अब जॉइंट रिप्लेसमेंट भी हो रहा है स्मार्ट, AI और रोबोटिक्स से मरीजों को मिल रहा पर्सनलाइज्ड इलाज
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अब जॉइंट रिप्लेसमेंट भी हो रहा है स्मार्ट, AI और रोबोटिक्स से मरीजों को मिल रहा पर्सनलाइज्ड इलाज
शामली: जॉइंट रिप्लेसमेंट की तकनीक पिछले कुछ वर्षों में काफी आगे बढ़ी है। पहले जहां इसे एक बड़ी और लगभग सभी मरीजों के लिए एक जैसी प्रक्रिया माना जाता था, वहीं अब यह तेजी से अधिक सटीक और मरीज की जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत होती जा रही है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी और मरीज की शारीरिक संरचना के अनुसार तैयार किए गए इम्प्लांट ऑर्थोपेडिक सर्जरी में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहे हैं।
AI का इस्तेमाल मेडिकल इमेजिंग, मरीज से जुड़े डेटा और शरीर की मूवमेंट के पैटर्न का विश्लेषण करने में तेजी से बढ़ रहा है। सर्जरी से पहले एडवांस कंप्यूटर सिस्टम डॉक्टरों को मरीज के जोड़ की अनूठी बनावट, उसकी अलाइनमेंट और स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकते हैं।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के डायरेक्टर डॉ. कुलदीप मलिक ने बताया “यह समझना महत्वपूर्ण है कि AI सर्जन की जगह नहीं लेता। यह एक निर्णय लेने में सहायता करने वाला टूल है, जो डॉक्टरों को अधिक जानकारी और डेटा के आधार पर निर्णय लेने में मदद करता है। रोबोटिक-असिस्टेड जॉइंट रिप्लेसमेंट ऑर्थोपेडिक्स में एक और महत्वपूर्ण तकनीकी विकास है। सर्जरी के दौरान रोबोटिक सिस्टम डॉक्टर द्वारा पहले से तैयार की गई योजना को अधिक सटीकता के साथ लागू करने में मदद कर सकते हैं।
रोबोट अपने आप सर्जरी नहीं करता। सर्जन ही पूरी प्रक्रिया का नियंत्रण अपने हाथ में रखते हैं और रोबोटिक तकनीक को अतिरिक्त मार्गदर्शन तथा सटीकता के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसका उद्देश्य केवल यह नहीं है कि मरीज का ऑपरेशन “रोबोट करे”, बल्कि सर्जिकल प्लान के अनुसार बेहतर अलाइनमेंट और अधिक सुसंगत तरीके से प्रक्रिया को पूरा करना है।
डॉ. कुलदीप ने आगे बताया “यह व्यक्तिगत दृष्टिकोण उन मरीजों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है जिनकी हड्डियों या जोड़ की बनावट सामान्य संरचना से काफी अलग होती है। हालांकि, पर्सनलाइज्ड इम्प्लांट का मतलब यह नहीं है कि वह हर मरीज के लिए अपने आप बेहतर विकल्प होगा। इम्प्लांट का चुनाव मरीज की उम्र, उसकी शारीरिक सक्रियता, हड्डियों की गुणवत्ता, जोड़ की स्थिति और सर्जन के चिकित्सकीय आकलन सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।
जॉइंट रिप्लेसमेंट का भविष्य AI बनाम सर्जन या रोबोट बनाम इंसान होने वाला नहीं है। इसके बजाय भविष्य में सर्जिकल विशेषज्ञता के साथ बेहतर जानकारी, सटीक तकनीकों और व्यक्तिगत प्लानिंग का संयोजन अधिक महत्वपूर्ण होगा। मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए कि, “क्या मेरे सर्जन रोबोट का इस्तेमाल करते हैं?” बल्कि यह होना चाहिए कि, “क्या यह तकनीक मेरी स्थिति के लिए उपयुक्त है और इससे मेरे इलाज में किस तरह सुधार हो सकता है?”
