मेरे अ ‘बुक्स’ पुस्तक का भव्य विमोचन, सबीहा अहमद बोलीं— यह किताब आने वाली पीढ़ियों को माता-पिता के सम्मान और संस्कारों की राह दिखाएगी
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‘मेरे अ ‘बुक्स’ पुस्तक का भव्य विमोचन,
सबीहा अहमद बोलीं— यह किताब आने वाली पीढ़ियों को माता-पिता के सम्मान और संस्कारों की राह दिखाएगी
अंतरराष्ट्रीय मुशायरे में देर रात तक झूमते रहे श्रोता
समारोह में पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव,सपा नेता अबु आसिम आजमी,मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली,नसीमुद्दीन सिद्दीकी, सांसद धर्मेंद्र यादव,उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहसिन रजा,विधायक नफीस अहमद रहे मौजूद
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित होटल डायमंड पैलेस में लेखिका सबीहा अहमद द्वारा लिखित पुस्तक ‘मेरे अब्बू’ का गरिमामयी विमोचन समारोह भव्य रूप से संपन्न हुआ। पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि धर्मगुरु कारी हबीब तथा पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं वर्तमान विधायक अबू आसिम आजमी के कर-कमलों द्वारा किया गया। यह पुस्तक एक बेटी के अपने पिता के प्रति अटूट प्रेम, सम्मान और उनसे मिली जीवन शिक्षाओं का भावपूर्ण दस्तावेज है। इस विशेष अवसर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में देश-दुनिया के मशहूर शायरों और कवियों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि देर रात तक श्रोता वाह-वाह और तालियों की गूंज के बीच मंत्रमुग्ध होकर कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।
पुस्तक के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए लेखिका सबीहा अहमद ने भावुक स्वर में कहा कि यह किताब उनके पिता से मिली सीख, संस्कार और जीवन मूल्यों का निचोड़ है। उन्होंने कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में, जहां लोग अपने माता-पिता का सम्मान करना और उनकी बातों को मानना धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं, वहां यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह किताब हमें याद दिलाती है कि माता-पिता की सेवा और सम्मान हमारे जीवन का पहला कर्तव्य है।
धर्मगुरु कारी हबीब ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि ‘मेरे अब्बू’ बाप-बेटी के रिश्ते की भावनाओं और एहसासों को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त करती है। वहीं मुख्य अतिथि अबू आसिम आजमी ने कहा कि यह पुस्तक महज पन्नों का संग्रह नहीं, बल्कि एक बेटी की अपने पिता के प्रति अटूट समर्पण और सम्मान की भावना का सजीव प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसी कृतियां समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम करती हैं।
विमोचन समारोह के बाद आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुशायरे में देश-दुनिया के नामचीन शायरों और कवियों ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। डॉ. मालविका हरिओम ने पढ़ा— “कभी हवाओं में अपनी भी सदा गूँजेगी, अभी तो शोर ज़माने का सुन रहे हैं हम।” शबीना अदीब ने अपने मशहूर अशआर— “तुम जहाँ हो मैं वहीं हूँ तुम समझते क्यों नहीं, तुम फ़लक हो मैं ज़मीं हूँ तुम समझते क्यों नहीं”— से खूब दाद बटोरी। हिमांशी बाबरा ने पढ़ा— “दिल ऐसे मुब्तिला हुआ उसके मलाल में, ज़ुल्फें सफ़ेद हो गईं उन्नीस साल में।” अज़हर इकबाल ने कहा— “ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो, मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं है।” अभिश्रेष्ठ तिवारी ने अपने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में पढ़ा— “कहा था तुमने कि रिश्ता है भाई-भाई का, हिसाब रक्खा है तुमने तो पाई-पाई का।” अजय सहाब ने शेर सुनाया— “सूरज जो एक रोज़ ज़रा देर से उगा, जुगनू ने आसमान को अपना समझ लिया।” आदर्श बाराबंकवी ने पढ़ा— “बड़े भोले हैं हम, दुश्मन से भी रंजिश नहीं रखते, बड़ा है सब्र हममें पर न ललकारो कभी हमको।” वहीं शाहबाज़ तालिब ने अपने शेर— “ये दवा उसने लिखी है मेरी बेज़ारी की, इश्क़ ही आख़िरी खुराक है बीमारी की”— से खूब वाहवाही लूटी। इनके अलावा अन्य रचनाकारों ने भी अपने कलाम पेश किए और पूरा सभागार देर रात तक अदबी माहौल में डूबा रहा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वसीम अहमद, मोहम्मद उमर और मोहम्मद उस्मान ने कहा कि उनकी फाउंडेशन उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में लगातार ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करती रही है। उनका उद्देश्य गंगा-जमुनी तहजीब और साझा सांस्कृतिक विरासत को हर हाल में प्रोत्साहित और जीवंत बनाए रखना है। कार्यक्रम के संयोजक वामिक खान ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कला और साहित्य के ऐसे मंचों के माध्यम से भारत की एकता, अखंडता और इसकी बहुरंगी संस्कृति को समाज के सामने निरंतर प्रस्तुत किया जाता रहेगा।
समारोह में पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव,मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली,नसीमुद्दीन सिद्दीकी, सांसद धर्मेंद्र यादव, उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहसिन रजा,विधायक नफीस अहमद,सपा नेता अमीक जमाई,उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के अध्यक्ष जुबैर अहमद, महामंत्री अब्दुल वहीद, ख़्वाजा बज्मी यूनुस सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, पत्रकार और बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।


