चरथावल डाक बंगले में मरम्मत के नाम पर ‘मोटे खेल’ की तैयारी
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चरथावल डाक बंगले में मरम्मत के नाम पर ‘मोटे खेल’ की तैयारी!
*सही-सलामत चाहरदीवारी तोड़ी, पुरानी ईंटों से निर्माण का आरोप; हरे पेड़ों पर भी चली कुल्हाड़ी*
*बारिश में ढही थी चाहरदीवारी, लाखों खर्च कर बनी थी नई दीवार, अब फिर तोड़ने पर उठे सवाल*
*सिंचाई विभाग के डाक बंगले में निर्माण कार्य पर सवाल, रेत के इस्तेमाल और खानापूर्ति के आरोप*
चरथावल कस्बे में सिंचाई विभाग के डाक बंगले में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों पहले बारिश में ढह चुकी चाहरदीवारी को लाखों रुपये खर्च कर दोबारा मजबूत तरीके से बनाया गया था। वर्तमान में यह चाहरदीवारी सही-सलामत हालत में होने के बावजूद उसे तोड़कर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और मरम्मत के नाम पर कथित तौर पर मोटे खेल की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक डाक बंगले का परिसर कभी बड़े-बड़े हरे-भरे पेड़ों से गुलजार रहता था। इन पेड़ों के कारण पूरा परिसर हरियाली से भरा नजर आता था। आरोप है कि अब निर्माण कार्य की आड़ में हरे पेड़ों पर भी कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। लोगों का कहना है कि जितने पेड़ों की अनुमति बताई जा रही है, उससे अधिक पेड़ों को नुकसान पहुंचाए जाने की शिकायत है। कुछ हरे पेड़ों को खराब अथवा अनुपयोगी दर्शाकर कटाई किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पुरानी चाहरदीवारी को तोड़ने के बाद निकलने वाली पुरानी ईंटों का ही दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं निर्माण में निर्धारित सामग्री की जगह कथित रूप से रेत का अधिक इस्तेमाल किए जाने और मानकों की अनदेखी कर केवल खानापूर्ति किए जाने की शिकायत है।लोगों का कहना है कि जब पुरानी चाहरदीवारी पूरी तरह सुरक्षित थी तो उसे तोड़ने की आवश्यकता क्यों पड़ी? यदि दीवार की मरम्मत जरूरी थी तो उसकी मरम्मत कर सरकारी धन बचाया जा सकता था। इसके बावजूद पूरी दीवार को तोड़कर नए सिरे से निर्माण कराने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है।स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच तथा पेड़ों की कटाई से संबंधित अनुमति की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जब इस संबंध में सिंचाई विभाग के एक्शन सुभाष चंद्र से बात करने की कोशिश की है तो उनके द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया


