मेरी कला को फिर से उजागर करने वाले दोनों गुरुओं सवाई सिंह जी चौहान व विनय तमोली जी को मेरा सलाम
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मेरी कला को फिर से उजागर करने वाले दोनों गुरुओं सवाई सिंह जी चौहान व विनय तमोली जी को मेरा सलाम : हरीश शर्मा
लक्ष्मणगढ़ – (सीकर) : दैनिक सूरज केसरी : मेरी कला को फिर से उजागर करने वाले मेरे उन दोनों गुरुओं को मेरा बारम्बार प्रणाम। जी हां मैं बात कर रहा हु उन दोनों शख्सियत की जिन्होंने मेरी सोई हुई कला को फिर से जगाने का प्रयास किया हैं।
*सवाई सिंह जी चौहान* -: जी हां आप सभी ने सवाई सिंह जी चौहान का नाम तो सुना ही होगा। सवाई सिंह जी चौहान एक सुविख्यात भजन गायक हैं। ये केवल अपने आप में ही समर्पित नही रहते बल्कि उन सभी निखरते हुए कलाकारों के लिए समर्पित हैं जिन्हें एक अच्छे साथ की जरूरत होती हैं। कलाकार छोटा हो या बड़ा हमेशा गायन में बिना किसी लालच के निःस्वार्थ भाव से उनका साथ दिया हैं। आज से सात साल पहले मैंने भी बहुत भजन गाए थे लेकिन किसी कारणवश सात साल से मैंने भजन गाने छोड़ दिये थे लेकिन एक दिन श्याम सहारा परिवार के द्वारा एकादशी पर आयोजित होने वाले सकीर्तन में मुझे गाने का मौका दिया गया। उस समय गाने में मेरा साथ देने वाले थे सवाई सिंह जी चौहान, जिन्होंने मुझे यह तक महसूस नही होने दिया कि मैं सात साल बाद गा रहा हु। उन्होंने बखूबी अंदाज में मेरा इस कदर साथ दिया कि मुझे यह आभास ही नही होने दिया कि मैं अकेला हु या फिर से इतना बेहतरीन फिर से गा पाऊंगा। इन्होंने मेरी सोई हुई कला को फिर से जगाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं इसके लिए मैं इन्हें दिल की गहराइयों से जितना भी आभार प्रकट करू उतना मेरे हिसाब से बहुत कम होगा। कहना बहुत आसान हैं कि हम साथ हैं या साथ खड़े हैं पर साथ देना और साथ खड़े रहना बहुत मुश्किल हैं। जब बच्चा छोटा होता हैं तो उसे गिरने का बहुत डर रहता हैं लेकिन जब पिता की अंगुली उन नन्हें हाथों में होती हैं तो वो बिंदास रहता हैं। ना उसे गिरने का डर ना कही गुम होने का डर। ठीक वही बात आती हैं गायन की, जिसमें पिता की भांति हर उभरते कलाकार की अंगुली पकड़कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं। इन्हें सभी काकाश्री के नाम से भी जाना जाता हैं। इनके लिए मैं हरीश शर्मा कहना चाहूंगा कि -: संस्कारों से जुड़ाव जड़ों का हो, संग में आशीर्वाद हमेशा आप जैसे बड़े का हो, जीवन में कुछ नहीं मिलेगा, बेवजह के वाद-विवाद से, मुसीबत आसान हो जाती हैं आपके आशीर्वाद से।
*विनय जी तमोली* -: जी हां आपने विनय जी तमोली का नाम भी तो सुना ही होगा, ये भी एक सुविख्यात भजन गायक हैं। सवाई सिंह जी चौहान व विनय जी तमोली जब एक साथ साथ खड़े हो तो राम-लक्ष्मण जी की जोड़ी प्रतीत होती हैं। विनय तमोली जी भी उन सभी युवा गायक कलाकारों के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं। कभी भी किसी भी कलाकार को यह तक महसूस नही होने देते की वो अकेले हैं। जब भी कोई नया कलाकार माइक थामकर गाने को आगे बढ़ता हैं और जैसे ही झिझकता हैं तो उन्हें तुरंत सम्भाल लेते हैं ऐसे हैं विनय तमोली जी। इन दोनों के बारे में जितना भी लिखा जाए उतना ही कम हैं। किसी भी कलाकर के लिए कभी भी जलनशील वाली जैसी भावनाएं नही रखते हैं। इन दोनों गुरुओं का जितना धन्यवाद ज्ञापित करू उतना ही कम हैं। मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना हैं कि इन दोनों महानुभाओं गुरुओं की खुशियों को कभी भी नजर नही लगें, ओर उनकी हर एक मुराद पूरी करें एवं इन्हें खूब तरक्की दे और ये ऐसे ही नए कलाकारों के लिए मार्गदर्शन बनते रहें। इनके लिए मैं हरीश शर्मा कहना चाहूंगा कि बड़ो का दिया हुआ आशीर्वाद और अपनों की शुभकामनाओं का कोई रंग नहीं होता, मगर जब यह रंग लाते हैं तो जिंदगी में हर रंग भर जाते हैं। आशीर्वाद और भरोसा कभी दिखाई नहीं देते लेकिन यह सब मिलकर असम्भव को सम्भव बना देते हैं।


