नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 9412807565,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें
June 22, 2026

Suraj Kesari

No.1 Digital News Channel of India

भारतीय किसान यूनियन टिकैत की मुजफ्फरनगर में ऐतिहासिक महापंचायत संपन्न: अनेक प्रस्ताव पारित ज्ञापन भेजा

1 min read

भारतीय किसान यूनियन टिकैत की मुजफ्फरनगर में ऐतिहासिक महापंचायत संपन्न: अनेक प्रस्ताव पारित ज्ञापन भेजा

मुजफ्फरनगर 17 फरवरी प्राप्त समाचार के अनुसार भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के नेतृत्व में आज नवीन मंडी स्थल मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन द्वारा ऐतिहासिक किसान महापंचायत का आयोजन किया गया इस महापंचायत में किसानों ने अनेकों प्रस्ताव पारित किया और भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भी भेजा विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में किसान इस महापंचायत में शामिल हुए और सरकार की नीतियों का खुलकर विरोध किया भारतीय किसान यूनियन द्वारा जो ज्ञापन भेजा गया है उसकी भाषा इस प्रकार है भारत देश एक कृषि प्रधान देश है, जिसकी मुख्य कड़ी देश का अन्नदाता है। सम्पूर्ण भारत इसी के भरोसे अपने परिवारों का पेट भर रहा है, लेकिन वर्तमान की स्थिति में यह अपने वजूद को तलाश रहा है। जल, जंगल, जमीन यह तीनों हमारे लिए ऐसे हैं जैसे मनुष्य शरीर में आत्मा। इनके बिना प्रकृति का कोई अस्तित्व ही नहीं हैं। एनडीए सरकार का तीसरा कार्यकाल शुरू हो गया है. लेकिन देश के किसान-मजदूर-आदिवासी को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। यह पंचायत सरकार के इस रवैये की कठोर शब्दों में निंदा करती है और तत्काल इन सभी विषयों पर चर्चा की भी मांग भी करती है। कृषि संकट को समाप्त करने के लिए भारतीय किसान यूनियन संयुक्त रूप से निम्नांकित मसौदा प्रस्ताव इस पंचायत में पारित करती है-

 

17 फरवरी 2025 को उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में आयोजित किसान-मजदूर महापंचायत

 

पंचायत द्वारा पारित प्रस्ताव

 

1. (गन्ना) – उत्तर प्रदेश में गन्ने का पेराई सत्र कुछ समय बाद समाप्त होने को है, लेकिन अभी तक गन्ने का भाव घोषित नहीं किया गया है। पूर्व के समय में सत्र शुरू होने से पहले सरकारों के द्वारा भाव घोषित किया जाता था। कारपोरेट के दबाव में सरकार की बदलती मानसिकता से किसानहित व जनहित को हानि पहुँच रही है। सरकार जल्द इस विषय पर निर्णय ले व भाव 500 रुपये प्रति कुन्तल घोषित करें व मिलों पर बकाया भुगतान को अविलम्ब कराया जाए।

 

2. (व्यापक ऋणमाफी) देश का सबसे अहम वर्ग कर्ज का बोझ झेल रहा है. इसी कारण वह आत्महत्या करने पर मजबूर है। सरकारें कारपोरेट घरानों का अरबों-खरबों रुपया बिना किसी शर्त व सूचना जारी किए माफ कर देती है, इसी तरह यह पंचायत देश के किसान का सम्पूर्ण ऋणमाफ करने की मांग करती है।

 

3. (एमएसपी गारंटी कानून/सी2+50)- देश के किसान ने वर्षों से एमएसपी को गारंटी कानून

 

का दर्जा देने की मांग के लिए अपने संघर्ष को जारी रखा है। आज के हालात को देखते हुए देश के हर फसली किसान को इसकी आवश्यकता भी है। एनडीए की सरकार चला रहे प्रधानमंत्री जी ने पूर्व के समय में एग्रीकल्चर स्टैण्डिंग कमेटी के सदस्य के रूप में एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें एमएसपी को कानूनी दर्जा देने की मांग की थी। अब वह अपनी रिपोर्ट को लागू करें साथ ही सी2+50 के फार्मूले को किसान हित में लागू करें।

 

4. (एनजीटी व जीएसटी मुक्त खेती)- देश का किसान जो भी यंत्र अपने कृषि कार्यों में उपयोग कर रहा है वह एनजीटी कानून के दायरे से बाहर किया जाए साथ ही खेती में उपयोग होने वाली सभी वस्तुएं, पदार्थ, बीज व यंत्र जीएसटी मुक्त किए जाएं।

विद्युत निजीकरण व संस्था निजीकरण)- केन्द्र सरकार व बहुत से प्रदेशों की सरकारें विद्युत

 

निजीकरण का कार्य कर रही है और कुछ पूर्व रामय में कर चुकी हैं। उत्तर प्रदेश इसका दंश झेल रहा है। आगरा में किसानों पर लाखों रुपया बकाया है। इन सभी विषयों को गम्भीरता से लेते हुए विद्युत निजीकरण को रोका जाए साथ ही सरकार के द्वारा जारी देश की किसी भी संस्था के निजीरकण (जो आमजनजीवन को प्रभावित करती है) को भी तत्काल प्रभाव से बन्द किया जाए।

 

6. (जेनेटिकली मोडिफाईड (जीएम) बीज) देश में सरकार जीएम बीजों को लाने का कार्य कर

 

रही है, जो मानव जीवन, पर्यावरण व खेती के लिए बेहद खतरनाक हैं। पूर्व में बीटी कॉटन/एचटी बीटी कॉटन का दंश देश आज तक झेल रहा है। जिसके दुष्परिणाम की अनेकों रिपोर्ट सोशन मीडिया आदि के प्लेटफार्म पर प्रचारित हैं। भारतीय किसान यूनियन इस प्रकार के किसी भी ट्रायल को देशभर में नहीं होने देगा।

 

7. (भूमि अधिग्रहण)- देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों व संस्थाओं के निर्माण के लिए किसानों की जमीने अधिग्रहीत की जा रही है। किसी भी भूमि का उचित मुआवजा किसानों को नहीं दिया जा रहा है, जिसे लेकर देशभर में किसान आन्दोलन कर रहे हैं। सरकार एलएआरआर अधिनियम 2013 को लागू करने का कार्य करें साथ ही किसानों के शोषण को देशभर में बन्द करें।

 

8. (एनपीएफ ऑन एएम) केन्द्र सरकार हाल ही के समय में नेशनल पॉलिसी फेम वर्क ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग का नया कृषि मसौदा नीति लेकर आयी है। यह राज्य व किसानों के अधिकारों पर प्रहार है। इसे तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।

 

उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर की कूकडा गुड मंडी में आयोजित यह किसान मजदूर महापंचायत सर्वसम्मति से सभी प्रस्तावों को पारित करती है। केन्द्र व राज्य सरकारें इन सभी विषयों पर विचार कर आवश्यक कार्यवाही अमल में लाएं।

अगर इन सभी विषयो पर कार्यवाही नही होती है तो पंचायत एस.के.एम. के साथ मिलकर देशभर में किसान जन जागृति अभियान चलायेगी।

भवदीय

प्रतिलिपि निम्नांकित को सूचनार्थ हेतु प्रेषितः-

 

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, दिल्ली।

2. ग्रह मंत्री, भारत सरकार, दिल्ली।

3. कृषिमंत्री, भारत सरकार, दिल्ली।

4. मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन द्वारा उपरोक्त अनुसार ज्ञापन भेजा गया अंत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने देश भर से आए किसानों का आभार व्यक्त किया

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

Right Menu Icon