संविधान विशेषज्ञ पद्मभूषण डॉ. सुभाष चंद्र कश्यप का निधन
*संविधान विशेषज्ञ पद्मभूषण डॉ. सुभाष चंद्र कश्यप का निधन, मुजफ्फरनगर से भी रहा पारिवारिक संबंध; प्रमुख समाज सेविका बीना शर्मा ने दी श्रद्धांजलि
मुजफ्फरनगर 5 जून प्राप्त समाचार के अनुसार मुजफ्फरनगर जनपद की प्रमुख समाज सेविका श्रीमती बीना शर्मा ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश के प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ, संसदीय परंपराओं के विद्वान, पद्मभूषण सम्मान से अलंकृत एवं पूर्व लोकसभा महासचिव डॉ. सुभाष चंद्र कश्यप का गुरुवार को 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से देश के संवैधानिक, शैक्षिक और संसदीय जगत में शोक की लहर दौड़ गई। डॉ. कश्यप का मुजफ्फरनगर से भी विशेष पारिवारिक संबंध रहा। वे नगर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिनेश दत्त के बहनोई तथा अपने समय के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. विष्णु दत्त के बड़े दामाद थे। उनके निधन का समाचार मिलते ही जनपद के चिकित्सक, शिक्षाविद् और समाजसेवियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। 10 मई 1929 को बिजनौर जनपद के चांदपुर में स्वतंत्रता सेनानी परिवार में जन्मे डॉ. सुभाष चंद्र कश्यप ने किशोरावस्था में स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया। इलाहाबाद, नई दिल्ली, वाशिंगटन और जिनेवा में उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले डॉ. कश्यप ने पत्रकार, अधिवक्ता और अध्यापक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की तथा बाद में भारतीय संसद से जुड़कर 37 वर्षों से अधिक समय तक राष्ट्र की सेवा की। वे 1983 से 1990 तक लोकसभा के महासचिव रहे और भारतीय संविधान, संसदीय प्रक्रिया तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षेत्र में उन्हें देश का अग्रणी विशेषज्ञ माना जाता था। उन्होंने 100 से अधिक पुस्तकों तथा सैकड़ों शोध लेखों की रचना की, जिनमें ‘आवर पार्लियामेंट’ और ‘आवर कॉन्स्टीट्यूशन’ जैसी चर्चित पुस्तकें शामिल हैं। डॉ. कश्यप अंतरराष्ट्रीय संसदीय संघ (आईपीयू) जिनेवा से भी जुड़े रहे और इस संस्था का नेतृत्व करने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने पंचायती राज कानूनों पर भारत सरकार के मानद संवैधानिक सलाहकार, संविधान समीक्षा आयोग की प्रारूप समिति के अध्यक्ष तथा ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ संबंधी उच्चस्तरीय समिति के सदस्य के रूप में भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। वर्ष 2015 में उन्हें सार्वजनिक जीवन, संविधान और संसदीय लोकतंत्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। उनके व्यक्तित्व में विद्वता, सादगी और राष्ट्रसेवा का अद्भुत समन्वय था। डॉ. सुभाष चंद्र कश्यप का निधन भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक विमर्श के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
~मो सुहैल


