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June 21, 2026

Suraj Kesari

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US-इजरायल की स्ट्राइक में ईरानी रक्षा मंत्री और IRGC कमांडर की मौत की खबर

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US-इजरायल की स्ट्राइक में ईरानी रक्षा मंत्री और IRGC कमांडर की मौत की खबर

ईरान 28 फरवरी प्राप्त समाचार के अनुसार इजरायली हमले में ईरान के सेना प्रमुख Amir Hatami की मौत हो गयी है। ये ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका है!! सऊदी के अल सुल्तान सैनिक हवाई अड्डे पर कई ईरानी मिसाइलों ने बड़ी तबाही मचाई। *विश्व ऊर्जा बाजार में भूचाल: ईरान–इज़राइल संघर्ष से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट*

ईरान–इज़राइल युद्ध के आरंभिक चरण ने ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अभूतपूर्व उथल-पुथल उत्पन्न कर दी है। कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र उछाल ने यह संकेत दे दिया है कि यह संघर्ष केवल सामरिक परिघटना नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक अस्थिरता का अग्रदूत भी सिद्ध हो सकता है। भारत सहित समस्त आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाएँ इस अग्निपरीक्षा से अछूती नहीं रहेंगी। बढ़ती ऊर्जा लागत, परिवहन व्यय में विस्तार और मुद्रास्फीति की तीव्रता—ये सभी कारक वैश्विक विकास दर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

सबसे अधिक चिंता का विषय है होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे होकर प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल—जो वैश्विक आपूर्ति का लगभग पाँचवाँ भाग है—तथा विश्व की लगभग एक-चौथाई तरलीकृत प्राकृतिक गैस का प्रवाह होता है। यदि यह सामरिक समुद्री मार्ग बाधित होता है, तो ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति-संकट गहरा सकता है। मात्र अवरोध की आशंका ने ही ब्रेंट क्रूड की कीमतों को तीव्रता से ऊपर धकेल दिया है, और विश्लेषकों ने संभावित रूप से 130 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचने की चेतावनी दी है।

ऊर्जा कीमतों में प्रत्येक 10 डॉलर की वृद्धि उपभोक्ता मुद्रास्फीति में लगभग 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकती है। यदि यह प्रवृत्ति स्थायी हुई, तो अमेरिका जैसे देशों में ब्याज दरों पर दबाव बढ़ेगा और केंद्रीय बैंक—विशेषकर Federal Reserve—को मौद्रिक सख्ती अपनानी पड़ सकती है। इसका परिणाम वैश्विक पूंजी बाजारों में अस्थिरता और निवेश में कमी के रूप में सामने आ सकता है। पहले ही 37 ट्रिलियन डॉलर के राष्ट्रीय ऋण से जूझ रही अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए यह परिदृश्य और भी जटिल हो सकता है।

वित्तीय बाजारों की प्रतिक्रिया भी तत्काल और तीव्र रही है। इज़राइल के प्रारंभिक हमलों के पश्चात अमेरिकी S&P 500 तथा यूरोप के STOXX Europe 600 में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों—सोना और अमेरिकी डॉलर—की ओर अग्रसर हो रहे हैं, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न हो सकता है।

समुद्री व्यापार भी इस संघर्ष का दुष्प्रभाव झेल रहा है। लाल सागर क्षेत्र में अस्थिरता और बीमा प्रीमियम में लगभग 30 प्रतिशत तक वृद्धि ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित किया है। एशिया से आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति वस्तुओं की उपलब्धता और कीमत दोनों को प्रभावित कर सकती है।

इज़राइल की अर्थव्यवस्था स्वयं भी युद्धजनित व्ययों के कारण दबाव में है। विशेषज्ञों के अनुसार, दीर्घकालिक संघर्ष देश के सकल घरेलू उत्पाद पर गंभीर आघात पहुँचा सकता है। दूसरी ओर, यदि अमेरिका प्रत्यक्ष रूप से इस युद्ध में संलग्न होता है, तो इराक और अफगानिस्तान जैसे पूर्व अनुभवों की भाँति भारी वित्तीय बोझ और भू-राजनीतिक जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

समग्रतः, ईरान–इज़राइल युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता और विकास की संभावनाओं पर गहरे प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। तेल संकट, आपूर्ति अवरोध और मुद्रास्फीति—ये केवल प्रारंभिक संकेत हैं; वास्तविक चुनौती दीर्घकालिक आर्थिक संतुलन बनाए रखने की होगी। ऐसे समय में कूटनीति ही वह सेतु बन सकती है, जो विश्व को 1970 के दशक जैसी ‘स्टैगफ्लेशन’ की आशंका से दूर रखे।

विश्व एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है—जहाँ सामरिक निर्णयों का प्रत्यक्ष प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनों पर पड़ रहा है। अतः संयम, संवाद और बहुपक्षीय कूटनीति ही इस संकट से उबरने का विवेकपूर्ण मार्ग प्रतीत होते हैं।

*इजरायल, अमेरिका नें ईरान के 30 इलाकों पर किया हमला*

इजरायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ “प्रीवेंटीव अटैक” यानी एहतियाती सैन्य कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है। शनिवार सुबह इजरायल के रक्षा मंत्री ने इस ऑपरेशन की पुष्टि की। इसके साथ ही इजरायली सेना ने पूरे देश में प्रोएक्टिव अलर्ट जारी कर सायरन बजाए, ताकि संभावित मिसाइल हमलों से पहले लोग सुरक्षित जगहों पर पहुंच सकें। सरकार ने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

इस बीच तेहरान में कई जोरदार धमाकों की खबर सामने आई है। स्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शहर के मध्य इलाके में पहले तीन धमाके सुने गए और उसके बाद दो और विस्फोटों की सूचना मिली। ईरान की सरकारी मीडिया ने उत्तरी तेहरान के सैय्यद खानदान इलाके में भी धमाकों की आशंका जताई है। हालांकि अब तक वहां के अधिकारियों ने हमले की आधिकारिक पुष्टि या नुकसान का पूरा विवरण जारी नहीं किया है।

बताया जा रहा है कि शुरुआती चरण में देश के करीब 30 ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें खुफिया एजेंसियों की इमारतें, एयरपोर्ट, राष्ट्रपति भवन और कुछ रिहायशी इलाके भी शामिल बताए जा रहे हैं। हमले के बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस भी बंद कर दिया है। इजरायल ने इस सैन्य अभियान को “शील्ड ऑफ जूदा” नाम दिया है।

ईरान नें भी जवाबी हमला बोला, इजरायल पर दागी 70 बैलिस्टिक मिसाइलें*

ईरान और इजरायल के बीच तनाव अब खुली जंग में बदलता दिखाई दे रहा है। ईरान ने इजरायल पर बड़ा जवाबी हमला करते हुए करीब 70 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।

इजरायली सेना, यानी Israel Defense Forces (IDF) के मुताबिक ईरान से इजरायल की ओर मिसाइल लॉन्च होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और सुरक्षा सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तरी इजरायल के कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। संभावित हमलों को रोकने के लिए इजरायल ने अपने एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी एक्टिवेट कर दिया है। हालात को देखते हुए देशभर में नेशनवाइड इमरजेंसी और स्पेशल स्टेट ऑफ इमरजेंसी घोषित कर दी गई है।

इस दौरान पूरे इजरायल में सायरन बज रहे हैं और लोगों को सलाह दी गई है कि वे सुरक्षित स्थानों और बॉम्ब शेल्टर के पास ही रहें। खतरे को देखते हुए होम फ्रंट कमांड की ओर से प्रभावित इलाकों के लोगों के मोबाइल फोन पर भी अलर्ट और जरूरी निर्देश भेजे गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार*प्रधानमंत्री MODI की इज़राइल यात्रा; मोदी के साथ गए कई भारतीय पत्रकार फंसे*

 

*अब तक किसी भी पत्रकार के हताहत या घायल नहीं हैं*

 

नई दिल्ली/तेल अवीव। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया इज़राइल यात्रा के दौरान गए कुछ भारतीय पत्रकार अभी भी इज़राइल में मौजूद हैं। इस बीच क्षेत्र में तनाव बढ़ने और ईरान के साथ सैन्य टकराव की खबरों के बीच वहां अलर्ट जारी कर दिया गया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इज़राइल में मौजूद *पत्रकारों में Vishal Pandey (ABP News), बृज मोहन (साधना), मनीष चंद, लोमस और प्रमोद (IANS), तथा Aditya Raj Kaul (NDTV) शामिल* बताए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद भारतीय नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों की जानकारी सरकार के साथ साझा की है। इज़राइल में हालात को देखते हुए सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा पूरी कर भारत लौट चुके हैं, लेकिन मीडिया प्रतिनिधि कवरेज के सिलसिले में वहीं रुके हुए थे। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में है और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी में है।

हालांकि, अब तक किसी भी पत्रकार के हताहत होने या घायल होने की कोई सूचना नहीं है। सरकार की ओर से स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।

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