आग और जंजीर के मातम के बीच गूंजेगी शहादत की सदा
1 min read*आग और जंजीर के मातम के बीच गूंजेगी शहादत की सदा,*
*मौलाना यासूब अब्बास का खिताब और कड़े सुरक्षा इंतजाम,*
लखनऊ। नवाबी नगरी और अपनी अनूठी अज़ादारी के लिए दुनिया भर में मशहूर लखनऊ में ग़म-ए-हुसैन की रवायत को पूरी अकीदत के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी सिलसिले में कदामा-ए-मज़ारिस व अज़ा के बैनर तले आगामी 20 मोहर्रम को एक बेहद पुरअसर और अकीदतमन्द मजलिस व मातम का आयोजन होने जा रहा है। इस मजहबी जलसे को संबोधित करने के लिए देश के जाने-माने शिया आलिम और बेबाक ख़तीब मौलाना यासूब अब्बास साहब तशरीफ ला रहे हैं। उनकी तकरीर और मसायब को सुनने के लिए लखनऊ और आस-पास के इलाकों से बड़ी संख्या में मोमिनीन के जुटने की उम्मीद है। यह पूरा रूहानी और रंजो-ग़म का मंज़र लखनऊ के ऐतिहासिक पुत्तन साहब की कर्बला में सजेगा, जो बरसों से अज़ादारी का एक बड़ा मरकज़ रहा है।
इस मजलिस की सबसे बड़ी और मर्मस्पर्शी रवायत इसके बाद होने वाला मातम होगा। मौलाना यासूब अब्बास के खिताब के ठीक बाद, हसन परवेज़ की जानिब से पारंपरिक और रोंगटे खड़े कर देने वाला जंजीर व आग का मातम बरपा किया जाएगा। दहकते हुए अंगारों और जंजीरों के साए में अज़ादार इमाम हुसैन और उनके 72 जांनिसारों की शहादत को याद कर अपना नज़राना-ए-अकीदत पेश करेंगे। इस संजीदा मंज़र को देखने और कर्बला के शहीदों का पुरसा देने के लिए हर साल हज़ारों की भीड़ उमड़ती है, जिसे ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के भी कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन का पूरा अमला मुस्तैदी के साथ अपनी ड्यूटी पर तैनात रहेगा ताकि कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रहे और अज़ादारों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस पूरे कार्यक्रम की कमान बाबुल मुराद कमेटी, लखनऊ के हाथों में है। कमेटी के ज़िम्मेदारों ने रात ठीक नौ बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन के सहयोग से सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयोजकों ने सभी अज़ादारों से वक्त की पाबंदी, अनुशासन और मजलिस के एहतराम के साथ शामिल होने की गुज़ारिश की है। कार्यक्रम के बेहतर प्रबंधन और मोमिनीन की सहूलियत के लिए बाबुल मुराद कमेटी की जानिब से कुछ मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले जायरीन को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
