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June 21, 2026

Suraj Kesari

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फैसले पर भावुक हुए केजरीवाल. शराब नीति केस में ऐतिहासिक फैसला

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फैसले पर भावुक हुए केजरीवाल. शराब नीति केस में ऐतिहासिक फैसला

अरविंद केजरीवाल मनीष सिसोदिया सहित 23 लोगों को अदालत ने दिल्ली की कोर्ट ने इल्जाम से मुक्त कर दिया। दिल्ली के जी शराब घोटाले की धूम कई सालों से रही है सीबीआई कोई ठोस सबूत नहीं जुटा पाई। कोई गवाह पेश नहीं कर पाई कोई बयान नहीं ला पाई। कोई सबूत नहीं ला पाई । कोर्ट ने सीबीआई के सभी आरोपी को बेदम कारार देते हुए इस मुकदमे को आगे चलने यानी ट्रायल करने तक से इनकार कर दिया और अरविंद केजरीवाल मनीष सिसोदिया समेत 23 लोगों को बारी कर दिया। इससे कई प्रश्न खड़े हुए हैं क्या एजेंसियों का दुरुपयोग है अगर इस मामले में कोर्ट का फैसला देखें तो ,यस , प्रोसेस ईज, दा, पनिशमेंट, ऐसा यही प्रतीत होता है। ऐसे कई मामले हैं जहां पर। टाइमिंग देखकर कार्रवाई की गई। इस मामले पर भी क्या वही बात थी जवाब है हां, कानूनी जानकार लोगों के बीच एक जुमला है जो बड़ा लोकप्रिय है प्रोसेस ईज, दा, पनिशमेंट, आप दोषी हैं आप निर्दोष हैं यह बात जब साबित होगी जब प्रोसेस चक्र कंप्लीट कर लेगा यानी कानून जब अपना पूरा चक्र पूरा करने का काम कर लेगा। उसके बाद यह साबित होगा क्या आप दोषी थे या निर्दोष लेकिन उसे प्रक्रिया में, आपका क्या नुकसान हुआ है क्या-क्या आपको यातनाएं झेलनी पड़ी है उसे आपकी रेपुटेशन का क्या लॉस हुआ है इसका कोई बहुत ही स्पष्ट प्रावधान नहीं है है कानून कोई गलत किया हो तो आप कार्रवाई कर सकते हैं। लेकिन ना तो इससे कोई आप प्रतिष्ठा हासिल कर सकते हैं ना खोया हुआ अपना सम्मान। ना खोई,राजनीतिक विरासत। अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी पर शराब घोटाला बहुत महंगा पड़ा। इतना महंगा कि शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। उनकी पार्टी को तोड़ने की और बर्बाद करने की पूरी कोशिश इसी शराब घोटाला की वजह से हुई। और उनकी इमेज पर बहुत जबरदस्त नुकसान पहुंचा था। अरविंद केजरीवाल खुद को कट्टर ईमानदार कहते थे और उनके ऊपर शराब घोटाला हुआ उसके बाद मीडिया ट्रायल और उसके बाद सीबीआई की चार्ज शीट ई,ड,का इंवॉल्वमेंट इन सब की वजह से अरविंद केजरीवाल खुद 165 दिनों तक जेल में रहे। मनीष सिसोदिया तो लगभग 560 दिन के आसपास। संजय सिंह 6 महीना जेल में रहे सत्येंद्र जैन भी 500 दिनों से ज्यादा जेल काटकर बाहर आए। और भी तमाम नेता जेल में रहे। कोर्ट का कहना है सीबीआई के पास ना तो कोई गवाह है ना कोई सबूत है और ना कोई सीबीआई प्रमाण दे पाई। की शराब घोटाले में आपराधिक साजिश हुई है क्या कोई मनी लांड्रिंग हुई है या कोई पैसे का लेनदेन हुआ है। जिनको सीबीआई ने गवाह बनाया अधिकांश उसमें वादा माफ गवाह थे जो अभियुक्त बनाए गए थे उन्हीं को बाद में गवाह बना लिया गया और वह अपने समर्थन में कोई सबूत भी नहीं प्रस्तुत कर पाए। आप टाइमिंग देखें जिस वक्त शराब घोटाले का आरोप लगा उसके बाद जो चुनाव हुए और उन चुनाव में आम आदमी पार्टी पर सबसे बड़े दो इल्जाम लगे थे। इल्जाम नंबर एक शराब घोटाला। जो आज कोर्ट उल्टा गिरा। जिसके चक्कर में पूरी आम आदमी पार्टी पर एजेंसियों ने कहर,और सितम ढाए। जिसको देखकर काफी विपक्षी दलों ने सबक सीखा, दूसरा था शीश महल का ।आज भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। शराब घोटाले का अगर हम जिक्र करें तो एक्शन क्या हुआ उन लोगों के खिलाफ जिन्होंने केजरीवाल और उनकी पूरी टीम को बर्बाद करने और बदनाम करने की चेष्टा की अगर यह एजेंसियों का दुरुपयोग है वैसे हमारे देश में एजेंसी के दुरुपयोग की कई मिशार्ले हैं जहां पॉलिटिकल एजेंसियों का इस्तेमाल किया गया अलग-अलग वक्त में अलग-अलग सरकारों ने अलग-अलग ब्यूरो ने अपने विपक्षों का उत्पीड़न करने के लिए एजेंसियों का सहारा लिया। मैं कहीं ऐसे उदाहरण है मुलायम सिंह यादव मायावती यह सब अपने-अपने टाइम में केंद्र के शिकार रहे हैं। केंद्रीय राजनीति में। यह जो शराब घोटाला है यह अप्रत्याशित था ना घोटाले के कोई कागजात थे। ना घोटाले की कोई रकम थी। ना घोटाले का कोई लिंक था। लेकिन बस एक ही नारा था कि घोटाला हुआ है। साउथ तक की लॉबी को ढूंढ लाया गया । क, सी, आर, की बेटी को और हमें लगता है कि वह भी बेकसूर निकलेगी। तो कुल मिलाकर इसमें नुकसान किसका हुआ नुकसान आम आदमी पार्टी के उसे कीमती वक्त का हुआ। नुकसान उन लोगों की छवि का हुआ। दिल्ली की सरकार आम आदमी पार्टी ने गवा दी, दिल्ली का मिनी कॉरपोरेशन भी उनके हाथ से निकल गया और पंजाबी उनके सामने मुंह बनाए खड़ा हुआ है क्योंकि उत्तर प्रदेश के बाद वहां भी चुनाव है। पूरी आम आदमी पार्टी जेल में अब लड़ो चुनाव। रेपुटेशन अलग खराब। आज भारतीय जनता पार्टी दिल्ली की सरकार बने हुए हैं। यह तो बात हुई दिल्ली की हम उत्तर प्रदेश का भी एक उदाहरण आपको बताते हैं। अयोध्या के मोहित खान जिनके खिलाफ बलात्कार के गंभीर आरोप लगाए गए्। 19 महीने के बाद वह भी जेल से बाहर आए हैं। उनको भी निर्दोष बरी किया गया। कोई गवाह नहीं था कोई सबूत नहीं था। लेकिन 19 महीने में मोहित खान ने सब कुछ गवा दिया। इज्जत गवाही घर गवाया सम्मान गवाया। पैसा गवाया और बदनामी अलग हुई्। लेकिन किसी ने यह नहीं कहा की मोहित खान को इस कगार पर पहुंचने वाले के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। इस मसले पर एक व्यापक सोच की आवश्यकता है्। क्योंकि हर वक्त हर कोई सत्ता में नहीं होता यह उन लोगों पर बहुत भारी पड़ता है जो लोग सत्ता को दुरुपयोग एजेंसी का दुरुपयोग करते हैं और हमारे उत्तर प्रदेश में ऐसे कई उदाहरण है। देश में कई उदाहरण है साउथ में तो गजब के उदाहरण है। लेकिन उदाहरण से कोई सबक सीख ना नहीं चाहता। , यह फैसला हमारे देश में हाल के सालों में जिस तरीके से जो हमारी प्रीमियम एजेंसीज हैं जांच की उनकी ए कुशलता जो वातावरण था उसको बढ़ाया है। जिस तरह से केजरीवाल की पार्टी के नेता जेल में रहे और जिस तरह से यह फैसला आया है सियासत में जो लोग यह कहते हैं कि बदले की भावना से कार्रवाई नहीं होती है वह एकदम साफ दिखाई दे रहा है। बदले की भावना से कार्यवाही हुई अब कोई प्रेम की भावना रह नहीं गई। दिल्ली में केजरीवाल षड्यंत्र का ऐसा शिकार हुए कि वहां पर मुख्यमंत्री तक बदलना पड़ा। और उनको दो बार जेल में रहना पड़ा पार्टी के सारे बड़े नेता जेल में रहे। जेल आम आदमी पार्टी के नेताओं से भर दी गई। यह तो आम आदमी पार्टी खत्म हो जाती अगर पंजाब में उनकी सरकार न होती। सरकारी एजेंसी पर आज सवाल खड़ा होता है। और लोगों इस बात पर चर्चा कर रहे थे के बीजेपी और कांग्रेस में समानता का अंतर क्या रह गया। कांग्रेस एजेंसी का दुरुपयोग करती थी विरोधियों को फसाने के लिए करती थी वही काम बीजेपी के जमाने में होने लगा। जो पार्टी कर चरित्र और चिंतन को महत्व देती है जिसका आदर्श पारदर्शिता का नारा रहा हो जिसे सब सम्मान करते हैं उनके राज में ऐसा काम होना बड़ा सवालिया निशान लगा दिया गया। भाजपा के लिए काफी आलोचना का वक्त है। उनको यह सहना पड़ेगा क्योंकि केजरीवाल को अदालत में और उनके नेताओं को बरी कर दिया है। सरकार तो गई गई सुकून और सम्मान सब चला गया। कोई अपनी खुशी से तो जेल जाता नहीं शराब के घोटाले में गए बहुत बदनाम हुए। लेकिन आज यह बात इतिहास में दर्ज हो गई एक केंद्र के एजेंसी ने जाति की थी। उसे जाति का परिणाम अब सामने आया है। अपने विरोधियों को फसाने के लिए केंद्रीय एजेंसी का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। बीजेपी में यह ट्रेंड ठीक नहीं है जब आप बिना फसे चुनाव जीत रहे हो तो फिर फसाने की क्या जरूरत है बीजेपी वैसे भी चुनाव जीत रही है हर जगह तो फिर फसाने की क्या जरूरत। यह सब करने से उसकी आलोचना मिलती है। कांग्रेस यह उम्मीद लगाई थी कि हम पंजाब में सरकार बनाएंगे लेकिन जैसे केजरीवाल आज रो है वैसे ही कांग्रेस का दिल रोया है आज कि यह भी हाथ से चला गया। । जब आप सही हो और ताकतवर आपसे मुकाबले में जीत जाए तो फिर अल्लाह के भरोसे छोड़ देना चाहिए फिर ईश्वर इंसाफ करता है।

लेखक शमशाद रशीद माहीगीर

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