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July 20, 2026

Suraj Kesari

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बचपन के कैंसर की समय पर पहचान

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बचपन के कैंसर की समय पर पहचान: सही समय पर इलाज से बचाई जा सकती है बच्चे की जान

मुज़फ्फरनगर – बचपन खेल-कूद, पढ़ाई और खुशियों का समय होता है। बच्चों में बुखार, खांसी या कमजोरी जैसी समस्याएं आम हैं, लेकिन यदि कोई लक्षण लंबे समय तक बना रहे या बार-बार दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में ये बचपन के कैंसर का संकेत भी हो सकते हैं। समय पर पहचान और इलाज से अधिकांश बच्चों के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली की पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. प्राची जैन बताती हैं, “बचपन के कैंसर की जल्दी पहचान होने पर इलाज समय पर शुरू किया जा सकता है। इससे इलाज के बेहतर परिणाम मिलते हैं और बच्चे के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है।”

माता-पिता को कुछ लक्षणों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जैसे लगातार बुखार, बिना कारण वजन कम होना, गर्दन, बगल या पेट में गांठ, बार-बार थकान, चेहरा पीला पड़ना, शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ना या खून आना, रात में हड्डियों या जोड़ों में दर्द तथा सुबह उल्टी के साथ लगातार सिरदर्द। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

डॉ. जैन के अनुसार, आज आधुनिक इलाज और विशेषज्ञों की देखरेख से बच्चों के कैंसर का सफल इलाज संभव है। माता-पिता, शिक्षक और परिवार यदि बच्चे के स्वास्थ्य और व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें, तो बीमारी की जल्द पहचान हो सकती है।

बचपन का कैंसर दुर्लभ है, लेकिन समय पर जांच और सही इलाज से इसे हराया जा सकता है। इसलिए किसी भी असामान्य या लंबे समय तक रहने वाले लक्षण को हल्के में न लें। समय पर उठाया गया एक कदम बच्चे की जिंदगी बचा सकता है।

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