उत्तर प्रदेश विधानसभा में क्या कहा योगी आदित्यनाथ ने
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*उत्तर प्रदेश विधानसभा में क्या कहा योगी आदित्यनाथ ने : नौ वर्षों में बॉटम-3 से टॉप-3 राज्यों में पहुंचा उत्तर प्रदेशः सीएम योगी*
*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में की बजट 2026-27 की उपलब्धियों और वित्तीय अनुशासन की सराहना*
*सीएम योगी बोले- नौ वर्षों में आया परिवर्तन स्पष्ट नीति, शुद्ध नीयत और प्रभावी वित्तीय प्रबंधन का परिणाम*
*मुख्यमंत्री ने बजट को बताया ऐतिहासिक, प्रदेश में पहली बार किसी सीएम को दसवां बजट प्रस्तुत करने का मिला अवसर*
*बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर को दी गई प्राथमिकता, इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाया गया एक रुपये का निवेश पांच से छह गुना प्रतिफल देता हैः सीएम*
*लखनऊ, 20 फरवरी।* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर विधानसभा में हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बॉटम थ्री राज्यों की श्रेणी से निकलकर देश के टॉप थ्री राज्यों में स्थान बनाया है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन स्पष्ट नीति, शुद्ध नीयत और प्रभावी वित्तीय प्रबंधन का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने 9,12,696 करोड़ रुपये के इस बजट को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को दसवां बजट प्रस्तुत करने का अवसर मिला है। उन्होंने विपक्ष द्वारा वित्तीय स्वीकृतियों पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि स्वीकृतियां समय पर जारी की जाती हैं और व्यय प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।
*बजट पर विपक्ष को दिखाया आईना*
राजकोषीय अनुशासन पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष को आइना दिखाते हुए कहा कि वर्ष 2016-17 में राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 4.39 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर 2.97 प्रतिशत रह गया है। इसी प्रकार ऋणग्रस्तता भी लगभग 30 प्रतिशत से घटकर 26 प्रतिशत के आसपास आ गई है और 2026-27 तक इसे 23 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि 2016-17 में प्रति व्यक्ति आय लगभग 43,000 रुपये थी, जो 2024-25 के अंत तक 1,20,000 रुपये से अधिक हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन उत्तर प्रदेश की आर्थिक मजबूती और विकास की गति को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016-17 में उत्तर प्रदेश बड़े राज्यों में निचले पायदान पर था, लेकिन आज प्रदेश ने अपनी जीएसडीपी को 13 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया है और 2026-27 में इसे 40 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
*कैपिटल एक्सपेंडिचर को दी गई प्राथमिकता*
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुदान की मांगों पर चर्चा का उद्देश्य विभागों को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही योजनाबद्ध तरीके से कार्य प्रारंभ करने के लिए मार्गदर्शन देना है। सभी विभाग अपनी-अपनी कार्ययोजनाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं जिससे बजट का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कैपिटल एक्सपेंडिचर को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2016-17 में यह लगभग 71,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1,77,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे में निवेश से रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया निवेश केवल ढांचा निर्माण नहीं करता, बल्कि रोजगार सृजन, उद्योगों के विस्तार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाया गया एक रुपये का निवेश पांच से छह गुना प्रतिफल देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य इसी बजट के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और यह बजट उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
*संवाद ही समाधान का मार्ग*
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने सदन के संचालन के लिए अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दो सप्ताह तक चले बजट सत्र में महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण से लेकर विभिन्न नियमों के अंतर्गत उठाए गए विषयों और बजट पर विस्तृत चर्चा तक, सभी मुद्दों पर सार्थक विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था के रूप में विधानसभा की गरिमा और जिम्मेदारी का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सामान्य बजट 2026-27 को उनके सहयोगी वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन में प्रस्तुत किया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय और वरिष्ठ सदस्य शिवपाल सिंह यादव सहित सभी सदस्यों के वक्तव्यों को ध्यानपूर्वक सुना और सुझावों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने बताया कि बजट चर्चा में सत्ता पक्ष के 109 और विपक्ष के 58 सदस्यों सहित कुल 167 सदस्यों ने भाग लिया। अनुदान की मांगों पर भी व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने इसे स्वस्थ संसदीय परंपरा का उदाहरण बताया और कहा कि संवाद ही समाधान का मार्ग है।
*बजट पर चर्चाः सीएम योगी – कॉपी – 2*
*लीकेज रोके, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया और वित्तीय अनुशासन को मजबूत कियाः मुख्यमंत्री*
*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- स्पष्ट नीति और शुद्ध नीयत से बदला प्रदेश का परसेप्शन*
*वित्तीय प्रबंधन से मजबूत हुई विकास की नींवः मुख्यमंत्री*
*लखनऊ, 20 फरवरी।* उत्तर प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने लीकेज रोके, भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया और वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया है। यही कारण है कि आज उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है और प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश के प्रति परसेप्शन में देश-विदेश में व्यापक बदलाव आया है। आज प्रदेश का नागरिक सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। यह परिवर्तन स्पष्ट नीति, पारदर्शी कार्यशैली और शुद्ध नीयत का परिणाम है।
*कर्जमाफी का निर्णय भी बना वित्तीय प्रबंधन का उदाहरण*
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब लघु एवं सीमांत किसानों की कर्जमाफी का निर्णय लिया गया, तब भी सवाल उठे थे कि संसाधन कहां से आएंगे। सरकार ने किसी बैंक या वित्तीय संस्था से ऋण लिए बिना, बजट संसाधनों से 86 लाख किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ किए। यह वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के कुशल प्रबंधन का उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पीएलए (पर्सनल लेजर अकाउंट) प्रणाली में सुधार कर अनावश्यक रूप से धन के डंप होने की प्रवृत्ति को रोका। योजनाओं के लिए आवश्यकतानुसार ही धन जारी किया जा रहा है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन का अक्षरशः पालन किया जा रहा है। वित्तीय अनुशासन के कारण ही राजकोषीय प्रबंधन संतुलित हुआ है और विकास परियोजनाओं को गति मिली है।
*सीडी रेशियो में सुधार, प्रदेश में ही हो रहा निवेश*
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2016-17 में प्रदेश का क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो लगभग 43-44 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 61-62 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसका अर्थ है कि उत्तर प्रदेश के नागरिकों द्वारा बैंकों में जमा किया गया धन अब अधिक मात्रा में प्रदेश के भीतर ही निवेश हो रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर उद्योग, व्यापार और स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं और उनके अनुरूप ही परिश्रम भी किया जा रहा है। वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और पूंजीगत निवेश की रणनीति ने प्रदेश की विकास यात्रा को नई दिशा दी है।
*बजट सत्र 2026-27 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश विधान सभा में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संबोधन*
काफी सदस्यों ने इस बजट सत्र में भाग लिया, 169 सदस्यों ने इस चर्चा में भाग लिया, सभी को हृदय से धन्यवाद।
लोकतंत्र की इस सर्वोच्च संस्था के रूप में विधायिका अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है, सदन का जो भी एजेंडा था, उसके अनुरूप कार्यवाही चली है : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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शिवपाल जी का श्राप नेता प्रतिपक्ष पांडेय जी को न लगे,ये मैं कामना करता हूँ
इस सदन में बजट पर चर्चा कर रहे हैं,तो यह 2026-27 का बजट है,सदन देर रात तक चलता रहा,उत्तरप्रदेश इतिहास में पहली बार हुआ किसी मुख्यमंत्री को दसवी बार बजट पेश करने का अवसर प्राप्त हुआ है
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मुझे लगता था कि नेता प्रतिपक्ष उम्र के हिसाब से आंकड़ों में घालमेल नही करेंगे, लेकिन लगा कि चच्चू का प्रभाव उनपर आ गया, राजकोषीय घाटे को लेकर वित्तमंत्री जी ने तत्काल बात उनकी बात को सही किया : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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जो राजकोषीय घाटा है, जो कुल GSDP का उसके बारे में अगर आप देखेंगे तो 2016-17 जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब इसका प्रतिशत था 4.39 प्रतिशत और आज के दिन पर 25-26 में हम इस समय 25-26 में हैं, इस समय है यह 2.97 प्रतिशत है ये, यानी उससे काफी कम है, इसका मतलब हमारा वित्तीय प्रबंधन बेहतर है और इस वित्तीय प्रबंधन के लिए ही आज देशभर के बैंकर्स यूपी पे विश्वास करते हैं।
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समाजवादी पार्टी सरकार में ऋणग्रस्तता 2016-17 में लगभग 30 फीसदी थी और आज यह 26 फीसदी के आसपास है…
इस वित्तीय वर्ष के अंत तक हम लोगों ने 2026-27 में का वित्तीय वर्ष समाप्त होगा वहाँ तक हम उसको 23 प्रतिशत तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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प्रति व्यक्ति आय उत्तर प्रदेश की जो प्रति व्यक्ति आय थी 2016-17 में लगभग 43,000 के आसपास थी और जब हम लोग इस वित्तीय वर्ष के अंत में यानी 31 मार्च तक जाएंगे तो यह 1,20,000 क्रॉस कर चुकी होगी, क्या 43,000 में और 1,20,000 में कोई अंतर नहीं है…!!!
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समाजवादी पार्टी के समय में उत्तर प्रदेश क्या था?
पांडे जी पुराने समाजवादी हैं और मैंने इसीलिए कहा कि आप स्वस्थ रहें, क्योंकि आप समाजवादी आंदोलन के जो सबसे वरिष्ठ पिलर हैं और अंतिम वह पीढ़ी है जिसने समाजवादी आंदोलन के अनुसार जीवन जीने का प्रयास किया है, जो जेपी चाहते थे, जो लोहिया चाहते थे।
आपके पीछे शिवपाल जी जैसे कुछ लठैत भी थे जो उसके अनुसार जीने का प्रयास करते थे, लेकिन आप लोगों ने उसके अनुरूप संघर्ष किया, लेकिन आने वाली पीढ़ी ने प्रदेश का क्या हाल किया? क्या स्थिति थी उत्तर प्रदेश की? और हम इस बात को कहते हैं : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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2016-17 में उत्तर प्रदेश की जो स्थिति थी, उत्तर प्रदेश देश के अंदर सबसे यानी बड़े राज्यों में से है, अगर आप देखें तो बॉटम थ्री राज्यों में आता था, जो सबसे नीचे के राज्यों में उत्तर प्रदेश की गिनती होती थी और बीमारू राज्य उत्तर प्रदेश हो गया था, परसेप्शन खराब था। देश भर में आपको जाने का अवसर प्राप्त होता था तो लोग किस निगाह से देखते थे उत्तर प्रदेश को, आपसे ज्यादा कोई छुपा हुआ नहीं है, लेकिन
इन साढ़े 8-नौ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश के अंदर जो परिवर्तन आया है, बॉटम थ्री से टॉप थ्री राज्यों में उत्तर प्रदेश को पहुँचाने का काम इसी डबल इंजन सरकार ने किया है टॉप थ्री राज्यों में..
13 लाख करोड़ रुपए की उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी को पहुँचा करके हम 36 लाख करोड़ तक पहुँचा रहे हैं और हमने तय किया है कि 26-27 में इसको 40 लाख करोड़ तक पहुँचाएँगे…
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2017 के पहले कोई भी व्यक्ति रहा होगा, कोई भी व्यक्ति रहा होगा तो उत्तर प्रदेश का कोई भी नौजवान था, कोई भी नागरिक था, किसी भी तबके का कोई व्यापारी हो, उद्यमी हो, कोई भी रहा हो, वह देश के अंदर जाता था उसके बारे में अच्छी धारणा नहीं होती थी, लोग शक की निगाहों से देखते थे और आप लोगों ने तो कुछ जनपदों को ऐसा बना दिया था कि उस जनपद के नाम पर लोग होटल में कमरे नहीं देते थे, धर्मशालाओं में रहने की व्यवस्था नहीं करने देते थे, नहीं रहने देते थे, लेकिन आज मैं कह सकता हूँ कि हमारे उत्तर प्रदेश का नागरिक देश के अंदर और दुनिया के अंदर कहीं जाता है तो दुनिया गौरव से चेहरा सामने वाले का चेहरा चमकता है, अच्छा उत्तर प्रदेश से! यह परसेप्शन, यह जो परिवर्तन आया है, यह सरकार की नीतियों के कारण, स्पष्ट नीति और शुद्ध नियत के नाते यह परिवर्तन देखने को मिला है : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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हम लोग आए थे बजट प्रदेश का खजाना खाली, बैंक कोई पैसा देने को तैयार नहीं, हां, हमने लीकेजेस रोके, भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया और प्रभावी अंकुश लगाने का परिणाम था कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होती हुई दिखाई दी..
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भारत मण्डपम में कांग्रेस ने अराजकता फैलाई, शर्मनाक घटना की गई कांग्रेस द्वारा, भारत की छवि खराब करने का प्रयास कांग्रेस द्वारा किया गया : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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उत्तर प्रदेश में 2016-17 में जो कैपिटल एक्सपेंडिचर था वह 71,000 करोड़ रुपए के आसपास था और आज यह है 1,77,000 करोड़ रुपए से अधिक का। आप अनुमान करें कि सरकार किस रूप में इसको आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है और अगर आप इसको देखेंगे कि ये चीज और ये देश के अंदर सर्वाधिक है,ऐसा नहीं कि इसमें हम कहीं पीछे हों, सबसे ज्यादा देश के अंदर है, सबसे ज्यादा….
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पहली बार उत्तर प्रदेश ने अपना आर्थिक सर्वेक्षण भी सदन के अंदर प्रस्तुत किया है और मुझे लगता है आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करने के लिए काफी दिनों से काम चल रहा था, वित्त मंत्री जी कह रहे थे कि हमें करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। मैंने कहा, असमंजस की स्थिति नहीं होनी चाहिए, अगर हमने काम किया है तो वह आंकड़े आने ही चाहिए सभी के सामने, सबके सामने प्रस्तुत किए जाने चाहिए और ये प्रस्तुत यहां पर पहली बार उत्तर प्रदेश पहला राज्य होगा जिसने आर्थिक सर्वेक्षण सदन के सामने प्रस्तुत किया है : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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अब प्रदेश के अंदर टेक्नोलॉजी है, ट्रस्ट है और ट्रांसफॉर्मेशन, ये ट्रिपल टी की त्रिवेणी हमें हर एक स्तर पर देखने को मिलती है,आज हमने इस दिशा में जो प्रयास किए हैं और उसी दिशा में आज प्रदेश सरकार के द्वारा ये प्रयास, ये बजट उसी का परिणाम है और उसी को हम आगे बढ़ाने के क्रम में आज यहां पर आए हैं…
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एक समय था जब दुनिया के अंदर “ऑयल इकोनॉमी” मानी जाती थी, यानी जिसके पास तेल है अर्थव्यवस्था पर उसका कब्जा है…
बाद में जितनी भी अन्य टेक्नोलॉजी आई, जिसको आप आज की इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के रूप में जानते हैं या फिर अलग-अलग समय में आई जिसका एकाधिकार था उन लोगों ने उस पर अपना आधिपत्य स्थापित करने का प्रयास किया..
लेकिन आज के समय में जो हमारा मानना है कि और पूरी दुनिया भी इस बात को मानती है कि AI ही ऑयल का स्थान लेने वाला है और किस रूप में लेने जा रहा है इसके बारे में सबसे पहली जो रिक्वायरमेंट उसकी है वो डाटा सेंटर की है, और डाटा सेंटर की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के अंदर ने अपने कई कदम बढ़ाए हैं…
हमने उसके लिए डाटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है, 2017 के पहले उत्तर प्रदेश के अंदर डाटा सेंटर नहीं थे लेकिन हम लोगों ने इसके बाद डाटा सेंटर स्थापित करने की कार्रवाई की है और अब तक हमारे पास कई डाटा सेंटर यूपी के अंदर स्थापित हो चुके हैं : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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आप दलितों की बात कर रहे थे, पिछड़ों की बात कर रहे थे कि हम समाजवादी करते थे, लेकिन आप लोग भूल गए कि चार बार समाजवादी पार्टी की सरकार थी और हर वर्ष 1200 से 1500 मौत अनुसूचित जाति, अति पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक समुदाय और गरीबों के बच्चों की होती थी केवल इंसेफेलाइटिस से..
और 2017 तक देखने को मिली, ये सारे डाटा हमने एक साथ इकट्ठे करने के लिए टीमें लगाईं, बहुत सारे संगठनों को हमने एक साथ जोड़ा था, बहुत सारे विभाग एक साथ जुड़े थे और फिर हम लोगों ने जब एक साथ फोकस्ड कार्रवाई की, परिणाम क्या है?
2019 के बाद इंसेफेलाइटिस का उन्मूलन हो गया है, आज इंसेफेलाइटिस की बीमारी नहीं है और हर बच्चा बच गया है..
हमने उसको जाति के आधार पर नहीं देखा है, हमने उसको किसी उस आधार पर नहीं देखा है, आप लोगों का नजरिया जाति का हो सकता है, आप लोग जाति के आधार पर सोचते हैं..
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शासन को भेदभाव नहीं करना चाहिए, कानून की निगाह में शासन की योजनाओं का लाभ समान रूप से सबको मिलना चाहिए और इसीलिए सरकार इस बारे में कहती है कि मूल जानना बड़ा कठिन है..
दिनकर की पंक्तियां मुझे याद आती हैं,
“मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का, धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का, पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर और जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर” : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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आप लोग केवल जातीय आधार पर समाज को बांटते रहे, उस दलित के बच्चे के बारे में नहीं सोचते थे जो इंसेफ्लाइटिस से पीड़ित होकर के दम तोड़ता था,उस अति पिछड़ी जाति के बच्चे के बारे में नहीं सोचते..
डॉक्टर संजय निषाद जी की पीड़ा वैसे ही नहीं थी, उनकी पीड़ा इस बात को रही होगी,
आपकी पीड़ा तो इसलिए थी कि आप लोग ये चाहते थे कि वो आप लोगों का पिछलग्गू बना रहे और मंत्री न बने,
लेकिन आज एक गरीब का बच्चा, अगर एक गरीब का बेटा और गरीब का नेता मंत्री बन गया तो समाजवादियों को बुरा लग गया कि परिवार से कैसे हटकर ये आ गया…
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अप्रैल से यूपी में शिक्षामित्रों को ₹18 हजार,अनुदेशक को ₹17 हजार दिए जाएंगे, ₹5 लाख कैशलेस इलाज : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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आपने कल देखा होगा कि देश के अंदर आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने जिस AI समिट का उद्घाटन दिल्ली में किया है, वह AI समिट में 20 राष्ट्राध्यक्षों ने अपने संबोधन में जो बातें कही हैं, बहुत महत्वपूर्ण बातें कही हैं और डाटा के AI के बारे में कि AI किस रूप में नई संभावनाओं को आगे क्रिएट कर सकता है, इसमें हमारी क्या भूमिका हो सकती है, लेकिन उसके लिए स्किल मैनपॉवर चाहिए..
उस स्किल मैनपॉवर के लिए आज उत्तर प्रदेश सरकार अपने नौजवानों के लिए, क्योंकि हमारा मानना है कि AI गेम चेंजर होने वाला है और इसमें यूपी के युवाओं को, यूपी के स्केल का, क्योंकि उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य है जिस राज्य ने 56 से 60 फ़ीसदी हमारे पास जो युवा है वह कामकाजी है, जो हमारे पास आबादी है यह कामकाजी है और इसको कार्य चाहिए..
उस कामकाजी युवा के लिए AI की भूमिका क्या हो सकती है, खासतौर पर हमारे स्कूल-कॉलेजेस में पढ़ने वाले बच्चों के लिए,
*हम लोग उनके लिए “AI टूल्स” के “फ्री वर्जन” का उपयोग करने के लिए उनको अब तक पैसे देने की आवश्यकता पड़ेगी और उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में 25 लाख उत्तर प्रदेश के नौजवानों को AI वर्जन को फ्री में उपलब्ध करवाने की दिशा में एक बड़ी कार्य योजना के साथ कार्य करेगी*
यह उत्तर प्रदेश के नौजवानों के लिए हम लोग एक नए कार्यक्रम की घोषणा करने जा रहे हैं…
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सिंचाई की क्षमता को बढ़ाया गया, विस्तार किया गया,सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना कब से लंबित पड़ी हुई थी,शिवपाल जी इसीलिए भाग गए, उनको मालूम था ये नाम आएगा, सिंचाई मंत्री के रूप में उन्होंने क्या काम किया है,कल वो टिप्पणी कर रहे थे स्वतंत्र देव जी पर..
बाणसागर की परियोजना हो, अर्जुन सहायक की हो, या सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना हो, मध्य गंगा की हो, भारत सरकार उसपर कार्य कर चुकी है या कार्य कर रही है। हमने लाखों हेक्टेयर लैंड को सिंचाई की सुविधा भी दी है, लेकिन जो बची जो ऐसे ट्यूबवेल हैं जहाँ किसान आज भी डीजल से अपना पंपिंग सेट चला करके सिंचाई करता है, उन ट्यूबवेल को हम सोलर पैनल देने की व्यवस्था करने जा रहे हैं और उस दिशा में हम लोगों ने 2000 करोड़ रुपये की व्यवस्था भी इसमें की है : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
*बजट पर चर्चाः सीएम योगी कॉपी 3*
*उत्तर प्रदेश अब बीमारू नहीं, फ्रंट रनर स्टेटः सीएम योगी*
*मुख्यमंत्री ने विधानसभा में नीति आयोग और कैग की रिपोर्ट का दिया हवाला*
*कहा- वित्तीय अनुशासन में हर तरफ हो रही है उत्तर प्रदेश की सराहना*
*पूंजीगत निवेश और पारदर्शिता से बदली प्रदेश की तस्वीरः मुख्यमंत्री*
*कारीगरों को दी टूलकिट, युवाओं को मुहैया कराया गारंटीमुक्त और ब्याजमुक्त ऋणः सीएम योगी*
*उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट, तीन करोड़ से अधिक रोजगारः योगी आदित्यनाथ*
*लखनऊ, 20 फरवरी।* वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में रोजगार सृजन का सबसे बड़ा माध्यम एमएसएमई सेक्टर है और सरकार ने इसे सशक्त बनाने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस राज्य के पास एमएसएमई का मजबूत नेटवर्क, सस्ता और कुशल मानव संसाधन होता है, वही राज्य बड़े औद्योगिक निवेश आकर्षित करने में सफल होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले संभावनाएं तो थीं लेकिन निवेश का माहौल नहीं था। एमएसएमई इकाइयां उपेक्षित थीं और परंपरागत उद्योग हताशा की स्थिति में थे। नौ वर्षों में हमने उन्हें उबारने में महत्वपूर्ण कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग की ‘फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2025’ रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को ‘फ्रंट रनर’ श्रेणी में रखा गया है। व्यय की गुणवत्ता, पूंजीगत निवेश, ऋण स्थिरता और राजकोषीय अनुशासन के मानकों पर राज्य को संतुलित और सुदृढ़ बताया गया है। उन्होंने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने भी उत्तर प्रदेश की सुदृढ़ राजस्व स्थिति और संतुलित वित्तीय प्रबंधन की सराहना की है। ये आज के उत्तर प्रदेश की स्थिति है।
*परंपरागत उद्योगों को मिला नया जीवन*
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुरादाबाद का ब्रास उद्योग, फिरोजाबाद का ग्लास उद्योग, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, गोरखपुर का टेराकोटा और भदोही की कालीन, ये सभी सदियों पुरानी परंपराएं हैं। सरकार ने इनका सर्वे और मैपिंग कर यह आकलन किया कि इन्हें डिजाइन, तकनीक, वित्त, पैकेजिंग, मार्केटिंग और प्रशिक्षण में कहां सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना शुरू की गई, जिसके माध्यम से इन पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान और बाजार मिला।
*96 लाख एमएसएमई यूनिट, तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार*
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में सर्वाधिक लगभग 96 लाख एमएसएमई यूनिट उत्तर प्रदेश में हैं। इन इकाइयों में तीन करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं और उन्हें रोजगार तथा स्वरोजगार प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक एमएसएमई इकाई के लिए पंजीकरण की व्यवस्था की गई है और पंजीकृत इकाइयों को पांच लाख रुपये तक का सुरक्षा बीमा कवर राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है।
*विश्वकर्मा श्रम सम्मान और ग्राम स्वावलंबन*
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी ग्राम स्वराज की अवधारणा के अंतर्गत गांव आत्मनिर्भर होते थे। समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर हुई। इसे पुनर्जीवित करने के लिए वर्ष 2019 में ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ लागू की गई। इसके तहत कारीगरों को टूलकिट वितरण, प्रशिक्षण और सस्ती दरों पर ऋण की सुविधा दी जा रही है।
*1.10 लाख युवाओं को गारंटीमुक्त और ब्याजमुक्त ऋण*
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा योजना’ लागू की गई है। इसके अंतर्गत तीन चरणों में 5 लाख, 7.5 लाख और 10 लाख रुपये तक का गारंटीमुक्त एवं ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब तक 1,10,000 से अधिक युवाओं को इस योजना के तहत बैंकों से ऋण उपलब्ध कराने में सहायता दी गई है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे युवाओं के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि वे सफल उद्यम स्थापित कर सकें।
*बजट पर चर्चा- सीएम योगी (कॉपी- 4)*
*यूपी में पहली बार हमने आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत कियाः मुख्यमंत्री*
*सीएम योगी ने भारत मंडपम में कांग्रेस की हरकतों की निंदा की*
*बोले- भारत की छवि को खराब करने वालों के खिलाफ होनी चाहिए कठोरतम कार्रवाई*
*लखनऊ, 20 फरवरीः* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट 2026-27 में चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने पहली बार सदन के अंदर अपना आर्थिक सर्वेक्षण भी प्रस्तुत किया है। इसके लिए काफी दिनों से काम चल रहा था। मैंने वित्त मंत्री से कहा कि काम किया है तो आंकड़े सभी के सामने आने ही चाहिए।
सीएम योगी ने कहा कि सरकार द्वारा निरंतर किए जाने वाले प्रयासों का परिणाम है कि यूपी ने लॉ एंड ऑर्डर, रिस्क से स्टेबल व निवेश के ड्रीम डेस्टिनेशन के रूप में खुद को स्थापित करने में सफलता पाई है। यह यूपी की नई पहचान बनी है। अब हमें हर स्तर पर ट्रिपल टी (टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन) देखने को मिलता है।
सीएम ने कहा कि इंडस्ट्री 4.0 ने ऑटोमेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डाटा व एआई के माध्यम से हमारी बढ़त बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के अंदर पहली बार एआई इंपैक्ट समिट दिल्ली में चल रहा है। इसमें 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। भारत इस फील्ड का नया लीडर बनकर उभरा है। सीएम ने सदन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए इंडस्ट्री- 5.0 की चर्चा की, बोले- इंडस्ट्री 5.0 के जरिए टेक्नोलॉजी केंद्रित नया मॉडल आ रहा है, यह मानव केंद्रित व मूल्य आधारित औद्योगिक व्यवस्था की स्थापना पर आधारित होना है। सीएम ने एआई की भूमिका पर भी चर्चा की।
सीएम योगी ने कहा कि पूरा देश व दुनिया भारत की तरफ देख रही है। एक तरफ पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया में खुद को बड़ी ताकत के रूप में स्थापित किया है तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के युवा संगठन ने भारत मंडपम में शर्मनाक घटना करने का प्रयास किया है। दुनिया में भारत की छवि को खराब करने का प्रयास हुआ है, जिसकी हम निंदा करते हैं। कांग्रेस नेता देश की कीमत पर खिलवाड़ करना चाहते हैं। सीएम ने कहा कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप होते हैं, लेकिन जहां 100 से अधिक देश के लोग भागीदार बन रहे हैं, वहां देश की छवि के साथ खिलवाड़ और उत्पात मचाकर अराजकता फैलाने का प्रयास हुआ है, हर भारतवासी को इसकी निंदा करनी चाहिए। भारत की छवि को खराब करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए।
*बजट पर चर्चा- सीएम योगी – कॉपी-5*
*डाटा ही नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला, एआई बनेगा ‘न्यू ऑयल’ : मुख्यमंत्री*
*- बोले, बजट 2026-27 में डाटा सेंटर की स्थापना और स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी गठन की घोषण की गई*
*- डाटा सेंटर क्लस्टर से मजबूत होगा डिजिटल गवर्नेंस मॉडल, सुरक्षित डाटा संग्रहण, प्रोसेसिंग और प्रबंधन से शासन की दक्षता व पारदर्शिता में आएगी वृद्धि*
*- रिएक्टिव से प्रोएक्टिव मॉडल की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश, डाटा विश्लेषण के आधार पर संभावित चुनौतियों का पूर्व आकलन कर तैयार होगी रणनीति*
*लखनऊ, 20 फरवरी:* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट 2026-27 में चर्चा पर भाग लेते हुए कहा कि बजट में डाटा सेंटर की स्थापना और स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी के गठन को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में डाटा नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला बन चुका है और एआई आने वाले समय में ‘न्यू ऑयल’ की भूमिका निभाने जा रही है। ऐसे में डाटा की उपयोगिता और उसके वैज्ञानिक प्रबंधन को समझना अत्यंत आवश्यक है।
*वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में एक भी डाटा सेंटर नहीं, आज सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठा रही*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय दुनिया में “ऑयल इकोनॉमी” की अवधारणा प्रमुख थी, यानी जिसके पास तेल संसाधन थे, वही वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभावी था। इसके बाद उभरती प्रौद्योगिकियों ने महत्व प्राप्त किया और जिन देशों ने इन पर एकाधिकार स्थापित किया, उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की। वर्तमान समय में पूरी दुनिया यह स्वीकार कर रही है कि एआई भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति बनने जा रही है और इसके लिए सबसे पहली आवश्यकता सशक्त डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर की है। इसी दृष्टि से प्रदेश सरकार ने डाटा सेंटर की स्थापना और डाटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने का कार्यक्रम आगे बढ़ाया है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में डाटा सेंटर नहीं थे, लेकिन उसके बाद सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए। अब प्रदेश में कई डाटा सेंटर स्थापित हो चुके हैं और कई प्रस्तावित हैं। सरकार का उद्देश्य इन डाटा सेंटरों को क्लस्टर के रूप में विकसित कर उन्हें अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाना है। डाटा सेंटर का मुख्य कार्य डिजिटल डाटा को सुरक्षित रूप से संग्रहित करना, उसकाे प्रोसेसिंग करना और उसका सुव्यवस्थित प्रबंधन करना है। ये तीनों प्रक्रियाएं शासन की दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी सोच के साथ स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
*डाटा विश्लेषण के आधार पर चुनौतियों का आकलन कर तैयार की जाएगी रणनीति*
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक शासन की कार्यप्रणाली में कई बार एक ही विभाग अलग-अलग समय पर एक ही विषय के अलग-अलग आंकड़े प्रस्तुत करता रहा है। इससे नीति निर्माण और रणनीति निर्धारण में कठिनाई आती है। कई बार विभागीय स्तर पर एकीकृत और प्रमाणिक डाटा प्रणाली के अभाव में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। सही और प्रमाणित डाटा न होने के कारण कार्य योजनाएं प्रभावी ढंग से तैयार नहीं हो पाती थीं। अब तक शासन की कार्यशैली अधिकतर “समस्या से समाधान” की ओर केंद्रित रही। इससे भविष्य के लिए दीर्घकालिक और समग्र रणनीति बनाने में डाटा आधारित पूर्वानुमान की कमी महसूस की जाती रही। अब इंडिविजुअल दृष्टिकोण की बजाय यूनिवर्सल अप्रोच अपनाने की आवश्यकता है, ताकि नीतियां सभी पर समान रूप से लागू हों और व्यापक हित में काम करें। “सबका साथ, सबका विकास” की भावना को साकार करने में डाटा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सरकार रिएक्टिव मॉडल से आगे बढ़कर प्रिडिक्टिव और प्रोएक्टिव मॉडल की दिशा में कार्य करना चाहती है। ऐसे में समस्याओं के उत्पन्न होने के बाद समाधान खोजने की बजाय, डाटा विश्लेषण के आधार पर पहले से संभावित चुनौतियों का आकलन कर रणनीति तैयार की जाएगी।
*“क्रिटिकल थिंकिंग” ही साबित होगी वास्तविक गेम चेंजर*
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी को प्रदेश का सुप्रीम रेगुलेटर और आर्किटेक्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। यह अथॉरिटी विभिन्न विभागों से डाटा एकत्रित कर उसे एकीकृत करेगी, उसका विश्लेषण करेगी और नीति निर्माण में उसका उपयोग सुनिश्चित करेगी। यह डाटा को जोड़ने और उसका सार्थक उपयोग करने में “क्रिटिकल थिंकिंग” ही वास्तविक गेम चेंजर साबित होगी। डाटा आधारित प्रशासन से पारदर्शिता, दक्षता और भविष्य उन्मुख नीति निर्माण को बल मिलेगा। डाटा सेंटर क्लस्टर और स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी का गठन उत्तर प्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस और एआई आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
*वर्ष 2017 के बाद शुरू किए इंफेसेलाइटिस को जड़ से खत्म करने के लिए कार्य*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंफेसेलाइटिस की चपेट में आने वाले बच्चों को न तो इलाज मिल पाता था और ना ही इसके उन्मूलन की दिशा में ठोस प्रयास किए गए। वर्ष 2017 में जब हम सत्ता में आए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा कि बीमारी के उपचार के लिए सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। सभी अस्पतालों को सुदृढ़ किया जाए। इसके साथ ही बीमारी के उन्मूलन पर प्रभावी कार्य किया जाए। पहले स्थिति यह थी कि कोई बीमार होता था तो केवल उसके इलाज की व्यवस्था की जाती थी। बीमारी की जड़ तक पहुंचने का प्रयास नहीं हुआ। वर्ष 2017 के बाद सरकार ने व्यापक स्तर पर डाटा एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू की। विभिन्न विभागों, संगठनों और विशेषज्ञ टीमों को एक साथ जोड़कर यह विश्लेषण किया गया कि आखिर मरीज सबसे अधिक किन क्षेत्रों से आ रहे हैं और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है। प्रदेश में नौ क्लाइमेटिक जोन हैं और हर जलवायु क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग प्रकार की बीमारियां अलग-अलग समय पर देखने को मिलती हैं। हर जगह डेंगू, मलेरिया, कालाजार, चिकनगुनिया या कैंसर नहीं होता और न ही पूरे प्रदेश में इंसेफेलाइटिस समान रूप से फैला होता था। क्षेत्र की जैव पारिस्थितिकी और जलवायु के अनुरूप बीमारियों का स्वरूप भी बदलता है। इसी आधार पर सरकार ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए अध्ययन किया।
*आज प्रदेश में इंफेसेलाइटिस की बीमारी प्रभावी रूप से समाप्त हो चुकी*
मुख्यमंत्री ने कहा कि डाटा विश्लेषण के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि इंसेफेलाइटिस से अधिक मौतें उन क्षेत्रों में हो रही थीं, जहां शुद्ध पेयजल का अभाव था और लोग खुले में शौच के लिए मजबूर थे। इसके बाद उपचार की व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ दो प्रमुख मोर्चों पर काम किया गया। वह हैं, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और हर घर में शौचालय निर्माण। यह सरकार की प्रोएक्टिव और यूनिवर्सल अप्रोच थी। पहले हर वर्ष 1200 से 1500 बच्चों की मौत केवल इंसेफेलाइटिस से होती थी। इनमें अनुसूचित जाति, अति पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक समुदाय और गरीब परिवारों के बच्चे बड़ी संख्या में शामिल थे। प्रदेश में चार बार समाजवादी पार्टी की सरकार रही लेकिन इस दौरान भी हर साल इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की जान जाती रही। वर्ष 2017 तक यह बीमारी गंभीर रूप से मौजूद थी। हमने सभी उपलब्ध आंकड़ों को एक साथ संकलित किया, विभिन्न विभागों को समन्वित किया और फोकस्ड कार्रवाई शुरू की। इसका परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2019 के बाद इंसेफेलाइटिस के उन्मूलन की स्थिति बन गई और आज यह बीमारी प्रभावी रूप से समाप्त हो चुकी है। अब पूर्वी उत्तर प्रदेश में बच्चे की मौत इंफेसेलाइटिस से नहीं होती है। सरकार ने इस अभियान को किसी जाति या वर्ग के आधार पर नहीं देखा। शासन की सुविधाएं हर नागरिक का अधिकार हैं और राज्य के प्रत्येक व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचनी चाहिए। सरकार की नीतियां जाति-आधारित नहीं, बल्कि सर्वसमावेशी दृष्टिकोण पर आधारित हैं।
*पूर्ववर्ती सरकारों ने केवल जातीय समीकरणों के आधार पर राजनीति की*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शासन को किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए और कानून की नजर में सरकार की योजनाओं का लाभ सभी को समान रूप से मिलना चाहिए। सरकार का दायित्व है कि वह समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक बिना जाति, वर्ग या किसी अन्य आधार पर भेदभाव किए योजनाओं का लाभ पहुंचाए।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि“मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का। धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का। पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर और जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर।” उन्होंने कहा कि समाज को जातीय आधार पर बांटने की राजनीति ने प्रदेश को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाया। पूर्ववर्ती सरकारों ने केवल जातीय समीकरणों के आधार पर राजनीति की, लेकिन उस दलित या अति पिछड़े वर्ग के बच्चे के बारे में नहीं सोचा, जो इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी से दम तोड़ता था।
उन्होंने कहा कि जब एक गरीब परिवार का बेटा आगे बढ़कर मंत्री बनता है तो कुछ लोगों को आपत्ति होती है, क्योंकि वे चाहते थे कि वह केवल उनका समर्थक बनकर रहे, नेतृत्व न करे।
*योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव सभी तक पहुंचे, यही सरकार की प्रतिबद्धता*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिद्धार्थनगर को कभी इंसेफेलाइटिस का एपिसेंटर माना जाता था। सबसे अधिक मरीज सिद्धार्थनगर से आते थे और उनका इलाज गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में होता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में बच्चे दम तोड़ देते थे। देवीपाटन कमिश्नरी के तहत आने वाले क्षेत्रों में इस बीमारी को ‘अज्ञात बीमारी’ बताकर प्रस्तुत किया जाता था।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2007 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वे सांसद थे, तब बलरामपुर जिला अस्पताल में ‘अज्ञात बीमारी’ से 10 बच्चों की मौत की खबर पढ़कर वे स्वयं अस्पताल पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि बच्चों में इंसेफेलाइटिस के स्पष्ट लक्षण थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, इसलिए बीमारी को अज्ञात बताना पड़ता है। उस समय की सरकार ने इस गंभीर समस्या के समाधान के प्रति इच्छाशक्ति नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए। अस्पतालों की व्यवस्था सुदृढ़ की गई, उपचार सुविधाओं का विस्तार किया गया और इंसेफेलाइटिस उन्मूलन के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। परिणामस्वरूप आज इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों की संख्या शून्य पर पहुंच चुकी है।
सीएम ने कहा कि बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने से परिणाम नहीं आते। वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि धरातल पर क्या परिवर्तन हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने परिणाम देने वाली राजनीति को प्राथमिकता दी है। शासन की योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव सभी तक पहुंचे, यही सरकार की प्रतिबद्धता है। *बजट पर चर्चा- सीएम योगी (कॉपी-6)*
*डिजिटल इंटरप्रेन्योर योजना- 8000 न्याय पंचायतों में करेंगे डिजिटल उद्यमी का चयनः सीएम*
*सीएम योगी ने सदन में की घोषणाएं*
*मातृशक्ति को समर्पित महिला उद्यमी उत्पाद विपणन केंद्र की घोषणा, 100 करोड़ की व्यवस्था*
*60 लाख सुरक्षित प्रसव के लिए 1000 करोड़ की व्यवस्था*
*लखनऊ, 20 फरवरीः* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट 2026-27 में चर्चा पर भाग लेते हुए तीसरी बड़ी घोषणा की। उन्होंने डिजिटल इंटरप्रेन्योर योजना का जिक्र किया और बोले-हम लोग 8000 न्याय पंचायतों में डिजिटल उद्यमी का चयन करेंगे। इन उद्यमियों में 50 फीसदी महिलाएं होंगी, जो उसी न्याय पंचायत की बेटी-बहू होंगी। इन्हें 10 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा। इसकी व्यवस्था बजट में है। गाँव के अंदर वे सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाएंगे, जिससे गाँव अब तक वंचित था। सीएम ने कहा कि ‘ऑप्टिकल फाइबर की फैसिलिटी’ की बात हो या फिर उसके माध्यम से गांव के बहुत सारे ऐसे प्रोडक्ट, जिन्हें अन्य जगह पहुंचाने या ऑनलाइन ट्रेडिंग की जरूरत है, हम उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।
*मातृशक्ति को समर्पित महिला उद्यमी उत्पाद विपणन केंद्र की घोषणा, 100 करोड़ की व्यवस्था*
सीएम योगी ने यूनियन बजट में घोषित ‘शी मार्ट’ योजना की तर्ज पर मातृशक्ति को समर्पित नई स्कीम ‘महिला उद्यमी उत्पाद विपणन केंद्र’ की घोषणा की। कहा कि यूपी में लगभग एक करोड़ महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी हैं। इनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को अभी तक केंद्र मिल पाना कठिन होता था। हम इसे न्याय पंचायत के साथ जोड़ने जा रहे हैं। इसमें 100 फीसदी महिलाएं होंगी और इसके लिए 100 करोड़ की व्यवस्था की गई है। न्याय पंचायत स्तर पर उनके लिए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तैयार करेंगे। महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप द्वारा जो भी उत्पाद बनाया जाएगा, उसकी बिक्री की व्यवस्था होगी। यह सब डिजिटल इंटरप्रेन्योर योजना के साथ जुड़ेगा। सरकार एक करोड़ महिलाओं को जोड़ने व आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य करेगी।
*60 लाख सुरक्षित प्रसव के लिए 1000 करोड़ की व्यवस्था*
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) व शिशु मृत्यु दर (एसएमआर) का रेशियो काफी खराब रहा है। 2017 में हम लोग आए थे तो स्थिति काफी खराब थी। प्रतिवर्ष 60 लाख सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हो, इसके लिए भी 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसे संस्थागत स्वरूप देंगे। सीएम ने कहा कि इनपैनल्ड हॉस्पिटल में भी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे, इंसेंटिव देंगे। उन्होंने कहा कि मातृत्व व बचपन सुरक्षित रहेगा।
*किसानों के लिए भी सरकार ने खोला पिटारा*
सीएम योगी ने कहा कि कृषि एक्सपोर्ट सपोर्ट मिशन के लिए बजट में घोषणा की गई है। यूपी के किसानों का उत्पाद ग्लोबल मार्केट में पहुंच जाए, उसके लिए पहले चरण में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया है। पिछली बार हम लोगों ने कहा था कि यूपी में 40 लाख ट्यूबवेल हैं। सपा के समय सब भगवान भरोसे था। न बिजली आती थी और न ट्यूबवेल चलता था। किसी तरह किसान खेती कर पाता था। हम बिजली कनेक्शन से जुड़े 16 लाख ट्यूबवेल वाले किसानों को फ्री में बिजली दे रहे। इस पर सरकार हर वर्ष तीन हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। उन्होंने सदन से अनुपस्थित तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव के कार्यों का जिक्र करते हुए उन पर कटाक्ष भी किया।
सीएम योगी ने सिंचाई क्षमता में विस्तार की भी चर्चा की। कहा कि बाणसागर, अर्जुन सहायक, सरयू नहर, मध्य गंगा परियोजना पर सरकार कार्य कर चुकी है या कर रही है। लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा भी दी है, लेकिन ऐसे ट्यूबवेल, जहाँ किसान आज भी डीजल से पंपिंग सेट चला करके सिंचाई करता है, उन ट्यूबवेल को सोलर पैनल देने की व्यवस्था करने जा रहे हैं। उस दिशा में 2000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। सरकार ने किसान को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ा है।
*बजट पर चर्चाः सीएम योगी क़ॉपी 7*
*अप्रैल से शिक्षामित्रों को 18,000, अनुदेशकों को 17,000 रुपये मिलेगा मानदेयः योगी*
*जिन विकास खंडों में कस्तूरबा विद्यालय नहीं हैं, वहां 580 करोड़ रुपये की व्यवस्था: सीएम योगी*
*सीएम योगी ने की बड़ी घोषणा, गरीब, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग की बालिकाओं के लिए की जा रही विशेष व्यवस्था*
*स्कूल सुरक्षा ऑडिट के बाद अनुरक्षण कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये की घोषणाः सीएम योगी*
*सीएम कंपोजिट विद्यालयों के लिए 2,382 करोड़ रुपये तथा प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने के लिए 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था*
*शिक्षकों और कार्मिकों के आश्रित परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी प्रदान की जाएगीः मुख्यमंत्री*
*लखनऊ, 20 फरवरी।* विधानसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा क्षेत्र में सरकार द्वारा किए गए व्यापक सुधारों और नई घोषणाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सशक्तीकरण, शिक्षक कल्याण और छात्र सुविधाओं को अभूतपूर्व प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्ता, तकनीक, शोध और कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से उत्तर प्रदेश को ज्ञान और नवाचार की अग्रणी शक्ति बनाना है। इस बजट में बड़ी घोषणा की गई है, जिसमें जिन विकास खंडों में कस्तूरबा विद्यालय नहीं हैं, वहां इनकी स्थापना के लिए 580 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है।
बेसिक शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर मुख्यमंत्री ने कहाकि पूर्व की तुलना में अब गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ड्रॉपआउट रेट में कमी आई है और कंपोजिट विद्यालयों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और ऑपरेशन कायाकल्प के तहत मिशन निपुण एवं डिजिटल एजुकेशन जैसे कार्यक्रम लागू किए गए हैं। कंपोजिट विद्यालयों के लिए भी पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं हैं, वहां नए विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए बजट में 580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह व्यवस्था विशेष रूप से गरीब, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग की बालिकाओं के लिए की जा रही है। इसके अतिरिक्त स्कूल सुरक्षा ऑडिट के बाद अनुरक्षण कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये, सीएम कंपोजिट विद्यालयों के लिए 2,382 करोड़ रुपये तथा प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने के लिए 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। शिक्षकों और कार्मिकों के आश्रित परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
शिक्षामित्रों के मानदेय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में 3,000 रुपये दिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया था। अब अप्रैल से शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये तथा अनुदेशकों को 17,000 रुपये मानदेय दिया जाएगा। साथ ही पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और खेल सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है। पीएम श्री विद्यालयों के अतिरिक्त भवन निर्माण के लिए बजट प्रावधान किया गया है। बालिकाओं के लिए 300 करोड़ रुपये से सेनेटरी नैपकिन की व्यवस्था की जाएगी। शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए कैशलेस सुविधा भी लागू की जाएगी।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, कौशल, शोध और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर बल दिया गया है। नैक मूल्यांकन में प्रदेश के छह राज्य विश्वविद्यालयों को A++ रैंकिंग प्राप्त हुई है। नैक मान्यता प्राप्त संस्थानों की संख्या 95 से बढ़कर 158 हो गई है। एनआईआरएफ रैंकिंग में संस्थानों की संख्या 32 से बढ़कर 158 हो गई है। पेटेंट फाइलिंग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां पूर्व में संख्या अत्यंत कम थी, वहीं वर्तमान में 5,677 पेटेंट फाइल किए गए हैं और लगभग 350 स्वीकृत हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने विभिन्न मंडलों में नए विश्वविद्यालय स्थापित किए हैं, जिनमें सहारनपुर, अलीगढ़, आजमगढ़, मिर्जापुर, देवीपाटन और मुरादाबाद मंडल शामिल हैं। निजी विश्वविद्यालयों के लिए पारदर्शी नीति लागू की गई है। नियमों के उल्लंघन पर दो विश्वविद्यालयों की मान्यता निरस्त भी की गई है।
उन्होंने बताया कि ग्रेटर नोएडा में वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कैंपस की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसके अलावा स्किल इंडिया मिशन, सीएम विद्यालक्ष्मी योजना, चेवनिंग स्कॉलरशिप, एआई सर्टिफिकेशन सपोर्ट स्कीम, स्टेम हॉस्टल योजना (बालिकाओं हेतु) और रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना जैसी पहलों के माध्यम से युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा रहा है। सरकार ने विश्वविद्यालयों में शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय हेतु बजट में पृथक धनराशि का भी प्रावधान किया है।
*बजट पर चर्चा- सीएम योगी (कॉपी-8)*
*अकेले उत्तर प्रदेश में 55 प्रतिशत स्मार्टफोन का हो रहा निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उत्पादन में भी अग्रणी: सीएम*
*- आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में नौ वर्षों में हुई ऐतिहासिक प्रगति, 60 प्रतिशत कंपोनेंट का यूपी में हो रहा उत्पादन*
*- 21 फरवरी को गौतमबुद्ध नगर में होगा फैब यूनिट का शिलान्यास, सेमीकंडक्टर निवेश को मिलेगी नई गति*
*- यूपी में 20 हजार से अधिक स्टार्टअप सक्रिय, आधे का नेतृत्व महिलाएं कर रहीं, नेशनल स्टार्टअप रैंकिंग में टॉप परफॉर्मर राज्य बना यूपी*
*लखनऊ, 20 फरवरी:* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट 2026-27 पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में पिछले नौ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इस अवधि में प्रदेश ने इस सेक्टर में नई दिशा और नई गति के साथ कार्य किया है, जिसके परिणामस्वरूप आज देश के कुल स्मार्टफोन निर्माण का 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहा है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश अग्रणी बनकर उभरा है। पूरे देश में बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का लगभग 60 प्रतिशत उत्पादन यूपी में हो रहा है, जो बड़े पैमाने पर औद्योगिक विस्तार और निवेश का संकेत है।
*21 फरवरी को गौतमबुद्ध नगर में फैब यूनिट का किया जाएगा शिलान्यास*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैश्विक निवेश के तहत सेमीकंडक्टर क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश की शुरुआत कर दी है। 21 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से गौतमबुद्ध नगर में एक फैब यूनिट का शिलान्यास किया जाएगा। इस परियोजना में दुनिया की अग्रणी कंपनियां भारत से जुड़ी कंपनियों के साथ मिलकर निवेश करेंगी। यह उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के लिए 32,196 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने की दिशा में सरकार सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी बजट में बड़ा प्रावधान किया गया है और सरकार इस क्षेत्र को और मजबूती देने के लिए प्रतिबद्ध है। आईटी निर्यात के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वर्ष 2015-16 में प्रदेश से आईटी फील्ड के सॉफ्टवेयर का निर्यात केवल 15,000 करोड़ रुपये तक सीमित था, जबकि आज यह बढ़कर 75 से 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अकेले उत्तर प्रदेश से यह बड़ा निर्यात किया जा रहा है, जो प्रदेश की तकनीकी क्षमता और प्रतिभा का प्रमाण है।
*आज प्रदेश में 20 हजार से अधिक स्टार्टअप सक्रिय, आधे का नेतृत्व महिलाएं कर रहीं*
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में स्टार्टअप कल्चर का अभाव था, लेकिन आज उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप सक्रिय हैं। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष किया कि पहले का स्टार्टअप कल्चर “कट्टा-बम” तक सीमित था, जो एक प्रकार की अवैध गतिविधियों से जुड़ी मानसिकता को दर्शाता था। वर्तमान समय में प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है। पंजीकृत स्टार्टअप में से लगभग आधे का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। यह प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता को मिल रहे प्रोत्साहन का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश ने नेशनल स्टार्टअप रैकिंग में टॉप परफार्मर स्टेट के रूप में स्थान प्राप्त किया है।
*सरकार 25 लाख युवाओं को देगी एआर, वीआर और एक्सआर आधारित कौशल प्रशिक्षण*
मुख्यमंत्री ने कहा कि “एआई प्रज्ञा” के तहत नागरिकों और कार्मिकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में प्रशिक्षित करने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस पहल के तहत सरकार देश की तमाम बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रही है, ताकि प्रदेश के लोग नई तकनीकों में दक्ष बन सकें। मुख्यमंत्री ने सदन में इस पहल का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष के प्रति आभार जताया कि पिछले वर्ष ही माननीय सदस्यों को एआई में पारंगत बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए और सरकार इसे निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ग्लोबल वैल्यू चेन में हिस्सेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से भी विशेष कार्यक्रम चला रही है। प्रदेश में तकनीकी निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने और टेक-युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सरकार ने 25 लाख युवाओं को एआर (Augmented Reality), वीआर (Virtual Reality) और एक्सआर (Extended Reality) आधारित कौशल प्रशिक्षण देने की बड़ी योजना बनाई है। इसके लिए बजट में विशेष धनराशि की व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि युवा इन उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित होकर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त कर सकें। एआर ऐसी तकनीक है, जिसमें वास्तविक दुनिया को देखते हुए डिजिटल तत्व जोड़े जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति अपनी आंखों से वास्तविक दुनिया देखता है, लेकिन चश्मे या मोबाइल स्क्रीन के माध्यम से उस पर डिजिटल रास्ते, नाम या 3डी मॉडल प्रदर्शित किए जा सकते हैं। आज कई गेम्स और एप्लिकेशन में इसका उपयोग हो रहा है। सरकार इस क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित कर उनका स्किल डेवलपमेंट करने जा रही है।
*वीआर आधारित कार्यक्रम के लिए 100 करोड़ दिये गये*
मुख्यमंत्री ने कि बताया कि वीआर तकनीक में उपयोगकर्ता हेडसेट पहनकर पूरी तरह कंप्यूटर जनरेटेड दुनिया में प्रवेश करता है। इसमें वास्तविक दुनिया दिखाई नहीं देती, बल्कि व्यक्ति एक वर्चुअल वातावरण अनुभव करता है। उदाहरण के तौर पर, कोई बुजुर्ग व्यक्ति अपने घर में बैठकर किसी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल को देख सकता है या उसका आभासी अनुभव ले सकता है। इस तकनीक के माध्यम से पर्यटन, शिक्षा और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावनाएं हैं। सरकार ने वीआर आधारित कौशल विकास कार्यक्रम के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि एक्सआर हकीकत और डिजिटल का मिलन है। इसमें वास्तविक और डिजिटल दुनिया का ऐसा मेल होता है, जिसमें डिजिटल ऑब्जेक्ट्स केवल हवा में तैरते नहीं दिखाई देते, बल्कि उन्हें वास्तविक मेज या स्थान पर स्थापित कर इंटरैक्ट किया जा सकता है। सरकार इस तकनीक के माध्यम से पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में नई संभावनाओं को विकसित करने की तैयारी कर रही है। सरकार ने इन उभरती तकनीकों के लिए पहली बार उत्तर प्रदेश के बजट में विशेष प्रावधान किया है।
*यू हब की स्थापना के लिए धनराशि की व्यवस्था की गई*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए धनराशि की व्यवस्था की गई है। लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में यू-हब (प्लग एंड प्ले, इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन) की स्थापना की जाएगी। यह यू-हब युवाओं, स्टार्टअप्स और नवाचार से जुड़े उद्यमियों को एक ही स्थान पर आवश्यक संसाधन, मार्गदर्शन और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएगा। ये सभी चीजें बताती हैं कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य की श्रेणी से आगे बढ़ चुका है और काफी चीजें उसके सामने देखने को मिल रही हैं। आज प्रदेश की तस्वीर बदली है क्योंकि सरकार ने उस दिशा में कार्य किया है। *बजट पर चर्चाः सीएम योगी – कॉपी – 9*
*हर जिले में बनेगा ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोनः मुख्यमंत्री*
*बजट 2026-27 में बड़ा प्रावधान, कौशल विकास से लेकर निवेश तक सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे*
*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एलान, 50 से 100 करोड़ की लागत से विकसित होंगे समेकित रोजगार केंद्र*
*‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ से स्थानीय व्यंजनों को मिलेगा नया ब्रांडः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ*
*लखनऊ, 20 फरवरी।* उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर प्रत्येक जनपद में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ स्थापित करने का प्रावधान किया है। यह पहल लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर प्रदेश में रोजगार और निवेश को एकीकृत ढांचे में बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह जोन ऐसा समेकित केंद्र होगा, जहां कोई भी युवा आए उसे उसकी क्षमता के अनुसार कौशल विकास का प्रशिक्षण मिलेगा और उसी के अनुरूप रोजगार या स्वरोजगार की तैयारी भी कराई जाएगी। प्रत्येक जोन पर लगभग 50 से 100 करोड़ रुपये तक व्यय किया जाएगा। इसके लिए लगभग 100 एकड़ भूमि, जो जनपद मुख्यालय से अत्यधिक दूर न हो, उपलब्ध कराई जाएगी।
*एक ही परिसर में निवेश, प्रशिक्षण और रोजगार*
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सेवायोजन कार्यालय अलग-अलग होते थे और वास्तविक रूप से रोजगार सृजन में सीमित भूमिका निभा पाते थे। उद्योग विभाग की गतिविधियां भी बिखरी हुई थीं। अब इन सभी व्यवस्थाओं को एक ही छत के नीचे संचालित किया जाएगा। ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ में कॉमन फैसिलिटी सेंटर, टेस्टिंग लैब, प्रोडक्ट डिस्प्ले एवं डिजाइन सेंटर, प्रशिक्षण केंद्र और निवेश सहायता केंद्र जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे निवेश आकर्षित करने, कौशल विकास और रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया एकीकृत और प्रभावी बनेगी। मुख्यमंत्री ने इसे उत्तर प्रदेश को नई औद्योगिक पहचान देने वाला कदम बताया।
*‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ से पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा*
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ योजना के लिए भी प्रावधान किया गया है। ‘एक जनपद, एक व्यंजन’ की अवधारणा के तहत प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मेरठ की रेवड़ी और गजक, हाथरस की हींग, हापुड़ के पापड़, प्रयागराज के अमरूद, बलिया का हलवा और जौनपुर की इमरती जैसे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाई जाएगी। यह पहल ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) की तर्ज पर आगे बढ़ाई जाएगी।
*महिला उद्यमिता को भी मिलेगा बढ़ावा*
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ योजना को महिला उद्यमिता सशक्तिकरण से भी जोड़ा जाएगा। स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कौशल विकास, निवेश प्रोत्साहन, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और महिला सशक्तिकरण इन सभी पहलों के माध्यम से उत्तर प्रदेश को रोजगार और उद्यमिता का सशक्त मॉडल बनाया जा रहा है। बजट 2026-27 इसी समेकित विकास दृष्टि को आगे बढ़ाने वाला है। *बजट पर चर्चाः सीएम योगी कॉपी 10*
*अगले पांच वर्षों में 100 नई टाउनशिप विकसित करने का लक्ष्यः मुख्यमंत्री*
*शहरीकरण से औद्योगिक क्रांति तक, सीएम योगी ने रखा नए यूपी का बजट रोडमैप*
*100 नई टाउनशिप, 27 एक्सप्रेसवे क्लस्टर, 50 लाख करोड़ निवेश प्रस्ताव और युवाओं को 2375 करोड़ के टैबलेट*
*कंप्लायंस में बड़ी राहत, मेट्रो-रैपिड रेल विस्तार और 75 हजार एकड़ लैंड बैंक के साथ रोजगार व विकास को गति*
*लखनऊ, 20 फरवरी।* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान प्रदेश के शहरीकरण, औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और युवा सशक्तीकरण को लेकर सरकार की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश को अगले पांच वर्षों में सुनियोजित शहरी विकास की दिशा में अग्रसर करने के लिए 100 नई टाउनशिप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। हाल ही में 114 टाउनशिप प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है, जिससे प्रदेश में आधुनिक और सुव्यवस्थित नगरीय ढांचे का विस्तार होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गरीबों सहित सभी वर्गों के लिए आवास निर्माण और लैंड बैंक निर्माण की प्रक्रिया को तेज किया गया है। शहरी विकास में पारदर्शिता और सुगमता लाने के लिए कंप्लायंस रिडक्शन एवं डी-रेगुलेशन नीति लागू की गई है। इसके तहत 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भूखंडों पर केवल पंजीकरण की आवश्यकता होगी, नक्शा पास कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। वहीं 500 वर्ग मीटर तक आवासीय और 200 वर्ग मीटर तक व्यावसायिक भूखंडों के लिए स्वतः मानचित्र अनुमोदन की ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है। इससे आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
परिवहन अवसंरचना के विस्तार पर भी मुख्यमंत्री ने विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि लखनऊ मेट्रो के चारबाग से बसंत कुंज फेज के लिए 1268 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त मेरठ-दिल्ली के बीच नमो भारत ट्रेन (रैपिड रेल) के उद्घाटन की घोषणा की गई है, जिससे दोनों शहरों के बीच 40 से 45 मिनट में यात्रा संभव होगी। मेरठ में दो कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, एक नमो भारत ट्रेन और दूसरा मेट्रो संचालन के लिए जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नया आयाम देंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए प्रदेश में 27 एक्सप्रेसवे के किनारे इंटीग्रेटेड क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इन क्लस्टरों के लिए 12,500 एकड़ भूमि का लैंड बैंक तैयार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 75,000 एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है, जो निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेश मित्र पोर्टल और सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से 65 विभागों के 4,675 अनुपालन को सरल बनाया गया है। इससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है। प्रदेश को अब तक 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य की निवेश क्षमता और विश्वसनीयता को दर्शाता है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से सात लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया जारी है।
कोविड काल में अन्य राज्यों से लौटे 40 लाख श्रमिकों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनमें से 90 प्रतिशत आज उत्तर प्रदेश में ही कार्यरत हैं। यह प्रदेश में रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, लॉजिस्टिक्स रैंकिंग, गुड गवर्नेंस इंडेक्स और डी-रेगुलेशन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश अग्रणी स्थान पर है।
युवाओं के सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के अंतर्गत स्नातक एवं परास्नातक के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण के लिए 2375 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस पहल से डिजिटल शिक्षा और तकनीकी दक्षता को बढ़ावा मिलेगा तथा युवा वर्ग को रोजगारोन्मुखी अवसरों के लिए तैयार किया जा सकेगा।
*बजट पर चर्चाः सीएम योगी – कापी- 11*
*2025 में 156 करोड़ पर्यटकों के साथ यूपी बना देश का अग्रणी पर्यटन केंद्रः मुख्यमंत्री*
*धामों के विकास, आइकॉनिक सिटी और होमस्टे नीति से पर्यटन को मिली नई पहचान*
*यूनेस्को ने लखनऊ को “क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी” की मान्यता दी, अयोध्या में टाटा संस के साथ मंदिर संग्रहालय का एमओयू*
*लखनऊ, 20 फरवरी।* विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में लगभग 156 करोड़ पर्यटक उत्तर प्रदेश आए, जो प्रदेश की बदलती छवि और सुदृढ़ आधारभूत संरचना का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सरकार ने धार्मिक, सांस्कृतिक और विरासत स्थलों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम, विंध्य कॉरिडोर, चित्रकूट और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख आस्था स्थलों का व्यापक विकास किया गया है। इन स्थलों पर यात्री सुविधाओं, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और कनेक्टिविटी को मजबूत किया गया है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि सामाजिक समरसता और महापुरुषों के सम्मान को ध्यान में रखते हुए समाज कल्याण विभाग को बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, संत रविदास और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाओं एवं पार्कों के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। यह कदम सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि यूनेस्को ने लखनऊ को “क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी” के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह सम्मान प्रदेश की समृद्ध पाक परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने वाला है। उन्होंने बताया कि आगरा में मुगल म्यूजियम का नाम परिवर्तित कर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर स्मारक एवं संग्रहालय विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से राष्ट्रीय नायकों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हस्तिनापुर, सारनाथ, श्रावस्ती और बटेश्वर को आइकॉनिक सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य चल रहा है। इन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित कर पर्यटन की नई संभावनाएं सृजित की जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बागपत के पुरा महादेव में अंतरराष्ट्रीय योग एवं आरोग्य केंद्र को पीपीपी मोड पर स्थापित किया जा रहा है, जिससे वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने सदन को जानकारी दी कि अयोध्या में मंदिर संग्रहालय के निर्माण के लिए टाटा संस के साथ एमओयू किया गया है। यह संग्रहालय आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेगा।
उन्होंने कहा कि पर्यटन नीति के अंतर्गत प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्यम से होमस्टे स्थापना हेतु 2 लाख रुपये तक का कोलैटरल-फ्री ऋण उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज आस्था, संस्कृति, विरासत और आधुनिक विकास के संतुलन के साथ पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है और यह उपलब्धि प्रदेश के नागरिकों के सहयोग और सरकार की स्पष्ट नीति का परिणाम है।
*बजट पर चर्चाः सीएम योगी पार्ट 14*
*निराश्रित गोवंश के लिए 2000 करोड़ रुपये, निषादराज बोट योजना से 1622 मछुआरों को लाभः सीएम योगी*
*बजट में पशुधन, मत्स्य और पर्यावरण संरक्षण पर किया गया विशेष फोकस: मुख्यमंत्री*
*“एक पेड़ मां के नाम” अभियान से 242 करोड़ पौधरोपण, सहकारिता क्षेत्र में सस्ते ऋण की व्यवस्थाः सीएम योगी*
*लखनऊ, 20 फरवरी।* विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पशुधन, मत्स्य, पर्यावरण संरक्षण और सहकारिता क्षेत्र में व्यापक प्रावधान किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि के साथ-साथ पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र को भी समान महत्व दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए बजट में 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही नस्ल सुधार की दिशा में भी सरकार ठोस कदम उठाएगी, ताकि दुग्ध उत्पादन और पशुधन की गुणवत्ता में वृद्धि हो सके।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए बकरी, भेड़, सूअर और कुक्कुट पालन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इन गतिविधियों से स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं को आय के नए स्रोत मिलेंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।
*मत्स्य क्षेत्र में 100 करोड़ का प्रावधान*
मुख्यमंत्री ने बताया कि मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए भी सरकार ने महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। ‘निषादराज बोट योजना’ के अंतर्गत 1622 मछुआरों को नाव, जाल और लाइफ जैकेट उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनकी आजीविका सुरक्षित और सुदृढ़ हो सके। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड फिश सेंटर की स्थापना, मत्स्य बीज और ब्रूड बैंक, फिश प्रोसेसिंग सेंटर, आधुनिक मत्स्य मंडी और इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उद्देश्य यह है कि लैंडलॉक्ड राज्य होते हुए भी उत्तर प्रदेश मत्स्य उत्पादन में अग्रणी बने।
*पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा अभियान*
मुख्यमंत्री ने कहा कि “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया जा चुका है। वनाच्छादन लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस वर्ष 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि रानीपुर टाइगर रिजर्व के विकास, क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट तथा वानिकी एवं औद्यानिक विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भी बजट में धनराशि का प्रावधान किया गया है। इससे जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिलेगी।
*सहकारिता क्षेत्र में सस्ते ऋण की व्यवस्था*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में लघु और सीमांत किसानों को राहत देने के लिए कोऑपरेटिव बैंकों से मिलने वाले महंगे ऋण पर सरकार ने सहूलियत प्रदान की है। इसका उद्देश्य किसानों को सस्ता और सुलभ ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे कृषि और पशुपालन गतिविधियों को विस्तार दे सकें।
*बजट पर चर्चाः सीएम योगी – कॉपी 13*
*आज प्रदेश के नागरिक गर्व से कहते हैं कि हम उत्तर प्रदेश से हैं- सीएम योगी*
*उत्तर प्रदेश आज निवेशकों की पहली पसंद, पारदर्शिता से उन्नति की ओर*
*हमारी सरकार में प्राइमरी स्कूलों में ड्रॉप आउट रेट जीरो प्रतिशत हुआ-योगी*
*लखनऊ, 20 फरवरी* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट 2026-27 में चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में घोषणाएं बड़ी-बड़ी होती थीं लेकिन उसका कोई परिणाम नहीं आता था। हमने न केवल घोषणाएं कि बल्कि उसको धरातल पर उतारा भी है। हमारी सरकार ने प्रदेश के परसेप्शन को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। हमने यूपी के लोगों को ये हौसला दिया है कि वे देश-विदेश में जाकर गर्व के साथ कह सकें कि वह सबसे बड़ी आबादी वाले उत्तर प्रदेश के नागरिक हैं। आज उत्तर प्रदेश के नागरिक को हर व्यक्ति सम्मान की निगाह से देखता है। आज देश और दुनिया का हर बड़ा उद्योगपति प्रदेश में निवेश करने का इच्छुक है। सबकुछ ट्रांसपैरेंट है, पिक एंड चूज कुछ भी नहीं है।
*स्कूल में ड्रॉप आउट रेट जीरो हुआ*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब प्रदेश में सबकुछ एक नीति के अंतर्गत संचालित हो रहा है। उन्होंने डाटा के महत्व को गिनाते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं को बनाने और उसके क्रियान्वयन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इंसेफ्लाइटिस के खात्मे में डाटा ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। स्कूलों में ड्रॉप आउट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में प्राइमरी स्कूलों में यह रेट 6 से 7 प्रतिशत था लेकिन हमने इसको जीरो से लेकर 3 प्रतिशत तक कम करने का काम किया है। आज हम पहले चरण में एक जिले में दो कंपोजिट विद्यालय दे रहे हैं और इसको हम न्याय पंचायत स्तर तक बनाना चाहते हैं। 8000 न्याय पंचायतों में हम 8000 कंपोजिट विद्यालय बनाएंगे। डेढ़ सौ विद्यालय पिछले बजट में दिया था, डेढ़ सौ इस बजट में दिए हैं। 12 से 15 एकड़ क्षेत्रफल में प्री प्राइमरी से लेकर 12 वीं तक के बच्चे एक छत के नीचे पढ़ेंगे। एक ही कैंपस में शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास की जानकारी मिलेगी। स्पोर्ट्स की अच्छी फैसलिटी मिलेगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार ने इस बारे में नहीं सोचा था। आप लोग आरोप लगाते हैं कि शिक्षक पढ़ाते नहीं हैं जोकि बेबुनियाद है। आज भी जब हमारे शिक्षक मिलते हैं तो मैं उनको प्रणाम करता हूं। मेरा मानना है कि शिक्षकों के प्रति सम्मान का भाव हम सबके मन में होना चाहिए। हम सभी शिक्षकों को कैशलेस की सुविधा देने जा रहे हैं। इसमें बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों के साथ हम शिक्षणेतर कर्मचारियों को भी जोड़ रहे हैं।
*सरकारी योजनाओं का लाभ सभी को*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पेंशन केवल समाजवादी कैडर को मिलती थ। लेकिन हम किसी के साथ भेदभाव नहीं करते हैं। हम सबको समान रूप से देखते हैं। सरकार ने उसी अप्रोच को आगे बढ़ाया।
सीएम ने कहा कि बेटियो के ड्रॉप आउट रेट को कम करने में भी डाटा ने बड़ी भूमिका निभाई। स्टेट डाटा अथॉरिटी के गठन के पीछे यही उद्देश्य था। डाटा सेंटर के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में हब बनाने की दिशा में अग्रसर हुए हैं। हमारा मानना है कि 2030 तक 5 गीगावाट क्षमता का डाटा सेंटर बने। इस दिशा में हम काम कर रहे हैं। 4-5 बड़े डाटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना की व्यवस्था प्रारंभ की है। इससे हाइटेक इको सिस्टम का विकास होगा और इसके माध्यम से रोजगार सृजन भी होगा। स्टेट डाटा अथॉरिटी के गठन के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था इस बजट में हमने की है।
*रोबोटिक्स का विकास हमारी प्राथमिकता*
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति भारी भरकम बोझ लोड-अनलोड कर रहा है, तो यह अमानवीय है। इसके लिए रोबोटिक्स की मदद ली जा रही है। ड्रोन के जरिए खेतों में दवा डालने का काम किया जा रहा है। इससे किसानों को पेस्टीसाइड के नुकसान से बचाया जा रहा है। प्रदेश ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के लिए आईआईटी कानपुर के साथ एमओयू करके काम को आगे बढ़ाया है। रोबोटिक्स मिशन के लॉन्च के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।
*आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर विशेष फोकस*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में प्रदेश के नौजवानों के लिए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि 25 लाख नौजवानों को फ्री में एआई वर्जन उपलब्ध कराने के लिए सरकार कार्य करेगी। रोबोटिक्स, ड्रोन प्रशिक्षण, एआई, डेटा साइंस और मशीन लर्निंग में पारंगत बनाने के लिए सरकार काम करेगी। स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए एआई हब की स्थापना, शिक्षा-स्वास्थ्य-कृषि के क्षेत्र में स्टार्टअप के लिए काम करेंगे। एआई के माध्यम से किसानों को मौसम की जानकारी, मिट्टी का स्वास्थ्य विश्लेषण, फसलों पर किसी भी प्रकार के कीड़ों के हमले के पूर्व चेतावनी देने पर काम हो रहा है। इसके माध्यम से ई-कॉमर्स के लिए भी युवाओं को तैयार किया जाएगा।
*सिटी इकोनॉमिक जोन पर तेजी से काम*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी सरकार 50 प्रतिशत से अधिक शहरीकरण की दिशा में प्रयास कर रही है। सिटी इकोनॉमिक रीजन पर हम काम कर रहे हैं। लखनऊ और उसके अगल-बगल के जिलों को स्टेट कैपिटल रीजन के रूप में स्थापित कर रहे हैं जिन्हें सिटी इकोनॉमिक जोन के रूप में डेवलप किया जाएगा। दूसरा जोन काशी से लेकर विंध्याचल तक विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, भदोही, सोनभद्र और मिर्जापुर शामिल हैं। इसको हम इकोनॉमिक जोन बनाकर काम करेंगे। इस बजट में हमने इसके लिए धनराशि की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम जन विश्वास सिद्धांत के अनुरूप कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं। व्यवसाय की सुगमता हमारी प्राथमिकता है। लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन आसान होगा। इसके लिए एक पेज और एक एफिडेविट की आवश्यकता होगी। कोरोना काल में एमएसएमई के लिए लाइसेंसिंग की प्रक्रिया 1000 दिन में लेने की व्यवस्था की थी। जन विश्वास सिद्दांत को हम 53 विभागों पर लागू करने जा रहे हैं। इसके लिए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
*बजट पर चर्चाः सीएम योगी कॉपी 12*
*विकसित भारत जी राम जी योजना अधिक व्यावहारिक, किसान-श्रमिक दोनों को लाभ: मुख्यमंत्री*
*100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन रोजगार की गारंटी, काम न देने पर बेरोजगारी भत्ता अनिवार्यः सीएम*
*“गड्ढा खोदो-पाटो” से आगे बढ़कर अब पक्का निर्माण, अमृत सरोवर, बाजार और मंडी के विकास पर जोरः योगी*
*लखनऊ, 20 फरवरी।* बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कृषि बजट पर विस्तार से अपनी बात रखी थी और कृषि मंत्री ने भी इस विषय पर व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि कृषि मंत्री जी की तरह ही हमारा किसान भी स्वस्थ और पुष्ट रहे। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं के संदर्भ में कहा कि पूर्व की तुलना में वर्तमान व्यवस्था अधिक व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी है। उन्होंने विपक्ष की ओर संकेत करते हुए कहा कि पहले 100 दिन के रोजगार का प्रावधान था, लेकिन वह अनिवार्य नहीं था। यदि कोई व्यक्ति रोजगार मांगता भी था तो उसे समय पर काम नहीं मिलता था और न ही समय पर मानदेय मिलता था। यदि 100 दिन का रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया, तो कोई भत्ता देने की बाध्यता भी नहीं थी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब योजना को अधिक प्रभावी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अब 100 दिन के स्थान पर 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया गया है। यदि खेती-बाड़ी का समय नहीं है और गांव का कोई व्यक्ति रोजगार की मांग करता है, तो ग्राम प्रधान को उसे काम देना अनिवार्य होगा। यदि रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो बेरोजगारी भत्ता देना भी सुनिश्चित किया गया है।
उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस शासन में मनरेगा जिस स्वरूप में लागू की गई थी, वह व्यावहारिक नहीं थी। “गड्ढा खोदो और फिर पाट दो” जैसी स्थिति बन गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब यह योजना बन रही थी, तब उन्होंने सांसद के रूप में समिति में प्रश्न उठाया था कि यह किस प्रकार की व्यवस्था है। एक ही गड्ढा बार-बार नहीं खोदा जा सकता। उस समय उत्तर मिला कि एक बार खोदो, दूसरी बार पाटो और यही व्यवहार में होता था। इससे किसान और श्रमिक दोनों ही परेशान थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब स्थिति बदली है। वर्तमान योजना के तहत पक्का निर्माण कार्य कराया जा सकता है। गांवों में ‘विकसित भारत जी राम जी’ योजना के अंतर्गत स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गांवों में जो बाजार पहले सड़कों पर लगते थे, उनके लिए सुरक्षित और निर्धारित स्थान विकसित किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सब्जी मंडियां जब सड़कों पर लगती हैं तो ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। अब योजना के तहत सुरक्षित मंडी स्थल, चबूतरे और बाजार का निर्माण किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अमृत सरोवर का निर्माण भी किया जा सकता है, जिससे जल संरक्षण और ग्रामीण सौंदर्यीकरण दोनों को बढ़ावा मिलता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था पूर्व की तुलना में अधिक व्यावहारिक है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। किसान और श्रमिक दोनों को इसका सीधा लाभ मिलेगा तथा गांवों में स्थायी आधारभूत संरचना का विकास संभव होगा।
*बजट पर चर्चा- सीएम योगी (कॉपी-15)*
*पूर्वदशम-दशमोत्तर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आय सीमा बढ़कर हुई ढाई लाख*
*सीएम ने सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर सदन में रखा वक्तव्य*
*वृद्धावस्था, दिव्यांगजन और निराश्रित महिला पेंशन योजना में बढ़ोतरी की घोषणा*
*सीएम ने कानपुर की खुशी का किया जिक्र, बोले-अब बोल पा रही बेटी*
*लखनऊ, 20 फरवरीः* सीएम ने सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर भी सदन में अपना वक्तव्य रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन और निराश्रित महिला पेंशन योजना से 1.6 करोड़ लाभार्थी लाभान्वित होते हैं। हम इन्हें 12,000 रुपये दे रहे हैं। इस राशि की बढ़ोतरी के लिए धनराशि की व्यवस्था बजट में की है। यह पैसा डीटीबी के माध्यम से अकाउंट में जाता है। अब बीच में कोई रुकावट नहीं होती है।
सीएम योगी ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना में बेटी के जन्म से लेकर और उसके शादी योग्य होने तक 25,000 रुपये का पैकेज दे रहे हैं। इससे 26 लाख बेटियां लाभान्वित हो रही हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के पहले चरण में 31000 रुपये, बाद में 51000 रुपये और अब यह राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये की गई। इसके लिए
