इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बनी क्रांतिकारी शालू सैनी मुर्दों से निभा रही है प्रेम का रिश्ता
1 min read
*इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बनी क्रांतिकारी शालू सैनी मुर्दों से निभा रही है प्रेम का रिश्ता*
मानवता की मिसाल बन रही क्रांतिकारी शालू सैनी, का मुर्दों से है पुनर्जन्म का रिश्ता आज फिर एक ही दिन में दो असहाय मृतकों का किया सम्मानजनक अंतिम संस्कार
मुजफ्फरनगर, 8 जून 2026।
क्रांतिकारी शालू सैनी ने आज एक बार फिर मानवता और सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए दो अलग-अलग स्थानों से प्राप्त लावारिस एवं असहाय मृतकों के शवों का पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया
प्राप्त जानकारी के अनुसार पहली मृतक देह की सूचना ककरौली थाना क्षेत्र से प्राप्त हुई, जबकि दूसरी मृतक देह की सूचना नई मंडी थाना क्षेत्र से मिली। सूचना मिलते ही क्रांतिकारी शालू सैनी सक्रिय हुईं और दोनों मृतकों के अंतिम संस्कार की समुचित व्यवस्था की।
नई मंडी श्मशान घाट पर धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार श्रद्धा के साथ अंतिम संस्कार सम्पन्न किया जिन लोगों के अपने इस संसार में नहीं रहे, उनके लिए क्रांतिकारी शालू सैनी परिवार बनकर खड़ी दिखाई दी। यह दृश्य उपस्थित लोगों की आंखों को नम कर गया।
क्रांतिकारी शालू सैनी ने कहा कि मृत्यु के बाद हर व्यक्ति को सम्मानजनक विदाई मिलना उसका मूल अधिकार है। जिन लोगों का इस दुनिया में कोई नहीं होता, उनके लिए में हमेशा उनकी वारिस बनकर साथ खड़ी हु उन्होंने कहा कि मेरा उद्देश्य केवल सेवा करना नहीं, बल्कि हर दिवंगत आत्मा को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देना भी है।
स्थानीय लोगों ने उनके द्वारा किए जा रहे इस मानवीय कार्य की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में जब कई लोग अपनों से भी दूरी बना लेते हैं, तब शालू सैनी असहाय मृतकों के लिए परिवार की भूमिका निभा रही है। यह सेवा समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
क्रांतिकारी शालू सैनी द्वारा वर्षों से लगातार लावारिस, असहाय एवं अज्ञात मृतकों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कर मानवता की ऐसी मिसाल कायम की जा रही है, जो न केवल समाज को संवेदनशील बनाती है बल्कि यह संदेश भी देती है कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।
“जब अपने साथ छोड़ देते हैं, तब मानवता का हाथ थामने वाली शालू सैनी जैसी बेटियां समाज की सबसे बड़ी शक्ति बन जाती हैं।”


