कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में छात्राओं को दिया गया आत्मरक्षा का सशक्त प्रशिक्षण
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*कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में छात्राओं को दिया गया आत्मरक्षा का सशक्त प्रशिक्षण*
*छात्राओं को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में खेल अधिकारी पूनम बिश्नोई का अहम योगदान*
*बालिकाओं को जीवन में सुरक्षा और आत्मविश्वास सिखाने का अनूठा प्रयास*
*मातृशक्ति आत्मरक्षा दिवस के शुभ अवसर पर विशेष आयोजन*
*2009 से निरंतर मनाया जा रहा है मातृशक्ति आत्मरक्षा दिवस*
*रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा शिविर के माध्यम से रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित पूनम बिश्नोई द्वारा दिया गया प्रशिक्षण*
मुजफ्फरनगर संवाददाता: मातृशक्ति आत्मरक्षा दिवस के शुभ अवसर पर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में आत्मरक्षा प्रशिक्षण का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। वर्ष 2009 से निरंतर मनाए जा रहे इस दिवस के अंतर्गत छात्राओं को सशक्त, सजग और आत्मनिर्भर बनाने का संदेश दिया गया।
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा शिविर के माध्यम से रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित खेल अधिकारी पूनम बिश्नोई ने छात्राओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने चार सरल एवं प्रभावी तकनीकों का प्रदर्शन करते हुए बताया कि आत्मरक्षा केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि सही तकनीक, समझदारी और आत्मविश्वास का विषय है। उन्होंने कहा आप सभी को न केवल शिक्षा में, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनना चाहिए। आत्मरक्षा का ज्ञान आपको किसी भी संकट में साहस और संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।”
कार्यक्रम के दौरान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के साहस और शौर्य को स्मरण किया गया। प्रसिद्ध पंक्तियाँ “खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी,
बुंदेले हर बोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी।” ने छात्राओं में जोश और आत्मबल का संचार किया।
विद्यालय की वार्डन बबीता शर्मा, ममता शर्मा, शिल्पा, पूनम, मंजू, रजनी एवं अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं ने कार्यक्रम के सफल संचालन में सक्रिय सहयोग दिया। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में भाग लिया और आत्मरक्षा के विभिन्न तरीकों को सीखकर आत्मविश्वास में वृद्धि महसूस की। विद्यालय प्रशासन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि बालिकाएं हर परिस्थिति में सुरक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बन सकें।
कार्यक्रम का समापन देशभक्ति के उद्घोष के साथ हुआ “देश है पुकारता, पुकारती मां भारती, आओ हम सब मजबूत होकर उतारें भारत मां की आरती।”


