देने का प्रस्ताव पारित किया था। यह लोकतांत्रिक इच्छा का स्पष्ट संकेत है। उसी तरह, भोजपुरी के लिए भी लंबे समय से मांग उठती रही है। संसद में प्रस्ताव आए, समितियाँ बनीं, लेकिन निर्णय टलता रहा। अब समय आ गया है कि इस टालमटोल को समाप्त किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय एक अवसर है, नीति-निर्माताओं के लिए, शिक्षाविदों के लिए, और समाज के लिए। यह अवसर है यह समझने का कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है। अगर हम सचमुच एक समावेशी और न्यायपूर्ण समाज बनाना चाहते हैं, तो हमें अपनी भाषाई विविधता को सम्मान देना होगा। राजस्थानी को शिक्षा में स्थान देना एक शुरुआत है, लेकिन यह यात्रा भोजपुरी और अन्य भाषाओं तक भी पहुँचनी चाहिए।


